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Correct the Map UN Resolution- ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव UN से हुआ पास, भारत ने किया इसका समर्थन

Correct the Map UN Resolution- ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव UN से हुआ पास, भारत ने किया इसका समर्थन

Correct the Map UN Resolution

संदर्भ:

हाल ही में 4 सितंबर 2026 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव (Correct the Map UN Resolution) भारी बहुमत से पास हुआ। भारत ने इस ऐतिहासिक प्रस्ताव का पूर्ण समर्थन किया।

UN का ‘करेक्ट द मैप’ प्रस्ताव क्या हैं?

  • परिचय: यह संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) द्वारा पारित एक गैर-बाध्यकारी प्रस्ताव (Non-binding Resolution) है।
    • इसका आधिकारिक शीर्षक “करेक्ट द मैप: रीबैलेंसिंग ग्लोबल कार्टोग्राफिक रिप्रेजेंटेशन एंड प्रमोटिंग इक्विटेबल रिप्रेजेंटेशन ऑफ द वर्ल्ड्स रीजन्स, पर्टिकुलरली अफ्रीका” है। 
  • उद्देश्य: इसका उद्देश्य पारंपरिक मानचित्रों में महाद्वीपों के वास्तविक आकार के साथ सदियों से हो रहे दृश्य विरूपण को सुधारना है।
  • प्रस्ताव और वोटिंग:
    • प्रस्तावक (Sponsor): Correct the Map Campaign को मुख्य रूप से अफ्रीकी देश टोगो (Togo) द्वारा प्रायोजित किया गया था और अफ्रीकी संघ (African Union) के सदस्यों द्वारा समर्थित किया गया था।
      • यह प्रस्ताव न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में 4 सितंबर 2026 को यूएनएजीए सत्र में लाया और पास किया गया।
    • वोटिंग का परिणाम (Voting Result):
      • पक्ष में वोट: भारत, फ्रांस और यूके सहित 164 देशों ने इसके समर्थन में मतदान किया।
      • विरोध में वोट: संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) एकमात्र ऐसा देश था जिसने इस प्रस्ताव के विरोध में मतदान किया।
      • अनुपस्थित (Abstentions): एस्टोनिया, जॉर्जिया, लिथुआनिया, मोल्दोवा, सर्बिया और यूक्रेन सहित 6 देश मतदान से दूर रहे।
  • प्रस्ताव लाने के मुख्य कारण:
    • मर्केटर प्रोजेक्शन की कमियाँ (Mercator Map Projection): 1569 में गेराडस मर्केटर द्वारा तैयार किया गया पारंपरिक मानचित्र (2D मानचित्र) नौवहन (Navigation) के लिए तो उत्तम हैं, लेकिन यह भूमध्य रेखा (Equator) के पास के देशों को छोटा और ध्रुवों (Poles) के पास के क्षेत्रों को बहुत बड़ा दिखाता है।
    • अफ्रीका और भारत का वास्तविक आकार छुपाना: मर्केटर मानचित्र पर ग्रीनलैंड और अफ्रीका का आकार लगभग समान दिखाई देता है, जबकि वास्तव में अफ्रीका ग्रीनलैंड से 14 गुना बड़ा है। इसी तरह, भारत और दक्षिण एशिया का आकार भी काफी छोटा दिखाई देता है।
    • औपनिवेशिक विरासत (Colonial Legacy): अफ्रीकी और विकासशील देशों का तर्क है कि इस विरूपण ने वैश्विक स्तर पर उनकी वास्तविक आर्थिक क्षमता, जनसंख्या और महत्व को कम आँका है, जो औपनिवेशिक मानसिकता को दर्शाता है।
  • भारत का समर्थन:
    • समान क्षेत्र प्रोजेक्शन का समर्थन: विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत समान क्षेत्र मानचित्र प्रोजेक्शन (Equal Area Map Projection) सिद्धांतों को बढ़ावा देने के पक्ष में है ताकि महाद्वीपों का वास्तविक आकार (True Size) सामने आ सके।
    • क्षेत्रीय संप्रभुता सर्वोपरि: भारत ने दृढ़ता से कहा कि इस वैश्विक मानचित्र बदलाव के दौरान भारत की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता (Sovereignty and Territorial Integrity) से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
    • आधिकारिक मानचित्र का पालन अनिवार्य: संयुक्त राष्ट्र या किसी भी वैश्विक मंच द्वारा जारी नए मानचित्र में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर और लद्दाख सहित भारत के संपूर्ण संप्रभु क्षेत्र को भारत के आधिकारिक मानचित्र के अनुसार ही दर्शाया जाना अनिवार्य और गैर-परक्राम्य होगा।
    • तकनीकी तटस्थता: भारत ने स्पष्ट किया कि उसका समर्थन केवल सामान्य सिद्धांतों के लिए है, न कि किसी एक विशिष्ट या स्वामित्व वाली पद्धति (जैसे कि 2018 का इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन) को कानूनी रूप से अनिवार्य बनाने के लिए।

समान क्षेत्र मानचित्र प्रोजेक्शन (Equal Area Map Projection) क्या है?

  • परिचय: यह मानचित्र कला (Cartography) की एक ऐसी तकनीक है जिसमें पृथ्वी की गोलाकार सतह को समतल कागज पर इस तरह प्रदर्शित किया जाता है कि सभी महाद्वीपों और देशों का सापेक्ष क्षेत्रफल (Relative Area) उनके वास्तविक जमीनी आकार के अनुपात में सटीक बना रहे।
    • इस मानचित्र प्रक्षेप में पृथ्वी की सतह के विभिन्न क्षेत्रों के क्षेत्रफल को मानचित्र पर सही और आनुपातिक (proportional) रूप में प्रदर्शित किया जाता है।
    • इसमें किसी भी क्षेत्र का क्षेत्रफल सही होता है, जिससे दो देशों या महाद्वीपों के आकार की सही तुलना की जा सकती है।
    • यह विस्थापन को रोकता है और भूमध्यरेखीय क्षेत्रों जैसे कि अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और भारत को उनका उचित भौगोलिक प्रतिनिधित्व प्रदान करता है।
  • उपयोग: इसका उपयोग जनसंख्या घनत्व, कृषि क्षेत्र या वन कवरेज जैसे विषयों को दिखाने के लिए किया जाता है जहाँ क्षेत्रफल की सही जानकारी जरूरी हो।
  • उदाहरण:
    • Albers Equal-Area Conic (एल्बर्स इक्वल-एरिया कोनिक): यह प्रक्षेप मुख्य रूप से पूर्व-पश्चिम दिशा में फैले मध्यम अक्षांश वाले क्षेत्रों (जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका) के लिए उपयोग किया जाता है।
    • Lambert Cylindrical Equal-Area (लैम्बर्ट बेलनाकार समान क्षेत्र): यह भूमध्य रेखा (Equator) के पास के क्षेत्रों के क्षेत्रफल को बिल्कुल सही दिखाता है, लेकिन ध्रुवों की ओर जाने पर आकृति लंबी खींच जाती है।
    • Mollweide Projection (मोलवेड प्रोजेक्शन): इसमें पूरे विश्व के मानचित्र को एक अंडाकार (elliptical) रूप में दिखाया जाता है और महाद्वीपों के क्षेत्रफल को सटीक रखा जाता है।

यूएन वर्ल्ड मैप रेजोल्यूशन 2026 का महत्व:

  • शैक्षणिक सुधार: यह दुनिया भर के स्कूलों, विश्वविद्यालयों और पाठ्यपुस्तकों में भूगोल की रूढ़िवादी और गलत समझ को सुधारेगा।
  • भू-राजनीतिक संतुलन: वैश्विक दक्षिण (Global South) के देशों को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उनकी वास्तविक भौगोलिक और जनसांख्यिकीय स्थिति के अनुसार उचित मानसिक और कूटनीतिक महत्व मिलेगा।
  • डिजिटल प्लेटफॉर्म्स में बदलाव: यह गूगल मैप्स (Google Maps) और अन्य वैश्विक तकनीकी प्लेटफार्मों को अधिक न्यायसंगत और सटीक मानचित्र विकल्प (जैसे इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन) अपनाने के लिए प्रेरित करेगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Correct the Map proposal क्या है?

उत्तर: यह संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा समर्थित एक अभियान है, जो विश्व मानचित्र पर महाद्वीपों, विशेष रूप से अफ्रीका और भारत के वास्तविक आकार को सटीक रूप से प्रदर्शित करने की वकालत करता है।

प्रश्न 2: UN ने Correct the Map proposal को क्यों support किया?

उत्तर: यूएन ने पारंपरिक मर्केटर मानचित्रों (Mercator Projection) के सदियों पुराने भौगोलिक विरूपण और औपनिवेशिक असमानता को दूर करने के लिए इसका समर्थन किया है。

प्रश्न 3: India ने Correct the Map proposal का समर्थन क्यों किया?

उत्तर: भारत ने वैश्विक क्षेत्रों के निष्पक्ष और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व (Equitable Representation) की अपनी नीति के तहत इसका समर्थन किया, बशर्ते भारत की सीमाओं की संप्रभुता अक्षुण्ण रहे।

प्रश्न 4: Mercator Map Projection में Africa का आकार छोटा क्यों दिखाई देता है?

उत्तर: मर्केटर तकनीक भूमध्य रेखा के पास के क्षेत्रों को सिकोड़ देती है और ध्रुवों के पास के क्षेत्रों को बहुत बड़ा कर देती है, जिससे अफ्रीका वास्तविक आकार से छोटा दिखता है।

प्रश्न 5: Correct the Map initiative में Equal Area Map Projection क्या है?

उत्तर: यह एक ऐसी कार्टोग्राफिक तकनीक है जो गोल पृथ्वी को समतल मानचित्र पर बदलते समय सभी देशों के सापेक्ष क्षेत्रफल और वास्तविक आकार के अनुपात को बनाए रखती है।

प्रश्न 6: UN World Map Resolution 2026 का क्या महत्व है?

उत्तर: गैर-बाध्यकारी होने के बावजूद यह वैश्विक शिक्षा, डिजिटल मीडिया और नीति निर्माण में अधिक सटीक और न्यायसंगत भौगोलिक सोच को बढ़ावा देगा।रती है।

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