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भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास INDRA-2026, स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS सह्याद्रि लेगा भाग

भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास INDRA-2026, स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट INS सह्याद्रि लेगा भाग

INDRA-2026 Naval Exercise

संदर्भ:

हाल ही में भारत और रूस के बीच संयुक्त नौसैनिक अभ्यास INDRA-2026 की शुरुआत हुई। यह द्विपक्षीय समुद्री अभ्यास (Bilateral Maritime Exercise) 13 से 18 अक्टूबर 2026 तक रूस के सुदूर पूर्व में स्थित व्लादिवोस्तोक (Vladivostok) के रणनीतिक जलक्षेत्र में आयोजित किया जा रहा है। 

  • इस युद्धाभ्यास में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व भारत का अग्रिम पंक्ति का स्वदेशी गाइडेड-मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्रि (INS Sahyadri) कर रहा है।

अभ्यास INDRA-2026 के बारे में:

  • परिचय: INDRA-2026, भारत और रूस की नौसेनाओं Indian Army और Russian Federation Navy (RuFN) के बीच आयोजित होने वाला एक द्विपक्षीय समुद्री युद्धाभ्यास है।
  • स्थान: इसकी मेजबानी रूस ने व्लादिवोस्तोक में की (बंदरगाह चरण) और इसका संचालन जापान सागर के निकटवर्ती जलक्षेत्र में किया जाएगा (समुद्री चरण)।
  • शुरुआत: भारत और रूस के बीच ‘इंद्रा’ (INDRA) अभ्यास की शुरुआत वर्ष 2003 में एक द्विपक्षीय नौसैनिक अभ्यास के रूप में हुई थी। ‘INDRA’ नाम दोनों देशों के नाम (INDia + RUSSIA) से मिलकर बना है।
    • वर्ष 2017 से इसे और अधिक व्यापक बनाते हुए एक संयुक्त त्रिसेवा अभ्यास (Joint Tri-Services Exercise) में बदल दिया गया।
  • उद्देश्य:
    • अंतःक्रियाशीलता को बढ़ावा (Interoperability): दोनों मित्र नौसेनाओं के बीच परिचालन प्रक्रियाओं, सामरिक समझ और संयुक्त नौसैनिक संचालन (Joint Naval Operations) की क्षमता को उच्चतम स्तर पर ले जाना।
    • समुद्री सुरक्षा और आपदा प्रबंधन: समुद्री डकैती विरोधी अभियानों (Anti-Piracy Operations), खोज और बचाव (SAR) कार्यों तथा हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) से लेकर वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सहयोग तंत्र विकसित करना।
    • उन्नत नौसैनिक युद्ध प्रशिक्षण (Naval Warfare Training): आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक युद्ध, विमान-रोधी गोलाबारी (Anti-Aircraft Firing) और पनडुब्बी-रोधी अभियानों (Anti-Submarine Warfare) के लिए रणनीति साझा करना।
  • विभिन्न चरण: यह छह दिवसीय अभ्यास दो मुख्य चरणों में आयोजित किया जा रहा है:
  • हार्बर चरण (Harbor Phase): व्लादिवोस्तोक बंदरगाह पर आयोजित इस प्रारंभिक चरण में दोनों देशों के नौसैनिक कमांडरों के बीच पेशेवर बातचीत, सामरिक ब्रीफिंग, क्रॉस-डेक दौरे और खेल व सांस्कृतिक आदान-प्रदान शामिल हैं।
  • समुद्री चरण (Sea Phase): यह इस अभ्यास का व्यावहारिक और सबसे कठिन चरण है, जहाँ दोनों नौसेनाएं समुद्र में लाइव-फायरिंग, सामरिक युद्धाभ्यास, हेलीकॉप्टर संचालन और जटिल वायु रक्षा अभ्यासों का प्रत्यक्ष निष्पादन करेंगी।
  • आईएनएस सह्याद्रि (INS Sahyadri): इस अभ्यास में भारतीय नौसेना (Indian Navy Latest News) का गौरव बढ़ा रहा आईएनएस सह्याद्रि (INS Sahyadri Stealth Frigate) भारत की उन्नत रक्षा विनिर्माण क्षमता का प्रतीक है।
  • श्रेणी और निर्माण: आईएनएस सह्याद्रि शिवालिक श्रेणी (Project 17) का तीसरा स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट है। इसका निर्माण मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) द्वारा किया गया है और इसे 21 जुलाई 2012 को भारतीय नौसेना में कमीशन किया गया था।
  • स्टेल्थ विशेषताएं (Stealth Features): इस युद्धपोत को उन्नत रडार-क्रॉस सेक्शन (RCS) रिडक्शन तकनीकों के साथ डिजाइन किया गया है, जो इसे दुश्मन के रडार, इन्फ्रारेड और थर्मल सेंसर की पकड़ में आने से बचाती हैं।
  • हथियार और सेंसर प्रणाली: यह फ्रिगेट सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलों (जैसे ब्रह्मोस/क्लब), लंबी दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों (Barak-1) और पनडुब्बी रोधी रॉकेटों से लैस है। यह भारी हथियारों से लैस एक तैरता हुआ किला है।
  • विमान क्षमता: आईएनएस सह्याद्रि अपने विशाल डेक पर दो बहु-भूमिका वाले पनडुब्बी-रोधी हेलीकॉप्टर (जैसे सी किंग या एएलएच ध्रुव) को तैनात रखने में सक्षम है।

इस अभ्यास का महत्व:

  • रणनीतिक स्वायत्तता का प्रदर्शन (Strategic Autonomy): भारत एक तरफ अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘क्वाड’ (QUAD) और मालाबार युद्धाभ्यास में सक्रिय भागीदारी करता है, तो दूसरी तरफ रूस के साथ ‘इंद्रा’ अभ्यास कर रहा है। यह भारत की स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति का जीवंत प्रमाण है।
  • सुदूर पूर्व (Far East) में भारत की उपस्थिति: व्लादिवोस्तोक में इस अभ्यास का आयोजन भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ (Act East Policy) और रूस के सुदूर पूर्वी क्षेत्र के साथ आर्थिक व रणनीतिक जुड़ाव को रेखांकित करता है।
  • समुद्री डोमेन जागरूकता (MDA): पश्चिमी प्रशांत और सुदूर पूर्वी जलक्षेत्रों में भारतीय युद्धपोतों का संचालन भारतीय नौसेना की वैश्विक पहुँच (Blue Water Navy Capabilities) और रणनीतिक समुद्री जागरूकता को मजबूत करता है।
  • रक्षा प्रौद्योगिकी साझेदारी: हालांकि भारत अपनी रक्षा खरीद का विविधीकरण (Diversification) कर रहा है, लेकिन रूस अभी भी सह-विकास और तकनीकी हस्तांतरण (जैसे ब्रह्मोस और परमाणु पनडुब्बी लीजिंग) में भारत का एक विश्वसनीय रणनीतिक भागीदार (India Russia Strategic Partnership) बना हुआ है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: भारत-रूस नौसैनिक अभ्यास INDRA-2026 क्या है?

उत्तर: यह भारत और रूस की नौसेनाओं के बीच आयोजित होने वाला एक द्विपक्षीय समुद्री युद्धाभ्यास है, जो 13 से 18 अक्टूबर 2026 तक रूस के व्लादिवोस्तोक में संचालित हो रहा है।

प्रश्न 2: INDRA-2026 में भारतीय नौसेना का कौन-सा स्वदेशी युद्धपोत भाग लेगा?

उत्तर: इस अभ्यास में भारतीय नौसेना का प्रतिनिधित्व भारत की अग्रिम पंक्ति का स्वदेशी स्टेल्थ फ्रिगेट आईएनएस सह्याद्रि (INS Sahyadri) कर रहा है।

प्रश्न 3: INS सह्याद्रि की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?

उत्तर: यह शिवालिक श्रेणी (Project 17) का गाइडेड-मिसाइल स्टेल्थ फ्रिगेट है, जो रडार से बचने की क्षमता (Stealth Property), आधुनिक एंटी-शिप मिसाइलों और पनडुब्बी-रोधी लड़ाकू प्रणालियों से लैस है।

प्रश्न 4: भारत और रूस के बीच INDRA नौसैनिक अभ्यास का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य दोनों नौसेनाओं के बीच परिचालन अंतःक्रियाशीलता (Interoperability) बढ़ाना, समुद्री सुरक्षा सहयोग सुदृढ़ करना और संयुक्त समुद्री ऑपरेशनों (Joint Naval Operations) का लाइव प्रशिक्षण लेना है।

प्रश्न 5: INDRA-2026 दोनों देशों के रक्षा संबंधों को कैसे मजबूत करेगा?

उत्तर: यह युद्धाभ्यास बदलते वैश्विक परिदृश्य में दोनों देशों के बीच पारंपरिक सैन्य विश्वास को बहाल रखता है और हिंद-प्रशांत व वैश्विक समुद्री मार्गों की सुरक्षा पर रणनीतिक समझ को गहरा करता है।

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