India economic progress 8.2% GDP growth
संदर्भ:
भारत वित्त वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। Q2 में 8.2% और H1 में 8% की वास्तविक GDP वृद्धि ने यह स्पष्ट किया है कि भारत की अर्थव्यवस्था न केवल व्यापक रूप से विस्तारित हो रही है, बल्कि इसके आधार—मांग, निवेश, निर्यात, श्रम भागीदारी और मूल्य स्थिरता—संतुलित और मजबूत हैं।
भारत की GDP वृद्धि और क्षेत्रीय प्रदर्शन:
- भारत की वास्तविक GDP ने Q2 FY 2025–26 में 8.2% की प्रभावशाली वृद्धि दर्ज की, जो पिछले वर्ष के 5.6% से काफी अधिक है। Q1 की 7.8% वृद्धि को मिलाकर, H1 का समेकित वृद्धि दर 8% रही, जो मजबूत घरेलू मांग, विनिर्माण विस्तार, और सेवा क्षेत्र की प्रगतिशील वृद्धि का द्योतक है।
- प्राथमिक क्षेत्र ने Q2 में 3.1% और H1 में 2.9% की वृद्धि दर्ज की। कृषि-मूल्य शृंखला में स्थिरता के बावजूद, मानसूनी उतार-चढ़ाव और वैश्विक कमोडिटी कीमतों का प्रभाव इस क्षेत्र पर अधिरोपित रहा। UPSC के संदर्भ में, यह क्षेत्र खाद्य सुरक्षा, ग्रामीण आय और MSP सुधारों से जुड़ा हुआ है।
- द्वितीयक क्षेत्र ने Q2 में 8.1% और H1 में 7.6% की वृद्धि सुनिश्चित की। विनिर्माण के उप-क्षेत्रों में उल्लेखनीय वृद्धि— Basic Metals (12.3%), Electrical Equipment (28.7%) और Automobiles (14.6%)। ये आँकड़े Make in India, PLI Scheme, और GST 2.0 के प्रभाव को प्रमाणित करते हैं।
- तृतीयक क्षेत्र ने Q2 में 9.2% और H1 में 9.3% की वृद्धि दर्ज की। ICT सेवाएँ, व्यवसाय सेवाएँ और वित्तीय गतिविधियाँ निर्यात-उन्मुख वृद्धि का आधार बनीं। यह भारत को वैश्विक सेवा अर्थव्यवस्था में अग्रणी बनाता है।
अन्य प्रमुख आंकड़े:
- मुद्रास्फीति: अक्टूबर 2025 में भारत की CPI मुद्रास्फीति 0.25% पर आ गई, जो वर्तमान CPI श्रृंखला की सबसे न्यूनतम स्तर है। CFPI –5.02% तक गिर गई, जिसे तेल, सब्ज़ियाँ, फल, अंडे और अनाज की कीमतों में कमी ने प्रभावित किया।
- थोक मूल्य सूचकांक: WPI अक्टूबर 2025 में –1.21% रहा, जो कच्चे तेल, बिजली और धातुओं की कीमतों में कमी से प्रेरित था। यह व्यापार लागत में कमी और उद्योगों की इनपुट दक्षता को दर्शाता है।
- औद्योगिक उत्पादन: सितंबर 2025 में IIP में 4% की वृद्धि से संगठित उद्योग संरचना की मजबूती स्पष्ट होती है। विश्लेषण में— Infrastructure Goods – 10.5%, Consumer Durables – 10.2%, Intermediate Goods – 5.3% रहा।
- श्रम भागीदारी: अक्टूबर 2025 में LFPR बढ़कर 55.4% पहुंचा— WPR – 52.5%, Female LFPR – 34.2%, बेरोज़गारी दर – 5.2%। EPFO में 21.04 लाख नए सदस्य श्रम बाज़ार की मजबूती को दर्शाते हैं।
- निर्यात क्षेत्र का विस्तार: April–October 2025 में कुल निर्यात 4.84% बढ़कर USD 491.80 Billion तक पहुँचा। इसमें Merchandise Export – 0.63% और Services Export – 9.75% रहा। IT और बिज़नेस सेवाएँ भारत के निर्यात की प्रमुख शक्ति बनी हैं।
- सरकार के सुधार: सरकार ने निर्यात मूल्य प्राप्ति अवधि को 9 से 15 महीने किया। NCGTC के माध्यम से ₹20,000 करोड़ की क्रेडिट गारंटी मंजूर की गई। Export Promotion Mission लॉन्च किया गया, जो MSME निर्यातकों, को बढ़ाते हैं।
- GST 2.0: सरलीकृत 5% और 18% दो-स्लैब संरचना ने खपत बढ़ाई, कर अनुपालन सुधारा है। इसी कारण अक्टूबर 2025 की ₹1.96 लाख करोड़ GST संग्रह किया गया।

