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Colonial Penal Settlement of Andaman Islands, UNESCO विश्व धरोहर केंद्र की भारत की संभावित सूची में हुआ शामिल

Colonial Penal Settlement of Andaman Islands, UNESCO विश्व धरोहर केंद्र की भारत की संभावित सूची में हुआ शामिल

Colonial Penal Settlement of Andaman Islands

संदर्भ:

4 सितंबर 2026 को भारत के “अंडमान द्वीप की औपनिवेशिक दंड बस्ती (Colonial Penal Settlement of Andaman Islands)” को UNESCO विश्व धरोहर केंद्र की भारत की संभावित सूची (UNESCO Tentative List India 2026) में शामिल किया गया है। 

अंडमान द्वीप की औपनिवेशिक दंड बस्ती:

  • परिचय: औपनिवेशिक दंड बस्ती एक क्रमिक संपत्ति (Serial Property) है जो अंडमान में ब्रिटिश शासन काल के दौरान विकसित क्रूर दंड प्रणाली और वास्तुकला को प्रदर्शित करती है।
  • स्थिति: यह केंद्र शासित प्रदेश अंडमान और निकोबार द्वीप समूह के श्री विजया पुरम (पूर्व नाम पोर्ट ब्लेयर) के अटलांटा पॉइंट और उसके आस-पास के द्वीपों पर स्थित है।
  • इतिहास: इस दंड बस्ती की स्थापना 10 मार्च 1858 को हुई थी, जब डॉ. जे. पी. वॉकर की देखरेख में 200 भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों (कैदियों) का पहला जत्था चैथम द्वीप पहुंचा था। इसका मुख्य उद्देश्य 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के विद्रोहियों को मुख्य भूमि से दूर एकांत सजा देना था।
  • मुख्य स्थल: यह दंड बस्ती चार मुख्य स्थलों से मिलकर बनी है:
    • चैथम द्वीप (Chatham Island): जहाँ सबसे पहले कैदियों को उतारा गया और शुरुआती कैंप बनाया गया।
    • नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप (Netaji Subhas Chandra Bose Island / पूर्व नाम रॉस द्वीप): यह इस दंड बस्ती का प्रशासनिक मुख्यालय (Administrative Centre) बना। यहाँ अंग्रेजों ने आलीशान बंगले, चर्च और बाजार बनाए थे।
    • वाइपर द्वीप (Viper Island): यहाँ सेलुलर जेल से पहले एक जेल और फांसी का फंदा बनाया गया था, जहाँ महिला कैदियों और कट्टर स्वतंत्रता सेनानियों को कठोर यातनाएं दी जाती थीं।
    • सेलुलर जेल (Cellular Jail): इसका निर्माण 1896 से 1906 के बीच हुआ। इसे विशेष रूप से ‘एकांत कारावास’ (Solitary Confinement) के लिए डिज़ाइन किया गया था, जिसमें कैदी एक-दूसरे से बात नहीं कर सकते थे।
      • इसे ‘काला पानी’ के नाम से भी जाना जाता है, जहाँ वीर सावरकर और बटुकश्वर दत्त जैसे महान सेनानियों को कैद रखा गया था।
  • आमाप: इस पूरी श्रृंखला में सेलुलर जेल की मूल सात शाखाएं (पैनोप्टीकॉन डिज़ाइन) थीं, जिनमें से वर्तमान में केवल तीन शाखाएं ही सुरक्षित बची हैं।
    • इसका कुल क्षेत्रफल कई हेक्टेयर में फैला हुआ है, जिसमें औपनिवेशिक काल के प्रशासनिक भवनों के खंडहर, बंकर और जेल की कोठरियां शामिल हैं।
  • प्रशासनिक नियंत्रण: वर्तमान में यह स्थल अंडमान और निकोबार प्रशासन (Andaman and Nicobar Administration) तथा भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के तहत काम करने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा संयुक्त रूप से प्रबंधित और संरक्षित किया जाता है।
    • सेलुलर जेल को राष्ट्रीय स्मारक (National Monument) घोषित किया जा चुका है। यह भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के बलिदान और प्रतिरोध का एक जीवंत प्रतीक है।
  • यूनेस्को संभावित सूची (Tentative List): इसे 22 मई 2026 को पेरिस स्थित यूनेस्को में भारत के स्थायी प्रतिनिधिमंडल (Permanent Delegation of India to UNESCO) द्वारा औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया था, जिसे 4 सितंबर 2026 को मंजूरी मिली।
    • इस ऐतिहासिक स्थल को सांस्कृतिक श्रेणी के अंतर्गत मानदंड (ii), (iv) और (vi) के तहत शामिल किया गया है। 

यूनेस्को संभावित सूची (UNESCO Tentative List) क्या हैं?

  • परिचय: संभावित सूची (Tentative List) उन संपत्तियों की एक सूची या इन्वेंट्री है, जिन्हें कोई भी सदस्य देश (State Party) भविष्य में मुख्य विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) में नामांकन के लिए उपयुक्त मानता है।
  • नियम: यूनेस्को के नियमों के अनुसार, किसी भी स्थल को मुख्य विश्व धरोहर सूची में नामित करने से कम से कम एक वर्ष पहले इस संभावित सूची में शामिल होना अनिवार्य है।
    • इस स्थल के शामिल होने के बाद भारत की संभावित सूची में कुल संपत्तियों की संख्या बढ़कर 73 हो गई है।
  • प्रक्रिया: प्रत्येक देश अपने राष्ट्रीय मानकों और विशेषज्ञों के सहयोग से उन स्थलों की पहचान करता है जो ‘असाधारण सार्वभौमिक मूल्य’ (Outstanding Universal Value – OUV) रखते हैं।
    • दस्तावेजीकरण: इसके बाद संस्कृति मंत्रालय के माध्यम से एक विस्तृत डोजियर (Dossier) तैयार किया जाता है जिसमें स्थल के इतिहास, संरक्षण स्थिति और वैश्विक महत्व को प्रमाणित किया जाता है।
    • समीक्षा: यूनेस्को का विश्व धरोहर केंद्र इस आवेदन की तकनीकी जांच करता है और योग्यता पूरी होने पर इसे अपनी आधिकारिक वेबसाइट पर संभावित सूची में दर्ज कर लेता है।
  • महत्व:
    • अंतरराष्ट्रीय पहचान: यह स्थल को वैश्विक मंच पर दृश्यता प्रदान करता है, जिससे अंतरराष्ट्रीय पर्यटन और संरक्षण प्रयासों को बढ़ावा मिलता है।
    • संरक्षण के लिए फंड: संभावित सूची में आने के बाद देशों को तकनीकी सहायता और यूनेस्को के विशेषज्ञों से संरक्षण (Preservation) के लिए रणनीतिक मार्गदर्शन प्राप्त करने का मार्ग प्रशस्त होता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Andaman Islands का Colonial Penal Settlement क्या है?

उत्तर: यह ब्रिटिश काल में अंडमान में स्थापित एक औपनिवेशिक दंड बस्ती (British Penal Settlement India) है, जिसमें सेलुलर जेल, चैथम, वाइपर और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप शामिल हैं।

प्रश्न 2: Andaman Colonial Penal Settlement को UNESCO Tentative List में कब शामिल किया गया?

उत्तर: इसे भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के प्रयासों के बाद 4 सितंबर 2026 को यूनेस्को की संभावित सूची (UNESCO Tentative List India 2026) में आधिकारिक तौर पर जगह मिली।

प्रश्न 3: Andaman Penal Settlement का historical significance क्या है?

उत्तर: यह स्थल 1857 के विद्रोह के बाद भारत के स्वतंत्रता सेनानियों को दी गई क्रूर ‘काला पानी’ की सजा, उनके बलिदान और औपनिवेशिक वास्तुकला का ऐतिहासिक गवाह है। 

प्रश्न 4: क्या Andaman Colonial Penal Settlement UNESCO World Heritage Site बन गया है?

उत्तर: नहीं, यह अभी केवल संभावित सूची (Tentative List) में शामिल हुआ है। भविष्य में विस्तृत मूल्यांकन के बाद ही इसे मुख्य विश्व धरोहर स्थल का दर्जा मिल सकेगा। 

प्रश्न 5: Andaman Islands के colonial heritage की क्या खासियत है?

उत्तर: इसकी खासियत इसका ‘पैनोप्टीकॉन’ स्थापत्य (Penal Architecture) और एकांत कारावास की संरचना है, जो पूरी दुनिया में औपनिवेशिक दमन के इतिहास को प्रदर्शित करती है।समय से प्रक्रियाधीन थीं।

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