Barda Wildlife Sanctuary: 144 साल बाद दिखे अभयारण्य में एशियाई शेर
संदर्भ:
हाल ही में लगभग 144 वर्षों की लंबी अनुपस्थिति के बाद एशियाई शेरों (Asiatic Lion) की गुजरात के बरदा वन्यजीव अभ्यारण्य (Barda Wildlife Sanctuary) में अपनी स्थायी प्राकृतिक वापसी दर्ज की गई। इस अभ्यारण्य में अब शेरों की कुल आबादी बढ़कर 17 हो गई है।
बरदा वन्यजीव अभ्यारण्य के बारे में:
- अवस्थिति: बरदा वन्यजीव अभ्यारण्य (Barda Wildlife Sanctuary Gujarat) गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में पोरबंदर और देवभूमि द्वारका (पूर्व में जामनगर जिले का हिस्सा) जिलों में विस्तृत है।
- यह पोरबंदर तट से लगभग 15 किलोमीटर दूर बरदा पहाड़ियों (Barda Hills) में स्थित है।
- यह एशियाई शेरों के मुख्य प्राकृतिक आवास गिर राष्ट्रीय उद्यान (Gir National Park) से लगभग 100 किलोमीटर पश्चिम में स्थित है।
- क्षेत्रफल: यह अभ्यारण्य कुल 192.31 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला हुआ है।
- स्थापना: इसे आधिकारिक तौर पर फरवरी 1979 में एक वन्यजीव अभ्यारण्य (Gujarat Wildlife Sanctuary) घोषित किया गया था।
- अभ्यारण्य घोषित होने से पहले, ऐतिहासिक रूप से यह क्षेत्र राणा बरदा और जाम बरदा के तहत पोरबंदर और जामनगर के पूर्व रियासतों (Princely States) का एक निजी शिकार रिजर्व (Private Hunting Reserve) था।
- वन का प्रकार: यहाँ मुख्य रूप से दक्षिणी उष्णकटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन (Southern Tropical Dry Deciduous Forests) और उत्तरी उष्णकटिबंधीय कांटेदार झाड़ियाँ (Tropical Thorn Forest) पाई जाती हैं।
- फ्लोरा (Flora): बरदा में गुजरात की सबसे उच्च औषधीय और पादप विविधता पाई जाती है, जिसमें लगभग 650 से 700 पौधों की प्रजातियां शामिल हैं (जैसे- बाबुल, धव, रायन, बेर, जामुन, इमली और बांस)।
- जल निकाय: इस क्षेत्र से मुख्य रूप से दो नदियां—बिलेश्वरी नदी (Bileshvary River) और जोगरी नदी (Joghri River) बहती हैं। इसके साथ ही खंभाला और फोदरा नामक दो प्रमुख बांध भी जल की आपूर्ति सुनिश्चित करते हैं।
- मानव आबादी: इस वन परिदृश्य में पारंपरिक रूप से चरवाहा समुदाय जैसे मालधारी, भरवाड़, रबारी और गढ़वी जनजातियाँ/जातियाँ निवास करती हैं।
- 144 साल का संदर्भ: इस क्षेत्र में ऐतिहासिक रूप से शेर निवास करते थे, लेकिन शिकार और आवास विनाश के कारण 19वीं शताब्दी के अंत (लगभग 144 वर्ष पहले) तक वे यहाँ से पूरी तरह विलुप्त हो गए थे।
- प्राकृतिक प्रवासन (Natural Dispersal): बरदा में शेरों की यह वापसी पूरी तरह मानव-निर्मित नहीं है। जनवरी 2023 में एक वयस्क नर शेर गिर से प्राकृतिक रूप से प्रवासन करते हुए पहली बार बरदा में दाखिल हुआ। इसके बाद, गुजरात वन विभाग ने आबादी संतुलन के लिए पांच मादा शेरों को यहाँ छोड़ा।
- वैज्ञानिक अनुसंधान: 9 सितंबर 2026 को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय जर्नल ‘PLOS One’ में एक शोध पत्र प्रकाशित हुआ, जिसका शीर्षक था—“बियॉन्ड गिर: बरदा वन्यजीव अभ्यारण्य एशियाई शेरों के लिए एक संभावित गढ़ के रूप में”।
- जीपीएस ट्रैकिंग (GPS Tracking): शोधकर्ताओं ने एक नर और पांच मादा शेरों को रेडियो कॉलर (Radio Collars) पहनाकर जनवरी 2023 से जुलाई 2025 के बीच 1,69,000 से अधिक जीपीएस लोकेशन दर्ज किए।
- सैटेलाइट पापुलेशन 8: केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2020 में शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट लायन’ (Project Lion) के तहत बरदा वन्यजीव अभ्यारण्य को ‘सैटेलाइट पापुलेशन 8’ (Satellite Population 8) का विशिष्ट प्रशासनिक दर्जा दिया गया है।
- शिकार आधार (Prey Base Management): शेरों के भोजन की जरूरतों को पूरा करने के लिए वर्ष 2025-26 के दौरान गिर वन्यजीव अभ्यारण्य से 441 चीतल (Spotted Deer) को बरदा में स्थानांतरित किया गया। इसके अलावा, वर्ष 2007 से ही यहाँ कैप्टिव-ब्रीडिंग के माध्यम से सैकड़ों चीतल और सांभर छोड़े जा रहे हैं।
संरक्षण का राष्ट्रीय महत्व:
- महामारी और विलुप्ति के जोखिम से सुरक्षा: वर्तमान में दुनिया के सभी जंगली एशियाई शेर केवल एक ही भौगोलिक क्षेत्र (गिर परिदृश्य) में केंद्रित हैं।
- यदि गिर में कोई संक्रामक महामारी (जैसे- कैनाइन डिस्टेंपर वायरस – CDV) या भीषण चक्रवात जैसी प्राकृतिक आपदा आती है, तो पूरी प्रजाति के विलुप्त होने का खतरा था।
- बरदा के रूप में एक वैकल्पिक सुरक्षित ठिकाना (Alternative Habitat) मिलने से यह अनुवांशिक जोखिम न्यूनतम हो गया है।
- अति-आबादी (Overcrowding) का समाधान: वर्ष 2025 की नवीनतम शेर गणना के अनुसार, गुजरात में एशियाई शेरों की संख्या बढ़कर 891 हो गई है (जो 2020 के 674 की तुलना में लगभग 32% की वृद्धि है)।
- गिर का मुख्य वन क्षेत्र अब इन शेरों के लिए छोटा पड़ रहा था। बरदा अभ्यारण्य इस अतिरिक्त आबादी को समाहित करने के लिए एक आदर्श बफर जोन प्रदान करता है।
- मानव-वन्यजीव संघर्ष में कमी: शेरों के गिर से बाहर निकलने के कारण वे अक्सर राजस्व क्षेत्रों और कृषि भूमियों में चले जाते थे। बरदा जैसे संरक्षित क्षेत्र में शेरों के बसने से मानव-शेर संघर्ष (Human-Lion Conflict) की घटनाओं पर नियंत्रण पाया जा सकेगा।
- स्थानीय सतत पारिस्थितिक पर्यटन (Ecotourism): बरदा में वर्ष 2024 से इको-टूरिज्म गतिविधियों की शुरुआत की गई है, जिसके तहत वर्ष 2025-26 में 3,359 से अधिक आगंतुक यहाँ पहुँचे। इससे मालधारी और अन्य स्थानीय समुदायों के लिए आजीविका (Local Livelihood) के नए आर्थिक अवसर उत्पन्न हो रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: बरदा वन्यजीव अभ्यारण्य कहां स्थित है?
उत्तर: यह अभ्यारण्य भारत के गुजरात राज्य के सौराष्ट्र क्षेत्र में पोरबंदर और देवभूमि द्वारका जिलों में स्थित है।
प्रश्न 2: बरदा अभ्यारण्य में एशियाई शेर दिखने का क्या महत्व है?
उत्तर: इसका अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह गिर के बाहर एशियाई शेरों का पहला आधिकारिक और प्राकृतिक दूसरा गंतव्य (Alternative Habitat) बन गया है, जो प्रजाति को विलुप्ति से बचाएगा।
प्रश्न 3: बरदा वन्यजीव अभ्यारण्य की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: इस अभ्यारण्य की स्थापना आधिकारिक तौर पर फरवरी 1979 में की गई थी, जिसके बाद सरकार ने ‘गिर-बरदा प्रोजेक्ट’ की शुरुआत की थी।
प्रश्न 4: एशियाई शेर मुख्य रूप से भारत के किस क्षेत्र में पाए जाते हैं?
उत्तर: जंगली एशियाई शेर (Panthera leo persica) प्राकृतिक रूप से संपूर्ण विश्व में केवल भारत के गुजरात (सौराष्ट्र क्षेत्र) में ही पाए जाते हैं।
प्रश्न 5: बरदा में शेरों की मौजूदगी को लेकर 144 साल का संदर्भ क्या है?
उत्तर: इस क्षेत्र से 19वीं शताब्दी के अंत (लगभग 144 वर्ष पहले) में अत्यधिक शिकार के कारण शेर पूरी तरह विलुप्त हो गए थे, जो अब वापस लौटे हैं।
प्रश्न 6: एशियाई शेरों के संरक्षण के लिए कौन-कौन से प्रयास किए जा रहे हैं?
उत्तर: केंद्र सरकार द्वारा प्रोजेक्ट लायन’ (2020) का संचालन, रेडियो कॉलरिंग के माध्यम से जीपीएस ट्रैकिंग, और चीतलों का स्थानांतरण करके शिकार आधार (Prey Base) को मजबूत किया जा रहा है।
