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Golden Spice Mission – मेघालय की GI टैग लकाडोंग हल्दी को वैश्विक ब्रांड बनाने की शुरुआत

Golden Spice Mission – मेघालय की GI टैग लकाडोंग हल्दी को वैश्विक ब्रांड बनाने की शुरुआत

Golden Spice Mission

संदर्भ:

हाल ही में केंद्रीय पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और मेघालय के मुख्यमंत्री कॉनराड के. संगमा ने नई दिल्ली में संयुक्त रूप से ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ (Golden Spice Mission) का शुभारंभ किया।

गोल्डन स्पाइस मिशन (Golden Spice Mission) क्या हैं?

  • परिचय: यह मिशन मेघालय की अद्वितीय पहचान वाली लकाडोंग हल्दी (Lakadong Turmeric) के उत्पादन, जैविक प्रसंस्करण (Organic Processing) और वैश्विक विपणन को एकीकृत करने वाली एक महत्वाकांक्षी सरकारी योजना है.
    • इस मिशन का पूरा नाम ‘मिशन गोल्डन स्पाइस – एकीकृत लकाडोंग हल्दी मूल्य श्रृंखला संवर्धन परियोजना’ है.
  • मंत्रालय और सहयोग: यह मिशन पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) और उत्तर पूर्वी परिषद (NEC) के मार्गदर्शन में संचालित हो रहा है.
    • इसके कार्यान्वयन में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय, राष्ट्रीय हल्दी बोर्ड (National Turmeric Board), नाबार्ड (NABARD), मसाला बोर्ड (Spices Board), और मेघालय सरकार (Government of Meghalaya) सक्रिय रूप से सहयोग कर रहे हैं. 
  • कुल बजट: इस मिशन के लिए ₹175.45 करोड़ का कुल वित्तीय आवंटन किया गया है.
  • फंडिंग पैटर्न: इसमें पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय (MDoNER) अकेले 50% वित्तीय हिस्सेदारी वहन कर रहा है, जबकि शेष राशि अन्य संबद्ध मंत्रालयों और राज्य सरकार द्वारा साझा की जा रही है.
  • समय सीमा: यह मिशन पांच वर्ष (2025-2030) की समय सीमा के भीतर दो चरणों में लागू किया जा रहा है: 
  • चरण 1 (वैल्यू श्रृंखला सुदृढ़ीकरण): इसके तहत फसल कटाई के बाद के नुकसान को कम करने के लिए बुनियादी ढांचे और कोल्ड चेन का निर्माण किया जा रहा है. 
  • चरण 2 (विस्तार और बड़े पैमाने पर विपणन): इसमें वैश्विक निर्यात बाजारों जैसे अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU), जापान और खाड़ी देशों में ब्रांडिंग को बढ़ावा दिया जाएगा. 
  • प्रमुख लक्ष्य:
    • क्षेत्रफल विस्तार: हल्दी की खेती (Turmeric Farming) के रकबे को 2,500 हेक्टेयर से बढ़ाकर 7,000 हेक्टेयर करना.
    • उत्पादन लक्ष्य: वार्षिक उत्पादन को 49,400 मीट्रिक टन तक पहुँचाना.
    • आय संवर्धन: किसानों को मिलने वाले खेत-दर मूल्य को ₹30-40 प्रति किलोग्राम से बढ़ाकर ₹80 प्रति किलोग्राम करना.
  • महिला सशक्तिकरण: इस परियोजना से 17,500 से अधिक किसान लाभान्वित होंगे, जिनमें 99% महिलाएं शामिल हैं.

लकाडोंग हल्दी (Lakadong Turmeric) से संबंधित मुख्य बिंदु: 

  • उत्पादन क्षेत्र: यह हल्दी मुख्य रूप से मेघालय के पश्चिम जयंतिया हिल्स (West Jaintia Hills) और पूर्वी जयंतिया हिल्स जिलों के ‘लकाडोंग’ क्षेत्र में उगाई जाती है. 
  • स्थानीय विशेषता: इस हल्दी की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यदि इसे मेघालय के इस विशिष्ट भूभाग से बाहर कहीं और उगाया जाए, तो इसके विशिष्ट गुणों और रसायनों की मात्रा में भारी कमी आ जाती है.
  • उच्च करक्यूमिन सामग्री: सामान्य हल्दी में करक्यूमिन की मात्रा केवल 2% से 4% होती है, जबकि लकाडोंग हल्दी में यह मात्रा 7% से 12% तक पाई जाती है.
    • यह वैश्विक औसत से लगभग चार गुना अधिक है, जो इसे फार्मास्युटिकल और न्यूट्रस्युटिकल उद्योगों के लिए एक प्रीमियम उत्पाद बनाता है. 
    • करक्यूमिन (Curcumin) हल्दी में पाया जाने वाला मुख्य जैव-सक्रिय यौगिक (Bioactive Compound) है, जो इसकी गुणवत्ता, औषधीय मूल्य और गहरे पीले रंग का निर्धारण करता है.
  • जीआई टैग: भारत सरकार द्वारा उत्पाद की मौलिकता को प्रमाणित करते हुए इसे 30 मार्च 2024 को भौगोलिक संकेतक (Geographical Indication – GI Tag) प्रदान किया गया.
    • भारत में जीआई टैग ‘वस्तु भौगोलिक उपदर्शन (पंजीकरण और संरक्षण) अधिनियम, 1999’ के तहत दिया जाता है.
    • जीआई टैग मिलने से वैश्विक प्रीमियम बाजार (Premium Market) में इस हल्दी की नकल को रोका जा सकता है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसकी ब्रांड वैल्यू मजबूत होती है. 
  • औषधीय गुण: इसमें प्रचुर मात्रा में सूजन-रोधी (Anti-inflammatory), एंटीऑक्सीडेंट (Antioxidant) और रोग-प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले गुण विद्यमान हैं.
  • पूर्णतः जैविक खेती (Organic Farming): मेघालय की पारंपरिक कृषि पद्धतियों के कारण यह हल्दी बिना किसी सिंथेटिक उर्वरक या कीटनाशकों के पूर्णतः प्राकृतिक और जैविक रूप से उगाई जाती है।
  • अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शन: भारत के माननीय प्रधानमंत्री ने जी7 शिखर सम्मेलन (G7 Summit) जैसे उच्च स्तरीय अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक नेताओं को उपहार स्वरूप यह हल्दी भेंट की थी.
  • आर्थिक प्रभाव: ‘मिशन गोल्डन स्पाइस’ के माध्यम से वित्तीय वर्ष 2028-29 तक पूर्वोत्तर में ₹100 करोड़ की लकाडोंग हल्दी अर्थव्यवस्था विकसित करने और महिलाओं के नेतृत्व में 3,000 से अधिक रोजगार सृजित करने का लक्ष्य है, जो क्षेत्र में समावेशी विकास (Inclusive Development) का मार्ग प्रशस्त करेगा. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: गोल्डन स्पाइस मिशन क्या है?

उत्तर: यह पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय द्वारा समर्थित ₹175.45 करोड़ की एक पंचवर्षीय योजना (Spice Mission) है, जो मेघालय की लकाडोंग हल्दी को वैश्विक लक्जरी ब्रांड बनाने पर केंद्रित है. 

प्रश्न 2: लकाडोंग हल्दी की विशेषता क्या है?

उत्तर: इसमें 7% से 12% करक्यूमिन (Curcumin Rich Turmeric) पाया जाता है, जो विश्व औसत से चार गुना अधिक है और इसे बेजोड़ औषधीय गुण प्रदान करता है.

प्रश्न 3: यह मिशन किस राज्य में शुरू किया गया है?

उत्तर: यह विशिष्ट कृषि और मूल्य श्रृंखला संवर्धन मिशन भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय (Meghalaya Agriculture) में आधिकारिक रूप से शुरू किया गया है.

प्रश्न 4: मिशन से किसानों को क्या लाभ मिलेगा?

उत्तर: इससे 17,500 से अधिक किसानों (99% महिलाएं) की आय दोगुनी होगी तथा खेत-स्तर पर हल्दी की कीमत ₹30-40 से बढ़कर ₹80/किग्रा हो जाएगी.

प्रश्न 5: लकाडोंग हल्दी का GI टैग क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह भौगोलिक संकेतक (GI Turmeric) उत्पाद की प्रामाणिकता सुनिश्चित करता है, अंतरराष्ट्रीय बाजार में जालसाजी रोकता है और किसानों को प्रीमियम निर्यात मूल्य दिलाने में मदद करता है.

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