Green energy policy of China
Green energy policy of China –
संदर्भ:
हाल ही में चीन ने वैश्विक हरित ऊर्जा क्षेत्र में भारी निवेश कर और नेतृत्व संभाल कर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान आकर्षित किया है। पर्यावरणीय संकट और ऊर्जा सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए, चीन ने स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों में अपने निवेश को तेजी से बढ़ाया है, जिससे वह नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में अग्रणी बनकर उभरा है।
चीन की हरित ऊर्जा नीति के रणनीतिक आधार
नीतियों और निवेश के ज़रिए सुनियोजित बदलाव:
- चीन की हरित ऊर्जा की यात्रा 2000 के दशक की शुरुआत में छोटे-छोटे पायलट प्रोजेक्ट्स से शुरू हुई।
- 2005 का Renewable Energy Law और 11वीं पंचवर्षीय योजना (2006–2010) ने स्वच्छ ऊर्जा को राष्ट्रीय प्राथमिकता बना दिया।
- सरकार ने सब्सिडी, ग्रिड एक्सेस गारंटी और रेगुलेटरी प्रोत्साहन जैसे उपायों से हरित उत्पादकों को बढ़ावा दिया।
वित्तीय निवेश में असाधारण वृद्धि:
- चीन का निवेश 2006 में $10.7 बिलियन से बढ़कर 2024 में $940 बिलियन तक पहुंच गया (स्रोत: Carbon Brief)।
- तुलना में भारत ने 2024–25 में केवल $3.4 बिलियन आकर्षित किए, जो चीन की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
प्रदूषण और ऊर्जा असुरक्षा से निपटना:
- बीजिंग और शंघाई में वायु प्रदूषण संकट के स्तर पर पहुंच गया, जिससे जनता में रोष और सरकार की तत्काल कार्रवाई शुरू हुई।
- साथ ही, तेजी से बढ़ती बिजली मांग और तेल आयात पर निर्भरता के कारण चीन ने ऊर्जा स्रोतों का विविधीकरण शुरू किया।
चीन की हरित रणनीति को प्रेरित करने वाले घरेलू कारण
गंभीर वायु प्रदूषण:
- विशेष रूप से बीजिंग जैसी औद्योगिक शहरों में विषैली हवा ने जनस्वास्थ्य संकट और सामाजिक असंतोष को जन्म दिया।
- इससे सरकार को कड़े पर्यावरणीय सुधार लागू करने पड़े।
ऊर्जा असुरक्षा:
- चीन की अर्थव्यवस्था कोयले और आयातित तेल पर अत्यधिक निर्भर थी, जिससे ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों में अस्थिरता बनी रही।
- इसे कम करने के लिए चीन ने सौर और पवन ऊर्जा का तेज़ी से विस्तार किया, जिससे ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़े।
आर्थिक संतुलन की आवश्यकता:
- चीन को भारी उद्योग-आधारित अर्थव्यवस्था से नवाचार-आधारित विकास और हरित नौकरियों की ओर बढ़ने की ज़रूरत थी।
- 13वीं और 14वीं पंचवर्षीय योजनाओं के तहत सरकार ने हरित उद्योगों को बढ़ावा दिया, जिससे सतत विकास और प्रौद्योगिकी नेतृत्व सुनिश्चित हो सके।
चीन की हरित ऊर्जा नीति: चुनौतियाँ और सुधारात्मक कदम
बुनियादी ढांचे की बाधाएँ:
- पवन और सौर ऊर्जा का तेज़ विस्तार इतनी तेजी से हुआ कि पावर ग्रिड उसके अनुरूप तैयार नहीं था।
- परिणामस्वरूप, इनर मंगोलिया और गांसू जैसे प्रांतों में 20% तक ऊर्जा कटौती (curtailment) देखी गई।
- समाधान के रूप में चीन ने अल्ट्रा-हाई वोल्टेज ट्रांसमिशन लाइनों में भारी निवेश किया और State Grid का दशक भर में निवेश दोगुना कर दिया।
सब्सिडी–आधारित अक्षमताएँ:
- प्रारंभिक चरण में सरकारी सब्सिडी ने अति-निर्माण और दक्षता की कमी को बढ़ावा दिया।
- इसके जवाब में बीजिंग ने नियामक निगरानी को सख्त किया और ग्रिड-तैयारी को प्राथमिकता देते हुए दक्षता-आधारित योजना को बढ़ावा दिया।
भारत सरकार द्वारा हरित ऊर्जा क्षेत्र में उठाए गए प्रमुख कदम
राष्ट्रीय सौर मिशन (National Solar Mission):
- राष्ट्रीय जलवायु परिवर्तन कार्य योजना (NAPCC) के तहत शुरू किया गया।
- उद्देश्य: 2030 तक 280 GW सौर ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य।
- 2024 तक भारत ने 81 GW सौर क्षमता पार कर ली है।
हरित हाइड्रोजन मिशन :
- राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन के तहत भारत को ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन और निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाने का लक्ष्य।
- इसका उपयोग परिवहन, उर्वरक, और भारी उद्योगों को कार्बन-मुक्त करने में किया जाएगा।
PLI योजना (उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना):
- सौर PV मॉड्यूल, बैटरी, और पवन ऊर्जा उपकरणों के लिए PLI योजना शुरू की गई।
- उद्देश्य: आयात पर निर्भरता घटाना और स्थानीय निर्माण को बढ़ावा देना।