Semicon India Programme क्या है? भारत में सेमीकंडक्टर और चिप डिज़ाइन पारिस्थितिकी तंत्र
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली में सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme) के दूसरे चरण के तहत ‘सेमीकॉन 2.0 वेब एप्लिकेशन पोर्टल’ (Semicon 2.0 – Web Application Portal) का शुभारंभ किया।

सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम (Semicon India Programme) के बारे में:
- परिचय: Semicon India Programme, भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी विज़न है जिसके तहत देश को सेमीकंडक्टर विनिर्माण (Semiconductor Chip Manufacturing) और चिप डिज़ाइन का एक वैश्विक केंद्र बनाया जा रहा है।
- शुरुआत: सेमीकॉन 1.0 की शुरुआत दिसंबर 2021 में ₹76,000 करोड़ के वित्तीय परिव्यय के साथ हुई थी। इसकी सफलता के बाद सरकार ने ₹1,27,500 करोड़ (1.27 लाख करोड़ रुपये) के बढ़े हुए बजट के साथ Semicon India 2026 सेमीकॉन 2.0 को मंजूरी दी है।
- नोडल एजेंसी: इस कार्यक्रम का संचालन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के तहत गठित भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (India Semiconductor Mission – ISM) द्वारा किया जा रहा है।
- सेमीकॉन 2.0 के स्तंभ (Pillars of Semicon 2.0): नया वेब पोर्टल मुख्य रूप से स्तंभ 2, 3 और 4 के लिए लाइव किया गया है ताकि पारदर्शी और पूर्ण आवेदनों को ही स्वीकार किया जा सके। इस मिशन के 6 मुख्य स्तंभ निम्नलिखित हैं:
- चिप डिज़ाइन (Chip Design in India): भारत में सेमीकंडक्टर स्टार्टअप्स (Semiconductor Startups India) और एमएसएमई (MSMEs) को वित्तीय और बुनियादी ढांचा सहायता प्रदान करना।
- मशीनें और सामग्री (Machines and Materials): सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला (Semiconductor Supply Chain) के लिए आवश्यक रसायनों, गैसों और विनिर्माण उपकरणों के स्थानीय उत्पादन को बढ़ावा देना।
- अतिरिक्त फैब्रिकेशन सुविधाएं (Semiconductor Fabrication Plants): भारत में वाणिज्यिक स्तर के सिलिकॉन और कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्स (Silicon & Compound Semiconductor Fabs) की स्थापना करना।
- एटीएमपी और ओसैट का विस्तार (ATMP/OSAT Industry): असेंबली, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना।
- अनुसंधान और विकास (Semiconductor Research and Development): उन्नत नोड्स (जैसे 3nm और 2nm तकनीक) और भविष्य की तकनीकों पर आरएंडडी (R&D) केंद्रित करना।
- प्रतिभा विकास (Talent Development): विश्वविद्यालयों के माध्यम से हजारों छात्रों को उन्नत ईडीए (EDA) टूल्स और क्लीन रूम संचालन में प्रशिक्षित करना।
- वित्तीय प्रोत्साहन और सहायता संरचना (Financial Incentive and Subsidy Scheme): भारत सरकार भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण (Semiconductor Manufacturing in India) को वैश्विक रूप से प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए समान आधार (Pari-Passu Basis) पर राजकोषीय सहायता प्रदान कर रही है:
- सिलिकॉन फैब्स के लिए: परियोजना की कुल पूंजीगत लागत (Capital Expenditure – Capex) का 40% तक सरकारी अनुदान।
- डिस्प्ले और कंपाउंड फैब्स के लिए: पूंजीगत व्यय का 35% तक वित्तीय समर्थन।
- चिप डिज़ाइन स्टार्टअप्स के लिए: प्रति आवेदन ₹15 करोड़ तक की सीड फंडिंग (Seed Funding) और शुद्ध बिक्री पर 5 वर्षों के लिए 4% से 6% का डिप्लॉयमेंट-लिंक्ड इंसेंटिव (DLI)।
भारत की प्रमुख प्रगति और उपलब्धियां:
भारत सरकार की व्यापक सेमीकंडक्टर नीति (India Semiconductor Policy) के तहत प्रमुख व्यवस्था इस प्रकार हैं:
- नीति से उत्पादन में परिवर्तन (Shift to Production): भारत में 3 सेमीकंडक्टर इकाइयां (जैसे साणंद, गुजरात में माइक्रोन, कायन्स और सीजी सेमी) पहले ही वाणिज्यिक उत्पादन (Commercial Production) शुरू कर चुकी हैं।
- विशाल निवेश आकर्षण: मिशन के तहत अब तक ₹1.64 लाख करोड़ से अधिक के निवेश प्रस्तावों को मंजूरी दी जा चुकी है। इसके अतिरिक्त इलेक्ट्रॉनिक घटक विनिर्माण योजना (ECMS) के तहत कुल निवेश प्रतिबद्धता ₹77,051 करोड़ तक पहुंच गई है।
- मेक इन इंडिया सेमीकंडक्टर (Make in India Semiconductor): टाटा इलेक्ट्रॉनिक्स द्वारा ताइवान की पीएसएमसी (PSMC) के सहयोग से धोलेरा (गुजरात) में भारत का पहला मेगा कमर्शियल फैब स्थापित किया जा रहा है, जिसका उत्पादन लक्ष्य वर्ष 2028 निर्धारित है।
- बौद्धिक संपदा विकास: घरेलू स्तर पर डिजाइन को बढ़ावा देने के लिए C-DAC द्वारा निर्मित स्वदेशी 64-बिट माइक्रोप्रोसेसर ‘ध्रुव64’ (DHRUV64) को लॉन्च किया गया है।
- प्रतिभा पूल (Talent Pool): चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) कार्यक्रम के तहत 300 से अधिक विश्वविद्यालयों के लगभग 70,000 छात्रों को प्रशिक्षित किया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम क्या है?
उत्तर: यह भारत सरकार का एक महत्वाकांक्षी विज़न है जिसके तहत देश को सेमीकंडक्टर विनिर्माण (Semiconductor Chip Manufacturing) और चिप डिज़ाइन का एक वैश्विक केंद्र बनाया जा रहा है।
प्रश्न 2: भारत में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने के लिए कौन-सी पहल शुरू की गई है?
उत्तर: इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा भारतीय सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) और वित्तीय प्रोत्साहन योजनाएं शुरू की गई हैं।
प्रश्न 3: सेमीकंडक्टर और चिप डिजाइन में क्या अंतर है?
उत्तर: सेमीकंडक्टर भौतिक चिप निर्माण (Fabrication) की प्रक्रिया है, जबकि चिप डिज़ाइन (Chip Design) उसके तार्किक सर्किट लेआउट और बौद्धिक संपदा (IP Cores) को सॉफ्टवेयर टूल्स की मदद से तैयार करना है।
प्रश्न 4: भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए कितनी प्रोत्साहन राशि दी जाती है?
उत्तर: सरकार द्वारा सेमीकंडक्टर फैब्स की स्थापना के लिए परियोजना की कुल पूंजीगत लागत (Capex) का 35% से 40% तक का सीधा राजकोषीय प्रोत्साहन (Fiscal Support) दिया जाता है।
प्रश्न 5: सेमीकॉन इंडिया कार्यक्रम का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य इलेक्ट्रॉनिक विनिर्माण में मूल्य संवर्धन करना, वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला के संकट को कम करना और भारत की रणनीतिक एवं तकनीकी संप्रभुता (Technological Sovereignty) सुनिश्चित करना है।