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तीसरा पनडुब्बी रोधी जलयान “INS Mangrol” भारतीय नौसेना को सौंपा गया

तीसरा पनडुब्बी रोधी जलयान “INS Mangrol” भारतीय नौसेना को सौंपा गया

INS Mangrol

संदर्भ:

हाल ही में कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) ने पूर्णतः स्वदेशी तकनीकों से निर्मित तीसरा पनडुब्बी रोधी जलयान ‘मैंग्रोल’ (INS Mangrol) आधिकारिक तौर पर भारतीय नौसेना (Indian Navy) को सौंपा।

पनडुब्बी रोधी जलयान “INS Mangrol” के बारे मे:

  • परिचय: ‘मैंग्रोल’ भारतीय नौसेना का एक उन्नत पनडुब्बी रोधी उथले जल का पोत (Anti Submarine Warfare Shallow Water Craft – ASW SWC) है. यह नौसेना की ‘माहे श्रेणी’ (Mahe Class) के अंतर्गत आता है और तटीय जलक्षेत्रों में दुश्मनों की पनडुब्बियों का शिकार करने के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है. 
  • निर्माणकर्ता: इसका डिजाइन और निर्माण रक्षा मंत्रालय (Defence Ministry India) के तहत कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि द्वारा स्वदेशी रूप से किया गया है. 
  • प्रोजेक्ट विवरण: यह सीएसएल (CSL) द्वारा बनाए जा रहे कुल आठ ASW-SWC जहाजों की श्रृंखला में तीसरा जलयान है.
    • इसके पहले दो जहाजों (जैसे INS माहे और INS मालवन) को पहले ही शामिल किया जा चुका है.
  • नामकरण का इतिहास: इसका नाम गुजरात के जूनागढ़ जिले में स्थित ऐतिहासिक तटीय शहर और प्रमुख मत्स्य पालन बंदरगाह ‘मैंग्रोल’ के नाम पर रखा गया है.
    • यह वर्ष 2004 तक सेवा में रहे पूर्ववर्ती माइंसविपर पोत ‘आईएनएस मैंग्रोल’ की विरासत को आगे बढ़ाता है. 
  • स्वदेशीकरण: इस युद्धपोत के निर्माण में 80 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री (Indigenous Content) का उपयोग किया गया है।
    • यह परियोजना भारत सरकार के ‘मेक इन इंडिया’ और आत्मनिर्भर भारत विज़न के तहत वित्तीय सहयोग से संचालित है.
  • वॉटरजेट प्रणोदन प्रणाली (Waterjet Propulsion): पारंपरिक प्रोपेलर (पंखों) के स्थान पर यह जहाज आधुनिक वॉटरजेट तकनीक से संचालित होता है. यह पानी को नीचे से खींचकर तीव्र गति से पीछे छोड़ता है, जिससे जहाज के भीतर का शोर (Underwater Noise) बेहद कम हो जाता है और दुश्मन की पनडुब्बियां इसका पता नहीं लगा पातीं.
  • गति और परिचालन क्षमता: इसकी अधिकतम गति 25 नॉट (Knots) है और यह उथले तटीय जलक्षेत्रों में अत्यधिक गतिशील (Highly Maneuverable) है. 
  • सोनार और रडार प्रणाली (Sensors Suite): यह पानी के नीचे निगरानी (Underwater Reconnaissance) के लिए डीआरडीओ द्वारा विकसित ‘अभय’ कॉम्पैक्ट हल-माउंटेड सोनार और लो-फ्रीक्वेंसी वेरिएबल डेप्थ सोनार से लैस है.
  • अत्याधुनिक हथियार प्रणाली (Weapons Suite):
    • रॉकेट लॉन्चर: अग्रिम हिस्से में स्वदेशी पनडुब्बी रोधी रॉकेट लॉन्चर (RBU-6000) स्थापित है.
    • टॉर्पीडो: यह पनडुब्बियों को नष्ट करने के लिए उन्नत हल्के वजन वाले टॉर्पीडो लॉन्चरों से सुसज्जित है.
    • माइन वारफेयर: इसमें बारूदी सुरंगें (Mines) बिछाने और उन्हें नष्ट करने के लिए विशेष रेल प्रणालियां दी गई हैं.

इसका महत्व:

  • उथले पानी में शिकारी क्षमता (ASW Capability): गहरे समुद्र की तुलना में तटीय और उथले पानी (Shallow Waters) में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाना सबसे कठिन होता है. यह लड़ाकू जलयान इसी कमी को दूर करने के लिए बनाया गया है.
  • हिंद महासागर में चीनी घुसपैठ पर लगाम: हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में विदेशी और विशेषकर चीनी पनडुब्बियों की बढ़ती आवाजाही को देखते हुए, यह पोत भारत के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) और तटीय सीमाओं की चौबीसों घंटे निगरानी सुनिश्चित करेगा.
  • कम तीव्रता वाले समुद्री अभियान (LIMO): पनडुब्बी रोधी युद्ध के अलावा, यह खोजी और बचाव अभियानों (SAR) तथा निम्न-तीव्रता वाले समुद्री संघर्षों में त्वरित कार्रवाई करने में सक्षम है.
  • सागर विजन (SAGAR Vision): यह भारत की ‘सिक्योरिटी एंड ग्रोथ फॉर ऑल इन द रीजन’ (SAGAR) नीति के अनुरूप क्षेत्रीय सुरक्षा प्रदाता (Net Security Provider) की भूमिका को मजबूत करता है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: INS Mangrol क्या है?

उत्तर: यह भारतीय नौसेना का एक स्वदेशी पनडुब्बी रोधी उथले जल का युद्धपोत (ASW SWC) है, जिसे तटीय सुरक्षा के लिए बनाया गया है.

प्रश्न 2: तीसरा Anti-Submarine Warfare Vessel ‘Mangrol’ भारतीय नौसेना को कब सौंपा गया?

उत्तर: कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड द्वारा निर्मित इस तीसरे स्वदेशी लड़ाकू जलयान को 21 अगस्त 2026 को आधिकारिक रूप से नौसेना को सौंपा गया. 

प्रश्न 3: INS Mangrol का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य भारत के तटीय इलाकों में पानी के भीतर निगरानी रखना, बारूदी सुरंगों से बचाव करना और दुश्मन की गतिविधियों को रोकना है.

प्रश्न 4: Anti-Submarine Warfare Vessel क्या होता है?

उत्तर: यह विशेष रूप से डिजाइन किए गए छोटे और तेज गति वाले युद्धपोत होते हैं, जो समुद्र में छिपी दुश्मन की पनडुब्बियों (Submarines) को ढूंढकर उन्हें नष्ट करने की क्षमता रखते हैं.

प्रश्न 5: INS Mangrol किस तरह की Submarines का पता लगाने में मदद करेगा?

उत्तर: यह अपने उन्नत सोनार और रडार प्रणालियों की मदद से उथले तटीय पानी में छिपी बेहद शांत और आधुनिक पनडुब्बियों का भी आसानी से पता लगा सकता है.

प्रश्न 6: Mangrol Vessel किस भारतीय Shipyard ने बनाया है?

उत्तर: इस 80% से अधिक स्वदेशी घटकों वाले पोत का निर्माण कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL), कोच्चि द्वारा किया गया है.

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