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Malabar Tree Toad: कर्नाटक ने मालाबार ट्री टॉड को राज्य उभयचर घोषित किया

Malabar Tree Toad: कर्नाटक ने मालाबार ट्री टॉड को राज्य उभयचर घोषित किया

संदर्भ:

हाल ही में कर्नाटक वन्यजीव संरक्षण (Karnataka Wildlife Conservation) के तहत वन, पारिस्थितिकी और पर्यावरण विभाग ने 27 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक आदेश पर हस्ताक्षर कर मालाबार ट्री टॉड (Malabar Tree Toad) को कर्नाटक राज्य का उभयचर घोषित किया। कर्नाटक देश का ऐसा पहला राज्य बन गया है जिसने आधिकारिक तौर पर किसी जीव को राज्य उभयचर का दर्जा दिया।

मालाबार ट्री टॉड के बारे में:

  • वैज्ञानिक नाम (Scientific Name): Malabar Tree Toad का वैज्ञानिक नाम पेडोस्टिब्स ट्यूबरकुलोसस (Pedostibes tuberculosus) है।
  • एकलप्रारूपी वंश (Monotypic Genus): यह जीनस ‘पेडोस्टिब्स’ (Pedostibes) के अंतर्गत बची हुई एकमात्र जीवित प्रजाति है।
  • स्थानीय नाम (Local Name): कर्नाटक के स्थानीय क्षेत्रों में इसे ‘मालेनादिना मारा गंतिकप्पे’ (Malenadina Mara Gantikappe) या ‘पेटु’ (Petu) के नाम से जाना जाता है, जिसका अर्थ मलयनाड वन क्षेत्र का ‘वृक्ष मेंढक’ है। 
  • मालाबार का आवास और भौगोलिक वितरण (Malabar Tree Toad Habitat & Distribution):
  • स्थानिक प्रजाति (Western Ghats Endemic Species): यह प्रजाति पूरी तरह से भारत के पश्चिमी घाट की जैव विविधता (Western Ghats Biodiversity) के लिए स्थानिक है। यह मुख्य रूप से कर्नाटक, केरल, तमिलनाडु और महाराष्ट्र के नम सदाबहार वनों (Wet Evergreen Forests) में पाई जाती है।
  • ऊंचाई (Altitude Range): यह समुद्र तल से 250 मीटर से लेकर 1,000 मीटर से अधिक की ऊंचाई वाले घने जंगलों में निवास करता है।
  • ऐतिहासिक संदर्भ: इसकी खोज पहली बार वर्ष 1876 में गनथर द्वारा की गई थी, जिसके बाद यह लगभग 105 वर्षों तक ओझल रहा और अंततः 1980 में केरल के साइलेंट वैली नेशनल पार्क (Silent Valley National Park) में इसे पुनर्जीवित देखा गया। 
  • शारीरिक विशेषताएं और तकनीकी खासियतें (Key Characteristics & Adaptations):
  • वृक्षवासी जीवन शैली (Arboreal Lifestyle): भारत में पाए जाने वाले अधिकांश टॉड भू-निवासी (Ground-dwelling) होते हैं, परंतु मालाबार ट्री टॉड भारत की एकमात्र ऐसी टॉड प्रजाति है जो पेड़ों की ऊपरी छतरियों (High Canopies) और खोखलों में रहती है।
  • शारीरिक अनुकूलन (Adaptations for Tree Climbing): यह आकार में बेहद छोटा (लगभग 3.5 से 3.8 सेमी) होता है। इसके उंगलियों और पैर के पंजों पर चौड़े, चिपचिपे पैड (Sticky Finger and Toe Pads) होते हैं जो इसे ऊर्ध्वाधर पेड़ों और टहनियों पर आसानी से चढ़ने में मदद करते हैं।
  • त्वचा और रंग: इसकी त्वचा खुरदरी और ग्रंथियों से ढकी (Warty Skin) होती है। शरीर का रंग भूरा-धूसर होता है, जिसके किनारों पर गहरा रंग और आंख से लेकर कंधे तक एक विशिष्ट मलाईदार-सफेद पट्टी (Creamy-white Stripe) फैली होती है।
  • विशिष्ट प्रजनन व्यवहार (Distinctive Breeding Behaviour):
  • मानसून-पूर्व चक्र (Pre-Monsoon Breeding): अधिकांश भारतीय मेंढक भारी मानसून में प्रजनन करते हैं, लेकिन मालाबार ट्री टॉड मार्च से जून के बीच मानसून-पूर्व की बौछारों के दौरान प्रजनन करता है।
  • प्रजनन ध्वनि (Breeding Call): नर टॉड मादाओं को आकर्षित करने के लिए लगभग 3,780 हर्ट्ज (Hz) की आवृत्ति पर 3 से 7 सेकंड लंबी एक तेज, बार-बार दोहराई जाने वाली तीखी ध्वनि उत्पन्न करते हैं।
  • विशिष्ट टैडपोल (Specialised Tadpoles): इनके अंडों से निकलने वाले टैडपोल के मुंह में विशेष शोषक (Sucker-like Mouthparts) होते हैं, जो उन्हें तेज बहने वाले झरनों की फिसलन भरी चट्टानों से चिपके रहने और शैवाल खाने में मदद करते हैं ताकि वे पानी में बह न जाएं। 
  • संरक्षण स्थिति और विधिक संरक्षण (Conservation Status & Protection):
  • आईयूसीएन रेड लिस्ट (IUCN Red List): यह प्रजाति वैश्विक स्तर पर ‘लुप्तप्राय’ (Endangered – EN) वर्ग में वर्गीकृत है।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 (Wildlife Protection Act 1972): संशोधित अधिनियम के तहत इसे अनुसूची II (Schedule II) में शामिल कर सख्त विधिक सुरक्षा प्रदान की गई है।

मालाबार ट्री टॉड का पारिस्थितिकी तंत्र में महत्व:

  • सदाबहार वनों की सेहत का संकेतक (Evergreen Forest Indicator Species): यह उभयचर एक बेहतरीन बायो-इंडिकेटर (Bio-indicator) है। यह केवल स्वच्छ जलधाराओं और अक्षुण्ण वन आवरण वाले स्वस्थ पारिस्थितिकी तंत्र में ही जीवित रह सकता है। इसकी संख्या में गिरावट सीधे तौर पर वनों के क्षरण और पर्यावरण प्रदूषण (Environmental Pollution) को दर्शाती है।
  • नागरिक विज्ञान को प्रोत्साहन (Citizen Science Participation): इस जीव के संरक्षण में वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम लोगों और ‘फ्रॉगवॉच’ (Frogwatch) जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का बड़ा योगदान रहा है। यह मॉडल नीति निर्माण में सामुदायिक भागीदारी (Community Engagement) को मजबूत करता है।
  • जलवायु लचीलापन अध्ययन: इसके मानसून-पूर्व प्रजनन व्यवहार का अध्ययन करने से शोधकर्ताओं को पश्चिमी घाट में बदलते वैश्विक तापमान और मानसूनी अनिश्चितताओं के जैविक प्रभावों को समझने में मदद मिल रही है।
  • कर्नाटक के राज्य प्रतीक चिह्नों में विविधता (Karnataka State Symbols): कर्नाटक ने पहले ही एशियाई हाथी (राजकीय पशु), इंडियन रोलर (राजकीय पक्षी), चंदन (राजकीय वृक्ष), और सदर्न बर्डविंग (राजकीय तितली) घोषित कर रखा है।
    • हाल ही में एशियाई मधुमक्खी (Apis cerana) को राज्य कीट और मालाबार ट्री टॉड को शामिल करने से राज्य की व्यापक संरक्षण नीति प्रदर्शित होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: मालाबार ट्री टॉड क्या है?

उत्तर: यह पश्चिमी घाट में पाया जाने वाला एक छोटा, लुप्तप्राय उभयचर (Endangered Amphibian Species India) है, जो पेड़ों के ऊपरी कैनोपी में रहने और चढ़ने की अपनी अनूठी क्षमता के लिए जाना जाता है। 

प्रश्न 2: कर्नाटक ने मालाबार ट्री टॉड को राज्य उभयचर कब घोषित किया?

उत्तर: कर्नाटक के वन और पर्यावरण विभाग ने आधिकारिक तौर पर 27 अक्टूबर 2026 को इस ऐतिहासिक घोषणा पत्र (Karnataka State Amphibian 2026) पर हस्ताक्षर किए। 

प्रश्न 3: मालाबार ट्री टॉड मुख्य रूप से कहां पाया जाता है?

उत्तर: यह भारत के पश्चिमी घाट (Western Ghats) के नम सदाबहार और अर्ध-सदाबहार वर्षावनों में 250 से 1,000 मीटर की ऊंचाई पर पाया जाता है। 

प्रश्न 4: मालाबार ट्री टॉड को पारिस्थितिकी के लिए महत्वपूर्ण क्यों माना जाता है?

उत्तर: यह एक संवेदनशील पारिस्थितिकी संकेतक प्रजाति (Evergreen Forest Indicator Species) है, जिसकी उपस्थिति जंगलों की शुद्धता, स्वच्छ जल और पर्यावरण के अच्छे स्वास्थ्य को प्रमाणित करती है।

प्रश्न 5: मालाबार ट्री टॉड की संरक्षण स्थिति क्या है?

उत्तर: यह आईयूसीएन (IUCN) की रेड लिस्ट में ‘लुप्तप्राय’ (Endangered) श्रेणी में है और भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की अनुसूची II के तहत संरक्षित है।

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