International Day for the Eradication of Poverty: परिचय, शुरुआत, थीम एवं महत्व
संदर्भ:
प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को विश्व भर में अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस (International Day for the Eradication of Poverty) मनाया जाता है।
अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस के बारे में:
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर गरीबी के बहुआयामी रूपों के प्रति जागरूकता बढ़ाना और समाज के सबसे कमजोर तबके के साथ सक्रिय संवाद स्थापित करना है।
- शुरुआत (17 अक्टूबर 1987): इस दिवस की परिकल्पना का श्रेय फ्रांस के मानवीय कार्यकर्ता और ‘एटीडी फोर्थ वर्ल्ड’ (ATD Fourth World) के संस्थापक फादर जोसेफ व्रेसिंस्की (Father Joseph Wresinski) को जाता है।
- 17 अक्टूबर 1987 को उनके आह्वान पर पेरिस (फ्रांस) के ट्रोकाडेरो (Trocadéro) मैदान में 1 लाख से अधिक लोग एकत्रित हुए थे। यह वही ऐतिहासिक स्थान है जहाँ 1948 में ‘मानवाधिकारों की सार्वभौमिक घोषणा’ पर हस्ताक्षर किए गए थे।
- इस सभा में अत्यधिक गरीबी, भूख और हिंसा के शिकार लोगों को श्रद्धांजलि दी गई तथा गरीबी को मानवाधिकारों का उल्लंघन घोषित किया गया।
- संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक घोषणा (1992): इस जन-आंदोलन की वैश्विक प्रासंगिकता को देखते हुए, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने 22 दिसंबर 1992 को प्रस्ताव 47/196 पारित किया।
- इस प्रस्ताव के माध्यम से प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को आधिकारिक रूप से ‘अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस’ (UN International Observance Days) के रूप में घोषित किया गया।
- Poverty Eradication Day Theme 2026: संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2026 से 2028 तक के लिए अम्ब्रेला थीम (बहु-वर्षीय ढांचा) निर्धारित की है, जिसके तहत प्रत्येक वर्ष एक विशेष उप-थीम पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा:
- व्यापक अम्ब्रेला थीम (2026–2028): “शांति और मानवाधिकारों के लिए एकजुट” (United for Peace and Human Rights)
- वर्ष 2026 का मुख्य फोकस (2026 Focus):“सभी के लिए सुरक्षित घर” (Safe Homes for All)
- संयुक्त राष्ट्र (United Nations) के अनुसार, वर्तमान में दुनिया भर में 2.8 अरब से अधिक लोग किसी न किसी रूप में अपर्याप्त या असुरक्षित आवास की समस्या का सामना कर रहे हैं। यह थीम यह रेखांकित करती है कि एक सुरक्षित और स्थिर घर के बिना, किसी भी व्यक्ति के लिए स्वास्थ्य सेवा, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, सम्मानजनक रोजगार और सामाजिक भागीदारी सुनिश्चित करना लगभग असंभव है।
गरीबी का बहुआयामी स्वरूप और वैश्विक सांख्यिकी:
सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals Poverty) के तहत SDG 1 (No Poverty) का लक्ष्य वर्ष 2030 तक दुनिया से गरीबी का पूर्ण उन्मूलन करना है। हालांकि, वर्तमान वैश्विक चुनौतियां इस लक्ष्य की राह में बाधा बनी हुई हैं:
- सिर्फ आय की कमी नहीं: संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, गरीबी एक बहुआयामी घटना (Multidimensional Phenomenon) है। इसमें कुपोषण, स्वच्छ पेयजल की अनुपलब्धता, सुरक्षित आवास का अभाव, सामाजिक बहिष्कार, बिजली की कमी और नीति-निर्माण में राजनीतिक शक्ति का न होना शामिल है।
- वैश्विक आंकड़े: महामारी, जलवायु परिवर्तन और बढ़ते सशस्त्र संघर्षों के कारण वैश्विक स्तर पर अत्यधिक गरीबी (Extreme Poverty) से जूझ रहे लोगों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। विश्व बैंक के अनुसार, दुनिया की लगभग 10% आबादी अभी भी अत्यंत विषम परिस्थितियों में जीवन यापन कर रही है।
- भारत में गरीबी की स्थिति:
- अत्यधिक गरीबी में गिरावट: विश्व बैंक और नीति आयोग के संशोधित अनुमानों के अनुसार, भारत में अत्यधिक गरीबी की दर (प्रतिदिन $2.15 क्रय शक्ति समता पर आधारित) में वर्ष 2011-12 (16.2%) की तुलना में भारी गिरावट आई है।
- बहुआयामी गरीबी सूचकांक (MPI): नीति आयोग के ‘राष्ट्रीय बहुआयामी गरीबी सूचकांक’ के अनुसार, भारत ने पिछले एक दशक में करोड़ों लोगों को बहुआयामी गरीबी के जाल से बाहर निकाला है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों ने सबसे बेहतर प्रदर्शन किया है।
- भारत के प्रमुख गरीबी उन्मूलन कार्यक्रम (Poverty Alleviation Programmes India):
- आवास सुरक्षा: प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY – शहरी व ग्रामीण) के तहत करोड़ों निर्धन परिवारों को पक्के और सुरक्षित घर उपलब्ध कराए गए हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के ‘Safe Homes for All’ के एजेंडे को प्रत्यक्ष रूप से पूरा करता है।
- खाद्य सुरक्षा: प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) के माध्यम से 80 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त खाद्यान्न सुनिश्चित किया जा रहा है।
- रोजगार गारंटी: महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए दुनिया का सबसे बड़ा प्रत्यक्ष रोजगार कार्यक्रम है।
- वित्तीय समावेशन: प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) ने बिचौलियों को समाप्त कर वित्तीय सहायता सीधे गरीबों के खातों तक पहुंचाई है।
- स्वास्थ्य और सुरक्षा: आयुष्मान भारत (PM-JAY) के तहत गरीब परिवारों को ₹5 लाख तक का मुफ्त स्वास्थ्य बीमा प्रदान कर उन्हें चिकित्सा खर्च के कारण दोबारा गरीबी के गर्त में जाने से बचाया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. International Day for the Eradication of Poverty कब मनाया जाता है?
Ans: यह दिवस प्रतिवर्ष 17 अक्टूबर को दुनिया भर में आधिकारिक रूप से मनाया जाता है।
Q2. अंतर्राष्ट्रीय गरीबी उन्मूलन दिवस की शुरुआत कब और कैसे हुई?
Ans: इसकी शुरुआत 17 अक्टूबर 1987 को फ्रांस के पेरिस में फादर जोसेफ व्रेसिंस्की के नेतृत्व में आयोजित एक विशाल जन-प्रदर्शन से हुई थी, जहां 1 लाख से अधिक लोगों ने गरीबी के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित की थी।
Q3. Poverty Eradication Day 2026 की थीम क्या है?
Ans: वर्ष 2026 की थीम “शांति और मानवाधिकारों के लिए एकजुट: सभी के लिए सुरक्षित घर” (United for Peace and Human Rights: Safe Homes for All) है।
Q4. संयुक्त राष्ट्र ने 17 अक्टूबर को गरीबी उन्मूलन दिवस के रूप में क्यों चुना?
Ans: 17 अक्टूबर 1987 को पेरिस में हुए ऐतिहासिक जन-आंदोलन और मानवाधिकारों के प्रति प्रतिबद्धता को सम्मान देने के लिए संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 1992 में इस तारीख को आधिकारिक रूप से चुना था।
Q5. गरीबी उन्मूलन दिवस का मुख्य उद्देश्य और महत्व क्या है?
Ans: इसका मुख्य उद्देश्य वैश्विक स्तर पर गरीबी के बहुआयामी रूपों के प्रति जागरूकता बढ़ाना, गरीबों के मानवाधिकारों की रक्षा करना और समाज के सबसे कमजोर तबके के साथ सक्रिय संवाद स्थापित करना है।
