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Buckingham Canal: परिचय, स्थिति एवं विशेषताएं

Buckingham Canal: परिचय, स्थिति एवं विशेषताएं

Buckingham Canal

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (National Green Tribunal – NGT) की दक्षिणी पीठ ने बकींघम नहर (Buckingham Canal) में अवैध निर्माण, ठोस कचरा डंपिंग और अनधिकृत सीवेज डिस्चार्ज को लेकर संबंधित राज्यों के नगर निकायों को तत्काल कड़ी फटकार लगाई।

बकींघम नहर के बारे में:

  • परिचय: बकिंघम नहर (Buckingham Canal) दक्षिणपूर्वी भारत में कोरोमंडल तट के समानांतर बनी एक ऐतिहासिक मानव निर्मित नौकायन और जलमार्ग नहर है।
  • भौगोलिक स्थिति: यह मानव निर्मित नहर दक्षिण-पूर्वी भारत में कोरोमंडल तट (Coromandel Coast) के बिल्कुल समानांतर उत्तर-दक्षिण दिशा में बहती है।
    • यह दक्षिण भारत के पूर्वी तट पर आंध्र प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों से होकर गुजरती है तथा चेन्नई बंदरगाह को प्राकृतिक बैकवाटर से जोड़ती है।
  • कुल लंबाई (Buckingham Canal Length): विभिन्न ऐतिहासिक और विस्तारित चरणों को मिलाकर इसकी कुल नौवहन लंबाई लगभग 796 किलोमीटर (कुछ संदर्भों में मुख्य नहर खंड 420-450 किमी) है। 
  • राज्यवार विभाजन: यह मुख्य रूप से दो दक्षिण भारतीय राज्यों से गुजरती है:
    • आंध्र प्रदेश (Andhra Pradesh): काकीनाडा/विजयवाड़ा से शुरू होकर कृष्णा और गोदावरी डेल्टा प्रणालियों को जोड़ते हुए लगभग 258 किलोमीटर।
    • तमिलनाडु (Tamil Nadu): चेन्नई शहर (Buckingham Canal Chennai) से गुजरते हुए विल्लुपुरम और चिदंबरम (पिचावरम) तक लगभग 163 किलोमीटर।
  • प्रकृति: यह मुख्य रूप से एक खारे पानी की नौवहन नहर (Saltwater Navigation Canal) है, जो ज्वारीय प्रवाह (Tidal Inflow) और समुद्र के बैकवाटर से जल प्राप्त करती है। चेन्नई महानगरीय क्षेत्र के भीतर यह तीन प्रमुख नदियों—कोसास्थलायार, कूअम और अड्यार को आपस में जोड़ती है। 
  • पृष्ठभूमि:
    • मूल निर्माण (1806): इस नहर के पहले खंड का निर्माण वर्ष 1806 में मद्रास (अब चेन्नई) से एन्नोर तक 18 किलोमीटर की दूरी के लिए किया गया था। इसके मुख्य फाइनेंसर बेसिल कोक्रेन थे, जिसके कारण प्रारंभिक दौर में इसे ‘कोक्रेन नहर’ (Cochrane Canal) कहा जाता था। 
    • सरकारी नियंत्रण और विस्तार (1837): वर्ष 1837 में मद्रास प्रेसीडेंसी की ब्रिटिश सरकार ने इसका अधिग्रहण कर लिया और इसका नाम बदलकर ‘ईस्ट कोस्ट कैनाल’ (East Coast Canal) कर दिया। इसके बाद इसका उत्तर और दक्षिण दोनों दिशाओं में विस्तार किया गया।
    • अकाल और ‘बकींघम’ नामकरण (1876-1878): वर्ष 1876-1878 के दौरान दक्षिण भारत में विनाशकारी ‘महान अकाल’ (Great Famine) पड़ा। तत्कालीन मद्रास के गवर्नर, लॉर्ड बकींघम (Duke of Buckingham and Chandos) ने भुखमरी से पीड़ित लाखों लोगों को रोजगार और आजीविका देने के लिए ‘काम के बदले अनाज’ कार्यक्रम के तहत इस नहर के लिंकिंग कार्य का बड़े पैमाने पर विस्तार कराया। वर्ष 1878 में उनके सम्मान में इसका नाम बदलकर ‘बकींघम नहर’ रख दिया गया।
  • विशेषताएं:
    • सस्ता अंतर्देशीय जलमार्ग (Inland Waterway): रेलवे और आधुनिक सड़कों के विकास से पहले, आंध्र प्रदेश से मद्रास शहर तक नमक, सूखी मछली, कोयला, जलाऊ लकड़ी और खाद्यान्न (धान) जैसी भारी वस्तुओं को सस्ते में लाने-ले जाने का यह एकमात्र सुलभ साधन थी। 
    • लॉक्स प्रणाली (Locks System): ज्वारीय लहरों के उतार-चढ़ाव और जल स्तर को नियंत्रित करने के लिए इस नहर में 28 जल-कपाट (Locks) बनाए गए थे, जो उस समय की उत्कृष्ट इंजीनियरिंग का प्रमाण थे।
    • तटीय सुरक्षा और बाढ़ प्रबंधन (Flood Management): परिवहन के अलावा, यह नहर चेन्नई और तटीय आंध्र प्रदेश के लिए एक प्राकृतिक जल निकासी प्रणाली (Natural Drainage System) के रूप में कार्य करती है। मानसून के दौरान यह चक्रवात और भारी बारिश के अतिरिक्त पानी को समुद्र तक ले जाकर तटीय बस्तियों को बाढ़ से बचाती है। 
  • राष्ट्रीय जलमार्ग-4 (National Waterway 4): वर्ष 2016 में, भारत सरकार ने बकींघम नहर के उत्तरी (316 किमी) और दक्षिणी (110 किमी) खंडों को मिलाकर इसे राष्ट्रीय जलमार्ग-4 (NW-4) का आधिकारिक हिस्सा घोषित किया था। इसका उद्देश्य गोदावरी और कृष्णा नदियों के साथ एकीकृत करके एक कुशल अंतरदेशीय जलमार्ग नेटवर्क (Waterway) विकसित करना है।
  • हालिया बहाली योजना (Restoration 2026): तमिलनाडु सरकार ने हाल ही में चेन्नई के भीतर नेपियर ब्रिज से अड्यार नदी तक इसके 7.2 किलोमीटर के केंद्रीय हिस्से को पुनर्जीवित करने के लिए ₹876.35 करोड़ की एक महत्वाकांक्षी पुनरुद्धार योजना तैयार की है, जिसमें पैसेंजर बोट और फ्लोटिंग रेस्तरां चलाने का प्रस्ताव है।
  • चुनौतियाँ: अनुपयोग के कारण इसमें अनधिकृत ठोस कचरा डंपिंग, प्लास्टिक प्रदूषण और औद्योगिक तथा घरेलू अनुपचारित सीवेज (Untreated Sewage) सीधे बहाया जा रहा है, जिससे यह एक गंदे नाले में तब्दील हो गई है। साथ ही, इसके दोनों किनारों पर भारी शहरी अतिक्रमण (Encroachments) हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Buckingham Canal क्या है?

उत्तर: यह ब्रिटिश काल में निर्मित भारत के पूर्वी कोरोमंडल तट के समानांतर चलने वाली एक ऐतिहासिक मानव निर्मित खारे पानी की नौवहन नहर (Navigation Canal) है।

प्रश्न 2: Buckingham Canal कहां स्थित है?

उत्तर: यह दक्षिण-पूर्वी भारत में आंध्र प्रदेश के काकीनाडा/विजयवाड़ा से लेकर तमिलनाडु के विल्लुपुरम/चिदंबरम जिलों के तटीय बेल्ट में स्थित है।

प्रश्न 3: Buckingham Canal का निर्माण कब हुआ था?

उत्तर: इसका प्रारंभिक निर्माण 1806 में ब्रिटिश व्यापारी बेसिल कोक्रेन द्वारा निजी निवेश से शुरू किया गया था। [4, 5]

प्रश्न 4: Buckingham Canal की लंबाई कितनी है?

उत्तर: तटीय बैकवाटर नेटवर्क को जोड़ने वाले इसके संपूर्ण विस्तारित जलमार्ग की कुल लंबाई लगभग 796 किलोमीटर है।

प्रश्न 5: Buckingham Canal किन राज्यों से होकर गुजरती है?

उत्तर: यह मुख्य रूप से दो भारतीय राज्यों—आंध्र प्रदेश (उत्तरी खंड) और तमिलनाडु (दक्षिणी खंड) से होकर गुजरती है।

प्रश्न 6: Buckingham Canal का नाम Buckingham क्यों रखा गया?

उत्तर: 1876-78 के महान अकाल के दौरान मद्रास के तत्कालीन गवर्नर लॉर्ड बकींघम द्वारा अकाल राहत कार्य के रूप में इसका व्यापक विस्तार कराने के कारण यह नाम पड़ा।

प्रश्न 7: Buckingham Canal का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

उत्तर: 19वीं और 20वीं सदी की शुरुआत में यह दक्षिण भारत का सबसे महत्वपूर्ण मालवाहक अंतर्देशीय जलमार्ग (Inland Waterway) और चेन्नई का प्राकृतिक सुरक्षा कवच थी। 

प्रश्न 8: Buckingham Canal का उपयोग किन कार्यों के लिए किया जाता था?

उत्तर: इसका मुख्य उपयोग आंध्र प्रदेश से तत्कालीन मद्रास (चेन्नई) शहर तक नमक, जलाऊ लकड़ी, कोयला, और खाद्यान्न के किफायती परिवहन (Irrigation/Transportation) के लिए होता था। गैस रिसाव जैसी जटिल औद्योगिक आपदाओं में रेस्क्यू ऑपरेशन करता है।

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