Indian Statistical Institute Bill 2026 लोकसभा में पेश, बिल के मुख्य प्रावधान क्या है?
संदर्भ:
हाल ही में भारत सरकार ने लोकसभा में ‘भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026’ (The Indian Statistical Institute Bill, 2026) को पेश किया गया।
- केंद्रीय सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) द्वारा प्रस्तुत यह विधायी प्रस्ताव लगभग 67 वर्ष पुराने ‘भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959’ को निरस्त कर उसके स्थान पर एक नया और आधुनिक विधिक ढांचा स्थापित करने का प्रयास है।
Indian Statistical Institute Bill, 2026 विधेयक के प्रमुख प्रावधान:
- वैधानिक कॉर्पोरेट निकाय में परिवर्तन (Conversion into a Statutory Body Corporate): वर्तमान में भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute – ISI) ‘पश्चिम बंगाल सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1961’ के तहत एक पंजीकृत सोसायटी के रूप में संचालित है।
- नए विधेयक में संस्थान को एक गैर-लाभकारी वैधानिक कॉर्पोरेट निकाय (Not-for-profit Statutory Body Corporate) का रूप दिया जाना प्रस्तावित है। संस्थान का ‘राष्ट्रीय महत्व के संस्थान’ (Institution of National Importance) का दर्जा बरकरार रहेगा।
- शासी संरचना और विज़िटर की नियुक्ति (New Governance Structure and Visitor): भारत के राष्ट्रपति संस्थान के विज़िटर (Visitor) के रूप में कार्य करेंगे। उनके पास संस्थान के कार्यों की समीक्षा करने, जांच कराने और आवश्यक बाध्यकारी निर्देश जारी करने की शक्तियां होंगी।
- संस्थान के सुचारू संचालन के लिए एक नया बोर्ड ऑफ गवर्नर्स (Board of Governors) गठित किया जाएगा, जो मुख्य नीति और कार्यकारी निकाय होगा।
- इसकी अध्यक्षता शिक्षा, उद्योग, लोक नीति या सांख्यिकी विज्ञान क्षेत्र के किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति द्वारा की जाएगी, जिसकी नियुक्ति सरकार की सिफारिश पर विज़िटर करेंगे।
- अकादमिक परिषद और निदेशक (Academic Council and Director):
- अकादमिक परिषद (Academic Council): संस्थान के निदेशक (Director) की अध्यक्षता में एक अकादमिक परिषद का गठन होगा, जो पाठ्यक्रमों, प्रवेश पात्रता मानदंडों और परीक्षाओं के निर्धारण के लिए मुख्य निकाय होगी।
- निदेशक की भूमिका: निदेशक संस्थान का मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) होगा, जिसकी नियुक्ति बोर्ड द्वारा विज़िटर की पूर्व स्वीकृति से की जाएगी।
- नियंत्रण में संशोधन: पुराने 1959 के अधिनियम के तहत सरकार को यह शक्ति प्राप्त थी कि वह संस्थान द्वारा निर्देशों का पालन न करने पर दो साल के लिए इसका प्रबंधन पूरी तरह अपने हाथ में ले सकती थी।
- नए विधेयक ने सरकार की इस अधिग्रहण शक्ति को हटा दिया है। हालांकि, कुशल प्रशासन के लिए जनहित में लिखित निर्देश जारी करने का अधिकार सरकार के पास सुरक्षित रहेगा।
संशोधन की आवश्यकता क्यों?
- आधुनिक आवश्यकता: वर्ष 1959 का पुराना कानून बुनियादी सांख्यिकीय गणनाओं के दौर में बना था। आज का युग डेटा साइंस (Data Science), डेटा माइनिंग, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी सीमांत तकनीकों (Frontier Technologies) का है।
- संस्थान को इन वैश्विक बदलावों के अनुकूल प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए नए विधिक ढांचे की सख्त जरूरत थी।
- व्यावहारिक अनुप्रयोग: पहले अनुसंधान केवल शैक्षणिक सीमाओं तक सीमित था। नया कानून उद्योग (Industry), शिक्षाविदों और सरकार के बीच त्रिपक्षीय सहयोग को बढ़ावा देता है ताकि सांख्यिकीय ज्ञान का व्यावहारिक उपयोग भारत की डेटा-संचालित अर्थव्यवस्था (Data-driven Economy) को मजबूत करने में किया जा सके।
- संस्थागत संरेखण: सरकार आईएसआई (ISI) के प्रशासनिक ढांचे को देश के अन्य शीर्ष राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों—जैसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (IITs) और भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIMs)—के समकक्ष लाना चाहती है। इससे निर्णय लेने की प्रक्रिया में गति आएगी और वित्तीय ऑडिट अधिक पारदर्शी होगा।
स्वायत्तता की चिंताएं:
सरकार का तर्क है कि इससे नौकरशाही के दखल में कमी आएगी (क्योंकि नियमों में संशोधन के लिए हर बार सरकार की पूर्व मंजूरी की आवश्यकता नहीं होगी), संस्थान के कुछ संकायों और छात्रों में यह आशंका है कि बोर्ड में सरकारी नामितों की संख्या बढ़ने से इसकी अकादमिक स्वायत्तता (Academic Autonomy) प्रभावित हो सकती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)
प्रश्न 1: भारतीय सांख्यिकी संस्थान विधेयक, 2026 लोकसभा में कब पेश किया गया?
उत्तर: यह विधेयक केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह द्वारा 3 अगस्त 2026 को संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा (Lok Sabha) में पेश किया गया।
प्रश्न 2: यह विधेयक किस पुराने कानून का स्थान लेगा?
उत्तर: यह नया विधेयक लगभग 67 वर्ष पुराने भारतीय सांख्यिकी संस्थान अधिनियम, 1959 (Indian Statistical Institute Act, 1959) को निरस्त कर प्रतिस्थापित करेगा।
प्रश्न 3: विधेयक के अनुसार भारतीय सांख्यिकी संस्थान (ISI) का विज़िटर कौन होगा?
उत्तर: नए शासन ढांचे के अंतर्गत भारत के राष्ट्रपति संस्थान के आधिकारिक विज़िटर (Visitor) के रूप में काम करेंगे।
प्रश्न 4: इस विधेयक को लाने का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका उद्देश्य संस्थान को डेटा साइंस (Data Science) और आधुनिक तकनीकों के अनुकूल बनाना, वित्तीय सुदृढ़ता देना और उद्योग-अकादमिक सहयोग को बढ़ावा देना है।
प्रश्न 5: क्या इस विधेयक से ISI के मुख्यालय में कोई बदलाव होगा?
उत्तर: नहीं, भारत सरकार ने संसद में स्पष्ट किया है कि कोलकाता से संस्थान के मुख्यालय को कहीं और स्थानांतरित करने का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।
