Interest Subsidy under Export Promotion Scheme of RBI
संदर्भ:
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने जनवरी 2026 में ‘निर्यात प्रोत्साहन’ (NIRYAT PROTSAHAN) योजना के तहत निर्यात ऋण पर ब्याज सहायता के लिए नए परिचालन दिशानिर्देश जारी किए हैं। इसे सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए शुरू किया गया है।
मुख्य विशेषताएं:
- ब्याज सहायता दर: पात्र MSME निर्यातकों को पूर्व-शिपमेंट (Pre-shipment) और शिपमेंट के बाद (Post-shipment) रुपये में लिए गए निर्यात ऋण पर 2.75% प्रति वर्ष की ब्याज सहायता मिलेगी।
- वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए सीमा: प्रत्येक निर्यातक (IEC कोड के अनुसार) के लिए अधिकतम लाभ की सीमा ₹50 लाख तय की गई है।
- प्रभावी तिथि: यह योजना 2 जनवरी 2026 को या उसके बाद मंजूर किए गए निर्यात ऋण पर लागू होगी।
पात्रता और कवरेज:
- पात्र संस्थाएं: सभी MSME निर्माता निर्यातक और मर्चेंट निर्यातक जिनके पास वैध आयातक-निर्यात कोड (IEC) और उद्यम पंजीकरण संख्या (URN) है।
- सकारात्मक सूची (Positive List): लाभ केवल विशिष्ट ‘पॉजिटिव लिस्ट’ में शामिल उत्पादों पर ही मिलेगा, जिसमें लगभग 75% टैरिफ लाइनें (लगभग 728 उत्पाद समूह) शामिल हैं।
- श्रम-प्रधान क्षेत्र: इस सूची में मुख्य रूप से कपड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पादों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गई है।
- अपवर्जन (Exclusions): ‘डीम्ड एक्सपोर्ट्स’ (Deemed Exports) और एनपीए (NPA) घोषित हो चुके खातों को इस योजना से बाहर रखा गया है।
परिचालन प्रक्रिया:
- बैंकों की भूमिका: पात्र बैंकों (अनुसूचित वाणिज्यिक बैंक, सहकारी बैंक और अखिल भारतीय वित्तीय संस्थान) को निर्देश दिया गया है कि वे निर्यातकों को ब्याज में छूट का लाभ अग्रिम (Upfront) रूप से प्रदान करें।
- डिजिटल दावा प्रक्रिया: बैंकों को ब्याज सहायता की प्रतिपूर्ति के लिए हर महीने डिजिटल पोर्टल के माध्यम से आरबीआई को दावा जमा करना होगा। किसी भी प्रकार की मैन्युअल फाइलिंग की अनुमति नहीं है।
- संशोधित दिशानिर्देश: डीजीएफटी (DGFT) ने स्पष्ट किया है कि यदि कोई निर्यातक वित्त वर्ष के दौरान उच्च श्रेणी (जैसे लघु से मध्यम) में स्नातक होता है, तो वह MSME मानदंडों के तहत 3 साल तक लाभ का पात्र बना रहेगा।
निर्यात प्रोत्साहन मिशन (Export Promotion Mission – EPM):
- यह मिशन ₹25,060 करोड़ के कुल परिव्यय के साथ वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक के लिए स्वीकृत किया गया है। इसके दो प्रमुख स्तंभ हैं:
- निर्यात प्रोत्साहन (NIRYAT PROTSAHAN): वित्तीय सहायता जैसे ब्याज सुब्वेंशन और ऋण गारंटी पर केंद्रित है।
- निर्यात दिशा (NIRYAT DISHA): गैर-वित्तीय सहायता जैसे ब्रांडिंग, गुणवत्ता प्रमाणन और रसद (Logistics) पर ध्यान देता है।
महत्व:
- क्रेडिट लागत में कमी: भारतीय निर्यातकों के लिए पूंजी की लागत अक्सर चीन या वियतनाम जैसे प्रतिस्पर्धियों की तुलना में अधिक होती है।
- MSME सशक्तिकरण: MSMEs भारत के कुल निर्यात में लगभग 45% का योगदान करते हैं। यह योजना उन्हें वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करने के लिए आवश्यक तरलता प्रदान करती है।
- पारदर्शिता: पूर्णतः डिजिटल पोर्टल और डेटा-संचालित सकारात्मक सूची के माध्यम से ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ को बढ़ावा मिलता है।

