UNESCO Memory of the World List: राजतरंगिणी, महाभारत और अर्थशास्त्र को सूची में किया गया शामिल
संदर्भ:
हाल ही में इंडोनेशिया के जकार्ता में आयोजित ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड कमेटी फॉर एशिया एंड द पैसिफिक’ (MOWCAP) के 11वें सत्र के दौरान भारत की तीन कालजयी कृतियों को प्रतिष्ठित यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड सूची (UNESCO Memory of the World List) में शामिल किया गया।
- यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड 2026 (UNESCO Memory of the World 2026) में राजतरंगिणी, महाभारत और अर्थशास्त्र को शामिल किया गया।

यूनेस्को एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर में शामिल पांडुलिपियों का विवरण:
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (IGNCA) द्वारा तैयार किए गए व्यापक नामांकन डोजियर के आधार पर भारत की साहित्यिक और बौद्धिक विरासत से जुड़े तीन प्रमुख ऐतिहासिक ग्रंथों की दुर्लभ पांडुलिपियों को यूनेस्को एशिया पैसिफिक रजिस्टर (UNESCO Asia Pacific Register) में स्थान दिया गया। इनका विवरण निम्नलिखित है:
- महाभारत पांडुलिपि (Mahabharata Manuscript)
- संरक्षित स्थान एवं लिपि: यह लगभग 400 वर्ष पुरानी भोजपत्र (Birch-bark) पांडुलिपि है, जो शारदा लिपि में लिखी गई है। यह वर्तमान में भंडारकर प्राच्य अनुसंधान संस्थान (BORI), पुणे में अत्यंत सुरक्षित रूप से संग्रहित है।
- ऐतिहासिक महत्ता: महर्षि वेद व्यास द्वारा संकलित ‘महाभारत’ केवल एक युद्ध का वृत्तांत नहीं है, बल्कि यह मानव जीवन के मूल कर्तव्यों, न्याय, शासन और दर्शन का अनूठा विश्वकोश है, जो दक्षिण एशिया की साझा सांस्कृतिक स्मृति का प्रतिनिधित्व करता है।
- अर्थशास्त्र पांडुलिपि (Arthashastra Manuscript)
- संरक्षित स्थान एवं लिपि: यह 16वीं शताब्दी की दुर्लभ ताड़पत्र (Palm-leaf) पांडुलिपि है, जो ग्रंथ (Grantha) लिपि में लिखित है। यह प्राच्य अनुसंधान संस्थान (ORI), मैसूर में संरक्षित है।
- प्रशासनिक महत्ता: चौथी शताब्दी ईसा पूर्व में मौर्य काल के दौरान कौटिल्य (Kautilya Arthashastra) द्वारा रचित यह ग्रंथ लोक प्रशासन, कूटनीति, कराधान, सैन्य रणनीति और राज्य व्यवस्था (Statecraft) पर दुनिया का सबसे वैज्ञानिक विधिक दस्तावेज माना जाता है।
- राजतरंगिणी पांडुलिपि (Rajatarangini Manuscript):
- संरक्षित स्थान: यह दुर्लभ पांडुलिपि वर्तमान में ओरिएंटल रिसर्च लाइब्रेरी, श्री प्रताप सिंह (SPS) लाइब्रेरी कॉम्प्लेक्स, श्रीनगर में सुरक्षित है।
- इतिहास लेखन की विधा: 12वीं शताब्दी में कश्मीरी विद्वान कल्हण (Kalhana) द्वारा संस्कृत भाषा में रचित यह ग्रंथ कश्मीर के राजाओं का एक व्यवस्थित और क्रमिक इतिहास प्रस्तुत करता है।
- साक्ष्यों और आलोचनात्मक विश्लेषण के कारण इसे भारतीय इतिहास लेखन का पहला वास्तविक वैज्ञानिक प्रामाणिक ग्रंथ माना जाता है।
यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड सूची: यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर
- परिचय: UNESCO Memory of the World List), यूनेस्को द्वारा स्थापित एक विशेष वैश्विक कार्यक्रम है, जो दुनिया की ऐतिहासिक व मूल्यवान वृत्तचित्र विरासत (Documentary Heritage) के संरक्षण का कार्य करता है।
- स्थापना: यूनेस्को (UNESCO) द्वारा इस वैश्विक कार्यक्रम की शुरुआत वर्ष 1992 में की गई थी।
- उद्देश्य: इसका प्राथमिक लक्ष्य विश्व भर में युद्ध, आपदाओं या समय के साथ उपेक्षा के कारण नष्ट होने की कगार पर खड़ी महत्वपूर्ण यूनेस्को वृत्तचित्र विरासत (UNESCO Documentary Heritage) का संरक्षण करना, उनका डिजिटलीकरण करना तथा उन्हें सार्वभौमिक रूप से सुलभ बनाना है।
- भारत की वर्तमान स्थिति (India’s Standing): भारत में पांडुलिपियों के संरक्षण और डिजिटलीकरण के लिए राष्ट्रीय स्तर पर ज्ञान भारतम मिशन (Gyan Bharatam Mission) जैसी महत्वपूर्ण योजनाएं चलाई जा रही हैं।
- वर्ष 2024 में भारत ने रामचरितमानस, पंचतंत्र और सहृदालोक-लोचन जैसी साहित्यिक कृतियों के लिए यह सम्मान अर्जित किया था।
- वर्ष 2026 की इन तीन नई प्रविष्टियों के साथ मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर भारत (Memory of the World Register India) के क्षेत्रीय रजिस्टर में कुल पंजीकृत रचनाओं की संख्या बढ़कर छह (6) हो गई है।
भारत के लिए UNESCO वैश्विक मान्यता का महत्व:
- सांस्कृतिक कूटनीति और सॉफ्ट पावर: ये समावेशन वैश्विक पटल पर भारत को एक ऐतिहासिक ‘ज्ञान महाशक्ति’ के रूप में स्थापित करते हैं तथा भारत की समृद्ध सभ्यतागत विरासत (Civilisational Heritage) को निर्विवाद अंतरराष्ट्रीय वैधता प्रदान करते हैं।
- इतिहास लेखन के पश्चिमी दृष्टिकोण का खंडन: कल्हण की राजतरंगिणी की वैश्विक स्वीकृति इस औपनिवेशिक धारणा को खारिज करती है कि प्राचीन भारत में निष्पक्ष और कालानुक्रमिक इतिहास लेखन की कमी थी।
- विदेशी सहायता और डिजिटलीकरण का मार्ग: यूनेस्को हेरिटेज लिस्ट 2026 (UNESCO Heritage List 2026) के इस निर्णय के बाद भारत की इन दुर्लभ ऐतिहासिक पांडुलिपियों (India’s Historical Manuscripts) को दीर्घकालिक संरक्षण के लिए वैश्विक विशेषज्ञों की तकनीकी मदद और वित्तीय अनुदान प्राप्त हो सकेगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: यूनेस्को मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड सूची क्या है?
उत्तर: यह यूनेस्को द्वारा 1992 में स्थापित एक विशेष वैश्विक कार्यक्रम है, जो दुनिया की ऐतिहासिक व मूल्यवान वृत्तचित्र विरासत (Documentary Heritage) के संरक्षण का कार्य करता है।
प्रश्न 2: राजतरंगिणी, महाभारत और अर्थशास्त्र को किस सूची में शामिल किया गया है?
उत्तर: इन तीनों अमूल्य कृतियों की पांडुलिपियों को यूनेस्को के ‘मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड एशिया-पैसिफिक रीजनल रजिस्टर’ में आधिकारिक तौर पर अंकित किया गया है।
प्रश्न 3: इन तीनों ऐतिहासिक ग्रंथों की रचना किसने की थी?
उत्तर: महाभारत का संकलन महर्षि वेद व्यास ने, अर्थशास्त्र की रचना आचार्य कौटिल्य ने, और राजतरंगिणी की रचना 12वीं सदी में कल्हण ने की थी।
प्रश्न 4: यूनेस्को की क्षेत्रीय सूची में भारत की कुल कितनी रचनाएं शामिल हैं?
उत्तर: वर्ष 2026 में इन तीन ग्रंथों के जुड़ने के बाद, यूनेस्को के एशिया-प्रशांत क्षेत्रीय रजिस्टर में भारत की कुल कृतियों की संख्या बढ़कर 6 हो गई है।
प्रश्न 5: मेमोरी ऑफ द वर्ल्ड रजिस्टर का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य दुनिया भर के दुर्लभ और जोखिम ग्रस्त ऐतिहासिक दस्तावेजों, पांडुलिपियों तथा अभिलेखागारों को संरक्षित करना एवं शोध के लिए पूरी दुनिया के सामने लाना है।