दुधवा टाइगर रिजर्व: स्थिति, क्षेत्रफल, मान्यता एवं विशेषताएं
संदर्भ:
हाल ही में उत्तर प्रदेश के प्रसिद्ध दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve) में बहने वाली सुहेली नदी के 100 साल के जलविज्ञानी और पारिस्थितिकीय बदलावों का अध्ययन करने के लिए एक व्यापक सर्वेक्षण शुरू किया गया।
- केंद्रीय राष्ट्रीय जलविज्ञान संस्थान (NIH), रुड़की के वैज्ञानिकों द्वारा किया जाने वाला यह शोध तराई पारिस्थितिकी तंत्र (Terai Ecosystem India) के संरक्षण के लिए एक गेम-चेंजर साबित होगा।
दुधवा टाइगर रिजर्व के बारे में:
- स्थिति (Dudhwa Tiger Reserve Location): यह उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और बहराइच जिलों में भारत-नेपाल अंतरराष्ट्रीय सीमा पर स्थित है।
- इसकी उत्तर-पूर्वी सीमा नेपाल के साथ लगती है, जिसे मुख्य रूप से मोहाना नदी अलग करती है।
- कुल क्षेत्रफल (Dudhwa Tiger Reserve Area): दुधवा टाइगर रिजर्व (DTR) का कुल क्षेत्रफल 2,201.77 वर्ग किलोमीटर है। इसमें 1,093.79 वर्ग किमी का कोर क्षेत्र (जिसमें दुधवा नेशनल पार्क, किशनपुर और कतरनियाघाट अभयारण्य शामिल हैं) तथा 1,107.98 वर्ग किमी का बफर क्षेत्र शामिल है।
- प्रशासनिक मान्यता और स्थापना (Dudhwa Tiger Reserve Establishment):
- 1965: सबसे पहले इसे सोनारीपुर और दुधवा के वनों को मिलाकर एक ‘वन्यजीव अभयारण्य’ घोषित किया गया था।
- 1977: भारत सरकार द्वारा इसे दुधवा नेशनल पार्क (Dudhwa National Park) का दर्जा दिया गया।
- 1987-88: ‘प्रोजेक्ट टाइगर’ के तहत किशनपुर वन्यजीव अभयारण्य और कतरनियाघाट वन्यजीव अभयारण्य को शामिल करके इसे औपचारिक रूप से दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve Uttar Pradesh) के रूप में मान्यता दी गई।
- भौगोलिक विशेषता: यह अभयारण्य ऊपरी गंगा के मैदान के विशिष्ट तराई-भाबर क्षेत्र के अंतर्गत आता है।
- यह क्षेत्र समृद्ध जलोढ़ मैदानों, दलदली भूमियों (Swamps) और प्राकृतिक जलधाराओं से समृद्ध है।
- इस रिजर्व से होकर मुख्यतः चार नदियां और जलधाराएं बहती हैं—शारदा नदी (किशनपुर के पास), गेरुवा नदी (कतरनियाघाट के माध्यम से), तथा दुधवा नेशनल पार्क के भीतर बहने वाली मोहाना और सुहेली नदियां। ये सभी नदियां अंततः घाघरा नदी तंत्र का हिस्सा बनती हैं।
- वनस्पति (Flora): यहाँ मुख्य रूप से उत्तर भारतीय नम पर्णपाती वन (North Indian Moist Deciduous Forests) पाए जाते हैं। दुधवा में साल के वृक्षों (Sal Forests/Shorea robusta) के दुनिया के सबसे बेहतरीन और घने जंगल मौजूद हैं। इसके अतिरिक्त दलदली घास के मैदान (Marshy Grasslands) और उथली झीलें (Oxbow Lakes) यहाँ के मुख्य भौगोलिक लक्षण हैं।
- वन्यजीव (Dudhwa Tiger Reserve Wildlife):
- बाघ (Bengal Tigers): अखिल भारतीय बाघ गणना के अनुसार दुधवा देश के अग्रणी बाघ क्षेत्रों में से एक है। संरक्षणवादी बिली अर्जन सिंह को दुधवा के बाघों और वनों के संरक्षण का मुख्य श्रेय दिया जाता है, जिन्होंने ब्रिटेन से लाई गई बाघिन ‘तारा’ को यहाँ के जंगलों में सफलतापूर्वक पुनर्वासित किया था।
- दलदली हिरण (Swamp Deer/Barasingha): दुधवा दुनिया की लगभग आधी वैश्विक आबादी वाले उत्तरी दलदली हिरणों (Cervus duvauceli duvauceli) का एकमात्र व्यवहार्य पर्यावास है।
- एक सींग वाला भारतीय गैंडा (Indian Rhinoceros): वर्ष 1984-85 में असम और नेपाल से गैंडों को लाकर दुधवा के सुहेली बाढ़ के मैदानों में एक बाड़े के भीतर सफलतापूर्वक पुनरुत्पादित (Reintroduced) किया गया।
- दुर्लभ प्रजातियाँ: यहाँ गंभीर रूप से लुप्तप्राय बंगाल फ्लोरिकन (Bengal Florican) और हिस्पिड हेयर (Hispid Hare) पाए जाते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: दुधवा टाइगर रिजर्व कहां स्थित है?
उत्तर: दुधवा टाइगर रिजर्व (Dudhwa Tiger Reserve Location) भारत-नेपाल सीमा पर उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी और बहराइच जिलों में स्थित है।
प्रश्न 2: दुधवा टाइगर रिजर्व का कुल क्षेत्रफल कितना है?
उत्तर: इसका कुल क्षेत्रफल 2,201.77 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें 1,093.79 वर्ग किमी का कोर क्षेत्र और 1,107.98 वर्ग किमी का बफर जोन शामिल है।
प्रश्न 3: दुधवा नेशनल पार्क की स्थापना कब हुई थी?
उत्तर: इसे औपचारिक रूप से वर्ष 1977 में एक राष्ट्रीय उद्यान (Dudhwa National Park) के रूप में स्थापित किया गया था।
प्रश्न 4: दुधवा टाइगर रिजर्व को Tiger Reserve का दर्जा कब मिला?
उत्तर: प्रोजेक्ट टाइगर के तहत वर्ष 1987-88 में किशनपुर और कतरनियाघाट अभयारण्यों को मिलाकर इसे एक टाइगर रिजर्व घोषित किया गया था।
प्रश्न 5: दुधवा टाइगर रिजर्व में कौन-कौन से वन्यजीव पाए जाते हैं?
उत्तर: यहाँ मुख्य रूप से बंगाल टाइगर, एक सींग वाले गैंडे, दलदली हिरण (बारासिंघा), तेंदुए, एशियाई हाथी और 450 से अधिक पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं।
