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International Day for Preventing Exploitation of Environment in War: 6 नवंबर 2026 को मनाया गया, युद्ध के कारण पर्यावरणीय क्षति एवं अंतर्राष्ट्रीय कानून

International Day for Preventing Exploitation of Environment in War: 6 नवंबर 2026 को मनाया गया, युद्ध के कारण पर्यावरणीय क्षति एवं अंतर्राष्ट्रीय कानून

संदर्भ:

6 नवंबर को संपूर्ण विश्व में युद्ध और सशस्त्र संघर्ष में पर्यावरण के शोषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस (International Day for Preventing Exploitation of Environment in War) मनाया जा रहा है। 

युद्ध और सशस्त्र संघर्ष में पर्यावरण के शोषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस:

  • परिचय: यह दिवस सशस्त्र संघर्षों के दौरान प्रकृति को पहुँचने वाली क्षति को उजागर करने और वैश्विक पर्यावरण सुरक्षा (Environmental Security) को सुदृढ़ करने के प्रति वैश्विक समुदाय को जागरूक करने संबंधी अंतर्राष्ट्रीय दिवस है।
  • पृष्ठभूमि: संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 5 नवंबर 2001 को अपने ऐतिहासिक प्रस्ताव संख्या A/RES/56/4 के माध्यम से प्रत्येक वर्ष 6 नवंबर को इस दिवस को मनाने की आधिकारिक घोषणा की थी।
    • इस अंतर्राष्ट्रीय दिवस की स्थापना तत्कालीन संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफी अन्नान के कार्यकाल के दौरान हुई थी। इसका मुख्य उद्देश्य युद्ध के अनकहे शिकार—‘पर्यावरण’—की सुरक्षा को वैश्विक शांति एजेंडे में शामिल करना था।
  • संस्थागत ढांचा (Institutional Framework):
  • नोडल एजेंसी: संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम (United Nations Environment Programme – UNEP) इस क्षेत्र में काम करने वाली प्राथमिक संस्था है। UNEP और सशस्त्र संघर्ष (UNEP and Armed Conflict) विंग मुख्य रूप से युद्ध प्रभावित क्षेत्रों में पर्यावरणीय क्षति का वैज्ञानिक मूल्यांकन करती है।
  • महत्वपूर्ण संकल्प (UNEP/EA.2/Res.15): 27 मई 2016 को, संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा ने एक विशेष संकल्प अपनाया। इस संकल्प में स्पष्ट रूप से यह माना गया कि स्वस्थ पारिस्थितिक तंत्र (Healthy Ecosystems) और टिकाऊ प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन संघर्षों के जोखिम को कम करने में बुनियादी भूमिका निभाते हैं।

युद्ध के कारण पर्यावरणीय क्षति प्रभाव (Environmental Impact of War):

सशस्त्र संघर्ष और पर्यावरण (Armed Conflict and Environment) के अंतर्संबंधों के कारण प्रकृति को दीर्घकालिक नुकसान होता है, जिसे इन श्रेणियों में समझा जा सकता है:

  • प्राकृतिक संसाधनों का अवैध दोहन: यूएनईपी (UNEP) के शोध के अनुसार, पिछले 60 वर्षों में कम से कम 40 प्रतिशत आंतरिक संघर्ष बहुमूल्य प्राकृतिक संसाधनों (जैसे लकड़ी, हीरा, सोना, तेल) या दुर्लभ संसाधनों (जैसे उपजाऊ भूमि और पानी) के अवैध दोहन से जुड़े रहे हैं।
  • युद्ध प्रदूषण और जलवायु (War Pollution and Climate): सैन्य अभियानों, मिसाइल हमलों और बमबारी से भारी मात्रा में जहरीली गैसें और कार्बन उत्सर्जन होता है। यह वायुमंडलीय संतुलन को बिगाड़ता है और वैश्विक तापन (Global Warming) को तीव्र करता है।
  • पारिस्थितिक तंत्र का विनाश: सैन्य लाभ प्राप्त करने के लिए अक्सर जल स्रोतों को प्रदूषित कर दिया जाता है, जंगलों को आग लगा दी जाती है (जैसे वियतनाम युद्ध में एजेंट ऑरेंज का उपयोग), मिट्टी को रसायनों से जहरीला बना दिया जाता है और वन्यजीवों का अंधाधुंध संहार होता है। 

अंतर्राष्ट्रीय कानून और विधिक सुरक्षा ढांचा (International Legal Framework):

युद्ध के दौरान पर्यावरण संरक्षण (Environment Protection During War) के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कुछ कानूनी सुरक्षा उपाय मौजूद हैं:

  • जिनेवा कन्वेंशन का अतिरिक्त प्रोटोकॉल-I: इसके अनुच्छेद 35(3) और 55 विशेष रूप से ऐसे युद्धक तरीकों पर रोक लगाते हैं जिनका उद्देश्य प्राकृतिक पर्यावरण को व्यापक, दीर्घकालिक और गंभीर क्षति पहुँचाना हो।
  • एन्मोड कन्वेंशन (ENMOD Convention): यह पर्यावरण संशोधन तकनीकों के सैन्य या किसी अन्य शत्रुतापूर्ण उपयोग को प्रतिबंधित करता है।

पर्यावरणीय शांति स्थापना का महत्व (Significance & Environmental Peacebuilding):

  • संघर्षों की पुनरावृत्ति को रोकना: संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, प्राकृतिक संसाधनों के विवादों से जुड़े संघर्षों के दोबारा भड़कने की संभावना दोगुनी (Twice as likely to relapse) होती है। इसलिए, जब तक पर्यावरण और संसाधनों का न्यायसंगत प्रबंधन नहीं होगा, तब तक स्थायी शांति की स्थापना असंभव है。
  • सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) की प्राप्ति: यह दिवस सीधे तौर पर SDG 15 (भूमि पर जीवन) और SDG 16 (शांति, न्याय और मजबूत संस्थाएं) के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में वैश्विक प्रयासों को गति देता है।
  • मानव सुरक्षा और आजीविका की बहाली: युद्ध समाप्त होने के दशकों बाद भी बारूदी सुरंगें (Landmines) और प्रदूषित जल स्रोत कृषि तथा स्थानीय आजीविका को बाधित करते हैं। संघर्ष के दौरान प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा (Protection of Natural Resources During Conflict) करना मानव आबादी के पुनर्वास के लिए अनिवार्य है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: युद्ध और सशस्त्र संघर्ष में पर्यावरण के शोषण की रोकथाम के लिए अंतर्राष्ट्रीय दिवस कब मनाया जाता है?

उत्तर: यह अंतर्राष्ट्रीय दिवस प्रत्येक वर्ष 6 नवंबर को दुनिया भर में आधिकारिक रूप से मनाया जाता है।

प्रश्न 2: इस अंतर्राष्ट्रीय दिवस की शुरुआत कब हुई थी?

उत्तर: इस दिवस की स्थापना 5 नवंबर 2001 को संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा पारित प्रस्ताव के बाद हुई थी, जिसके तहत पहला आधिकारिक दिवस 6 नवंबर 2001 को मनाया गया। 

प्रश्न 3: संयुक्त राष्ट्र ने इस दिवस की घोषणा क्यों की थी?

उत्तर: संयुक्त राष्ट्र (UN Environment Protection Day) ने युद्ध के दौरान पारिस्थितिक तंत्र, वन्यजीवों और प्राकृतिक संसाधनों को होने वाली अपूरणीय क्षति (War and Environmental Damage) के प्रति वैश्विक ध्यान आकर्षित करने के लिए इसकी घोषणा की थी।

प्रश्न 4: युद्ध और सशस्त्र संघर्ष का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है?

उत्तर: इसके कारण जल स्रोत प्रदूषित होते हैं, वन नष्ट होते हैं, मिट्टी विषाक्त हो जाती है, जैव विविधता को भारी नुकसान पहुंचता है और अनियंत्रित कार्बन उत्सर्जन से जलवायु संकट गहराता है।

प्रश्न 5: पर्यावरण संरक्षण और शांति स्थापना के बीच क्या संबंध है?

उत्तर: पर्यावरण और टिकाऊ संसाधन प्रबंधन के बिना कोई भी शांति स्थायी नहीं हो सकती, क्योंकि नष्ट संसाधन आजीविका संकट पैदा करते हैं जिससे संघर्ष दोबारा भड़कने का खतरा बना रहता है।

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