केंचुए की नई प्रजाति की हुई खोज, Drawida incomparabilis रखा गया है नाम
संदर्भ:
हाल ही में भारतीय वैज्ञानिकों ने पश्चिमी घाट के सदाबहार जंगलों में केंचुए की एक बिल्कुल नई और विशिष्ट प्रजाति की खोज की है, जिसे आधिकारिक तौर पर ड्राविडा इनकंपैराबिलिस (Drawida incomparabilis) नाम दिया गया।
केंचुए की नई प्रजाति “ड्राविडा इनकंपैराबिलिस” के बारे में:
- खोजकर्ता संस्थान: यह महत्वपूर्ण भारतीय संबंधी केंचुआ खोज (Indian Earthworm Discovery) भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (Zoological Survey of India – ZSI) और महात्मा गांधी विश्वविद्यालय (MGU), केरल के संयुक्त शोधकर्ताओं द्वारा की गई।
- खोज स्थल: यह प्रजाति मुख्य रूप से केरल (Keralam) और तमिलनाडु राज्यों में फैली पश्चिमी घाट पर्वतमाला (Western Ghats Mountain Chain) के गहरे सदाबहार और पर्णपाती जंगलों (Evergreen and Deciduous Forests) की मिट्टी में पाई गई।
- शोध दल ने इसे प्रसिद्ध अनामलाई टाइगर रिजर्व (ATR) और पराम्बिकुलम टाइगर रिजर्व (PTR) के संरक्षित क्षेत्रों से एकत्र किया।
- वैज्ञानिक नामकरण (Nomenclature): लैटिन भाषा में ‘incomparabilis’ शब्द का अर्थ “अतुलनीय” या “अद्वितीय” होता है। इसकी विशिष्ट शारीरिक संरचना के कारण इसे यह नाम दिया गया है।
- पारिवारिक वर्गीकरण (Taxonomic Hierarchy):
- फाइलम (Phylum): एनेलिडा (Annelida)
- क्लास (Class): ओलिगोकीटा (Oligochaeta)
- फैमिली (Family): मोनिलिगास्ट्रिडे (Moniligastridae)
- वंश (Genus): ड्राविडा (Drawida)
- ड्राविडा वंश का संदर्भ: मोनिलिगास्ट्रिडे परिवार (Moniligastridae Family) स्थलीय केंचुओं का एक अत्यंत प्राचीन और आदिम समूह माना जाता है।
- इसके अंतर्गत ड्राविडा वंश (Drawida Species) एशिया के भूमिगत पारिस्थितिकी प्रणालियों का एक प्रमुख घटक है।
- भारत केंचुआ जैव विविधता (Earthworm Biodiversity India) के मामले में दुनिया के सबसे समृद्ध देशों में से एक है।
- भारत में पाई जाने वाली ड्राविडा की अधिकांश प्रजातियां स्थानिक (Endemic) हैं, जिनमें से सबसे बड़ी संख्या अकेले पश्चिमी घाट जैव विविधता हॉटस्पॉट (Western Ghats Biodiversity Hotspot) में केंद्रित है।
- विशाल आकार: ड्राविडा इनकंपैराबिलिस केंचुआ (Drawida incomparabilis Earthworm) सामान्य केंचुओं की तुलना में काफी बड़ा होता है। इसकी लंबाई लगभग 217 मिलीमीटर से 392 मिलीमीटर (लगभग 40 सेंटीमीटर) तक हो सकती है।
- गिज़ार्ड की स्थिति (Posterior Gizzards): इस प्रजाति की सबसे अनोखी विशेषता इसके गिज़ार्ड (भोजन पीसने वाला अंग) की शारीरिक स्थिति है।
- इसमें 6 से 8 गिज़ार्ड होते हैं, जो शरीर के पिछले हिस्से में खंड 24 से 33 (Segments 24–33) के बीच स्थित होते हैं। पूरे ड्राविडा वंश में केवल एक अन्य प्रजाति (ड्राविडा नीलाम्बुरेंसिस) में ऐसा देखा गया है।
- ग्रंथिल प्रोस्टेट (Glandular Prostate): इसमें विशिष्ट ग्रंथिल प्रोस्टेट (Glandular Prostates) अंग पाए जाते हैं, जो इसे पेशीय प्रोस्टेट वाली अन्य समरूप प्रजातियों से अलग और विशिष्ट बनाते हैं।
- सह-खोज (Co-discovery): इस शोध के दौरान वैज्ञानिकों ने मिट्टी छँटाई विधियों का उपयोग करके एक और दुर्लभ प्रजाति ‘ड्राविडा लोरिकाटा’ (Drawida loricata) को भी तमिलनाडु से पुनः खोज निकाला है, जो पिछले 81 वर्षों (1945 के बाद से) से वैज्ञानिक अभिलेखों से गायब थी।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: नई केंचुआ प्रजाति का नाम क्या रखा गया है?
उत्तर: पश्चिमी घाट में खोजी गई केंचुए की इस बिल्कुल नई और विशिष्ट प्रजाति का वैज्ञानिक नाम ड्राविडा इनकंपैराबिलिस (Drawida incomparabilis) रखा गया है।
प्रश्न 2: Drawida incomparabilis कहाँ पाई गई है?
उत्तर: यह प्रजाति दक्षिण भारत के केरल और तमिलनाडु राज्यों में विस्तृत पश्चिमी घाट के अनामलाई और पराम्बिकुलम टाइगर रिजर्व के जंगलों में पाई गई है।
प्रश्न 3: Drawida incomparabilis किस family से संबंधित है?
उत्तर: यह केंचुआ स्थलीय मेगाड्रिल केंचुओं के एक प्राचीन और आदिम परिवार मोनिलिगास्ट्रिडे (Moniligastridae) से संबंधित है।
प्रश्न 4: नई Earthworm Species की पहचान कैसे हुई?
उत्तर: इसकी पहचान इसके 40 सेमी तक के बड़े आकार, शरीर के पिछले हिस्से (खंड 24-33) में स्थित 6-8 गिज़ार्ड और विशिष्ट ग्रंथिल प्रोस्टेट के आधार पर हुई है।
प्रश्न 5: इस खोज का क्या महत्व है?
उत्तर: यह खोज पश्चिमी घाट की समृद्ध जैव विविधता और स्थानिकता (Endemism) को रेखांकित करती है तथा मृदा स्वास्थ्य एवं पारिस्थितिकी अनुसंधान (Earthworm Research India) को बढ़ावा देती है।
