पौधे की नई बारहमासी शाकीय प्रजाति की खोज, ‘Ceropegia tamilnaduensis’ रखा गया है नाम
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संदर्भ:
हाल ही में भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (Botanical Survey of India – BSI) के वनस्पतिशास्त्रियों ने तमिलनाडु के नेल्लाई वन्यजीव अभयारण्य (Nellai Wildlife Sanctuary) में पौधे की एक नई बारहमासी शाकीय प्रजाति (New Perennial Herbaceous Plant Species) की खोज की घोषणा की। इस नए पादप का नाम राज्य के सम्मान में ‘सेरोपेगिया तमिलनाडुएनसिस’ (Ceropegia tamilnaduensis) रखा गया।
सेरोपेगिया तमिलनाडुएनसिस के बारे में:
- वर्गीकरण: यह पौधा सेरोपेगिया जीनस (Ceropegia Genus) से संबंधित है, जो मुख्य रूप से एपोसिनेसी (Apocynaceae) कुल (Subfamily: Asclepiadoideae) के अंतर्गत आता है।
- सेरोपेगिया जीनस की स्थापना मूल रूप से 1737 में कार्ल लिनिअस द्वारा की गई थी।
- स्थान: यह दुर्लभ प्रजाति तमिलनाडु के नेल्लाई वन्यजीव अभयारण्य में पश्चिमी घाट (Western Ghats) की पहाड़ी ढलानों पर खोजी गई है।
- विशिष्ट पर्यावास: यह पौधा लगभग 380 मीटर की ऊंचाई पर एक धारा के निकटवर्ती (Stream-adjacent) पहाड़ी ढलानों पर पाया गया, जो चारों ओर से सदाबहार जंगलों (Evergreen Forest) और घास के मैदानों से घिरा है।
- अकेले फूल (Solitary Flowers): इसमें तने की पत्तियों के अक्ष (Leaf Axils) से सीधे निकलने वाले अकेले फूल होते हैं, जिनकी डंठल नीचे की ओर झुकी (Drooping Stems) होती है।
- गहरे भूरे-बैंगनी रंग का दलपुंज (Corolla): इसके फूलों का दलपुंज गहरा भूरा-बैंगनी (Dark Brownish-purple Corolla) होता है, जिस पर सफेद रंग की हल्की आभा (Tinged with white) होती है।
- केंद्रीय कोरोना (Central Corona): पौधे की केंद्रीय संरचना या कोरोना पूरी तरह से केशरहित या चिकनी (Glabrous/Hairless) होती है।
- असामान्य रूप से बड़े बीज: इस नई पुष्प पादप प्रजाति (New Flowering Plant Species) में असामान्य रूप से बड़े बीज बनते हैं, जिनकी लंबाई 14 मिलीमीटर (14 mm) तक मापी गई है।
- परागण युक्ति (Pitfall Trap Mechanism): सेरोपेगिया जीनस (Ceropegia Genus) के पौधों के फूल अपनी विशिष्ट गंध से कीटों (जैसे मक्खियों) को आकर्षित करते हैं और उन्हें अस्थायी रूप से फूल के भीतर तब तक कैद रखते हैं जब तक परागण की प्रक्रिया (Pollination) पूरी नहीं हो जाती।
- संरक्षण स्थिति: वैज्ञानिकों ने नियमित वानस्पतिक अन्वेषण (Routine Floristic Exploration) के दौरान अभयारण्य के भीतर सुरक्षित रूप से फल-फूल रहे 50 से अधिक पौधों की पहचान की।
- इसकी वास्तविक भौगोलिक सीमा और जनसंख्या स्वास्थ्य के सटीक आंकड़ों के अभाव में, शोधकर्ताओं ने अंतर्राष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ (IUCN) के दिशानिर्देशों के तहत इसे अस्थायी रूप से ‘डेटा डेफिशिएंट’ (Data Deficient – DD) यानी ‘आंकड़ों की कमी’ वाली श्रेणी में वर्गीकृत किया।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: Ceropegia tamilnaduensis क्या है?
उत्तर: यह भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण (BSI) के वनस्पतिशास्त्रियों द्वारा तमिलनाडु के पश्चिमी घाट में खोजी गई पौधे की एक नई दुर्लभ बारहमासी शाकीय प्रजाति (Rare Plant Species India) है।
प्रश्न 2: Ceropegia tamilnaduensis की खोज कहां हुई?
उत्तर: इस नए पौधे की खोज तमिलनाडु के नेल्लाई वन्यजीव अभयारण्य में लगभग 380 मीटर की ऊंचाई पर एक सदाबहार वन की जलधारा के पास की गई है।
प्रश्न 3: नई पौध प्रजाति को Ceropegia tamilnaduensis नाम क्यों दिया गया?
उत्तर: वानस्पतिक परंपरा के अनुसार, इस पौधे को उस दक्षिण भारतीय राज्य तमिलनाडु के प्रति सम्मान व्यक्त करने के लिए यह वैज्ञानिक नाम दिया गया है जहाँ से इसके मूल नमूने एकत्र किए गए थे।
प्रश्न 4: बारहमासी शाकीय पौधा क्या होता है?
उत्तर: बारहमासी शाकीय पौधा (Perennial Herbaceous Plant) वह पौधा होता है जो दो या दो से अधिक वर्षों तक जीवित रहता है और जिसका तना लकड़ी (Non-woody) का नहीं होता बल्कि कोमल होता है।
प्रश्न 5: Ceropegia पौधों की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
उत्तर: ये पौधे अपने पिंजरे या लालटेन नुमा फूलों, कीटों को फंसाने वाले अनूठे परागण तंत्र (Pitfall Trap Mechanism) और औषधीय महत्व के लिए जाने जाते हैं।
