Fast Track Special Courts Scheme (FTSC): केंद्रीय मंत्रिमंडल ने FTSC को मार्च 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी
संदर्भ:
हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बलात्कार और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) से संबंधित मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना (Fast Track Special Courts Scheme) को अगले पांच वर्षों यानी मार्च 2031 तक जारी रखने की मंजूरी दी।

फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट योजना के बारे में:
- परिचय: Fast Track Special Courts Scheme, एक केंद्र प्रायोजित योजना (Centrally Sponsored Scheme) है, जिसका प्राथमिक उद्देश्य देश में बलात्कार और बच्चों के खिलाफ होने वाले यौन अपराधों (POCSO Act Cases) के मुकदमों की समयबद्ध और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करना है।
- यह योजना देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सक्रिय रूप से संचालित की जा रही है।
- FTSC विस्तारित अवधि (FTSC Scheme Extension): केंद्रीय कैबिनेट के हालिया निर्णय (Government Cabinet Decisions 2026) के अनुसार, यह योजना अब 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक प्रभावी रहेगी।
- परियोजना का बजट (Fast Track Court Scheme Budget): इस पांच वर्षीय अवधि के क्रियान्वयन हेतु कुल ₹3,788.04 करोड़ का वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है।
- फंडिंग पैटर्न (Funding Pattern):
- केंद्रीय हिस्सेदारी: ₹2,353.15 करोड़, जिसे पूर्ण रूप से निर्भया फंड (Nirbhaya Fund) द्वारा वित्तपोषित किया जाएगा।
- राज्य/केंद्र शासित प्रदेश की हिस्सेदारी: ₹1,434.89 करोड़, जिसे राज्यों द्वारा अपने बजटीय संसाधनों से वहन किया जाएगा।
- पृष्ठभूमि और न्यायिक उत्पत्ति:
- विधिक आधार: इस योजना की नींव आपराधिक कानून (संशोधन) अधिनियम, 2018 (Criminal Law Amendment Act 2018) के लागू होने के बाद पड़ी।
- सर्वोच्च न्यायालय का निर्देश: 2 अक्टूबर 2019 को इस योजना को आधिकारिक रूप से लॉन्च किया गया था। यह शुरुआत माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ‘सुओ मोटो रिट (क्रिमिनल) नंबर 1/2019’ में दिए गए ऐतिहासिक निर्देशों के अनुपालन में की गई थी, जिसमें उन जिलों में विशेष न्यायालय स्थापित करने को कहा गया था जहाँ पॉक्सो अधिनियम के 100 से अधिक मामले लंबित थे।
- नोडल विभाग: यह योजना केंद्रीय कानून और न्याय मंत्रालय के न्याय विभाग (Department of Justice India) द्वारा संबंधित राज्य सरकारों के समन्वय से लागू की जा रही है।
- न्यायालयों की प्रस्तावित संख्या: वर्तमान में देश भर में 779 विशेष अदालतें कार्यात्मक हैं। नवीनतम विस्तार के तहत अदालतों की संख्या बढ़ाकर 850 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (850 Fast Track Special Courts) करने का लक्ष्य रखा गया है।
- न्यायिक स्टाफ संरचना: प्रत्येक स्वीकृत न्यायालय के सुचारू संचालन के लिए निम्नलिखित मानव संसाधन का प्रावधान है:
- 1 समर्पित न्यायिक अधिकारी (Dedicated Judicial Officer)
- 1 विशेष सरकारी वकील (Special Public Prosecutor)
- 6 सहायक कर्मचारी (Support Staff)
- योजना के तहत अब तक की प्रमुख उपलब्धियां:
- मामलों का निस्तारण: अपनी स्थापना के बाद से इन अदालतों ने त्वरित न्याय की दिशा में अभूतपूर्व कार्य किया है और बलात्कार तथा पॉक्सो अधिनियम के 4,02,457 से अधिक लंबित मामलों का सफल निपटारा किया है।
- विशेषज्ञता: वर्तमान में संचालित अदालतों में 399 अनन्य पॉक्सो विशेष न्यायालय (POCSO Special Courts) शामिल हैं, जो केवल बच्चों से संबंधित संवेदनशील अपराधों की सुनवाई करते हैं।
फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट के महत्व (Fast Track Court Significance):
- न्याय वितरण प्रणाली में तेजी: देश की सामान्य अदालतों में मुकदमों के लंबित रहने की दर बहुत अधिक है। ये विशेष अदालतें समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित कर पीड़ितों के न्यायिक इंतजार को कम करती हैं।
- पीड़ित-केंद्रित न्यायिक माहौल: यह योजना अदालतों के भीतर संवेदनशील गवाह बयान केंद्र (Vulnerable Witness Deposition Centres – VWDCs) और बाल-अनुकूल अदालती कक्षों (Child-friendly court spaces) के निर्माण को प्रोत्साहित करती है। इससे पीड़ित बच्चों और महिलाओं को बिना किसी अतिरिक्त मानसिक तनाव या भय के अपना बयान दर्ज कराने में मदद मिलती है।
- अपराधियों में कड़ा भय (Deterrence Framework): त्वरित मुकदमों और समय पर सजा (Conviction) मिलने से यौन अपराधियों के मन में कानून का डर पैदा होता है, जिससे समाज में महिलाओं और बच्चों के खिलाफ होने वाले गंभीर अपराधों को रोकने में मदद मिलती है।
- संवैधानिक अधिकारों की पूर्ति: यह प्रणाली भारतीय संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार के एक हिस्से के रूप में ‘त्वरित न्याय के अधिकार’ (Right to Speedy Justice) को धरातल पर उतारने का काम करती है।
- डिजिटल और पारदर्शी निगरानी: न्याय विभाग द्वारा FTSC डैशबोर्ड के माध्यम से इन अदालतों के प्रदर्शन और व्यय की वास्तविक समय पर ऑनलाइन निगरानी की जाती है, जिससे जवाबदेही सुनिश्चित होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट (FTSC) क्या हैं?
उत्तर: ये बलात्कार (Rape Cases Fast Track Courts) और पॉक्सो अधिनियम (POCSO Act) के लंबित मामलों के समयबद्ध और त्वरित निपटारे के लिए स्थापित विशेष अदालतें हैं।
प्रश्न 2: FTSC योजना को कब तक बढ़ाया गया है?
उत्तर: केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस महत्वपूर्ण केंद्र प्रायोजित योजना को अगले 5 वर्षों के लिए यानी 31 मार्च 2031 तक बढ़ाने की मंजूरी दी है।
प्रश्न 3: देश में कितने फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट संचालित किए जाएंगे?
उत्तर: इस योजना के विस्तारित चरण के तहत देश भर में कुल 850 फास्ट ट्रैक विशेष न्यायालय (विशेष पॉक्सो अदालतों सहित) संचालित करने का लक्ष्य रखा गया है।
प्रश्न 4: FTSC योजना के लिए कितना बजट आवंटित किया गया है?
उत्तर: वर्ष 2026 से 2031 की अवधि के लिए कुल ₹3,788.04 करोड़ का बजट आवंटित है, जिसमें से ₹2,353.15 करोड़ की केंद्रीय हिस्सेदारी निर्भया फंड से आएगी।
प्रश्न 5: फास्ट ट्रैक स्पेशल कोर्ट किन मामलों की सुनवाई करते हैं?
उत्तर: ये अदालतें प्राथमिक रूप से भारतीय न्याय संहिता (पूर्ववर्ती IPC) के तहत बलात्कार के मामलों और पॉक्सो अधिनियम, 2012 के अंतर्गत आने वाले बाल यौन उत्पीड़न के मामलों की विशेष सुनवाई करती हैं।