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ISRO का EOS-05 GISAT-1A Satellite लॉन्च के लिए तैयार, इसे क्यों कहा जा रहा है भारत की ‘तीसरी आंख’?

ISRO का EOS-05 GISAT-1A Satellite लॉन्च के लिए तैयार, इसे क्यों कहा जा रहा है भारत की ‘तीसरी आंख’?

ISRO EOS-05 GISAT-1A

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने अपने सबसे महत्वाकांक्षी भू-प्रेक्षण उपग्रह EOS-05 GISAT-1A Satellite को प्रक्षेपण के लिए पूरी तरह तैयार कर लिया है। इसे अंतरिक्ष में भारत की ‘तीसरी आंख’ (Third Eye) कहा जा रहा है।

EOS-05 GISAT-1A Satellite के बारे में:

  • नामकरण: इस अत्याधुनिक उपग्रह को अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट-05 (EOS-05) कहा गया है, जिसे पूर्व में जियो इमेजिंग सैटेलाइट-1A (GISAT-1A Satellite) के रूप में नामित किया गया था। 
  • श्रेणी: यह भारत का पहला ऐसा अत्याधुनिक भू-प्रेक्षण उपग्रह (Earth Observation Satellite) है, जिसे पृथ्वी की निचली कक्षा (LEO) के बजाय सीधे उच्च-ऊर्जा वाली जियोसिंक्रोनस कक्षा (Geosynchronous Orbit) में स्थापित किया जा रहा है। 
  • निर्माणकर्ता: इसे पूरी तरह से भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (Indian Space Research Organisation – ISRO) द्वारा स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया है। 
  • विशेषताएं:
    • वजन (Launch Mass): उपग्रह का कुल लिफ्ट-ऑफ वजन लगभग 2,367 किलोग्राम (लगभग 2.3 टन) है।
    • सैटेलाइट बस (Spacecraft Bus): यह इसरो के मानक I-2K (I-2000) बस प्लेटफॉर्म पर आधारित है, जो इसे अंतरिक्ष में स्थिरता और दीर्घकालिक बिजली आपूर्ति प्रदान करता है।
    • मुख्य पेलोड्स (Payloads/Cameras): इसमें बादलों को चीरकर देखने की क्षमता वाले मल्टी-स्पेक्ट्रल (Multi-spectral), हाइपर-स्पेक्ट्रल (Hyper-spectral) और विजिबल नियर-इन्फ्रारेड (VNIR) कैमरे लगाए गए हैं। 
  • लॉन्चिंग:
    • लॉन्च तिथि: उपग्रह का प्रक्षेपण 4 सितंबर 2026 को निर्धारित किया गया है।
    • प्रक्षेपण स्थल: आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (SDSC-SHAR) का द्वितीय लॉन्च पैड (Second Launch Pad)।
    • प्रक्षेपण यान (Rocket): इसे इसरो के भारी-भरकम रॉकेट GSLV-F17 (GSLV Mk II) द्वारा उप-जियोसिंक्रोनस ट्रांसफर कक्षा (Sub-GTO) में भेजा जाएगा, जहाँ से उपग्रह अपने ऑनबोर्ड प्रोपल्शन सिस्टम का उपयोग करके लगभग 36,000 किमी की ऊंचाई पर स्थित भू-स्थिर कक्षा में पहुँचेगा।
  • लक्ष्य: यह उपग्रह वर्ष 2021 में विफल हुए GISAT-1 (EOS-03) मिशन का प्रत्यक्ष उत्तराधिकारी है, जिसे तीसरे क्रायोजेनिक चरण में खराबी के कारण खो दिया गया था।

इसे भारत की ‘तीसरी आंख’ क्यों कहा जा रहा है?

इस उपग्रह की असाधारण क्षमताओं के कारण इसे भारत की ‘तीसरी आंख’ (EOS-05 Third Eye of India) या ‘आसमानी आंख’ का खिताब दिया गया है: 

  • निरंतर निगरानी (Continuous Imaging): सामान्य सुदूर संवेदन उपग्रह (Remote Sensing Satellites) पृथ्वी का चक्कर लगाते हुए किसी स्थान की तस्वीर कुछ दिनों के अंतराल पर लेते हैं। इसके विपरीत, EOS-05 भू-स्थिर कक्षा में होने के कारण चौबीसों घंटे भारत और उसके आस-पास के क्षेत्रों पर स्थिर रहेगा।
  • रीयल-टाइम डेटा वितरण: यह भारतीय उपमहाद्वीप की हर 30 मिनट में एक पूर्ण तस्वीर और किसी विशेष प्राथमिकता वाले संवेदनशील क्षेत्र (Priority Target) की हर 5 मिनट में नई तस्वीरें (Near Real-Time Observations) भेजने का कार्य करेगा।
  • अविराम और अभेद्य दृष्टि: यह उपग्रह बादलों के आवरण को भेदकर पृथ्वी की सतह को देखने की क्षमता रखता है। 36,000 किलोमीटर की विशाल ऊंचाई से यह बिना पलक झपकाए भारतीय सीमाओं पर होने वाली हर छोटी-बड़ी रणनीतिक हलचल को रिकॉर्ड कर सकता है।

भारत के लिए इसका महत्व:

  • सटीक आपदा प्रबंधन (Disaster Management): चक्रवात (Cyclones), अचानक आई बाढ़ (Floods), क्लाउडबर्स्ट (Cloudbursts) और जंगलों की आग (Forest Fires) जैसी तेजी से विकसित होने वाली प्राकृतिक आपदाओं की रीयल-टाइम मॉनिटरिंग संभव होगी। इससे समय रहते नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर पहुँचाया जा सकेगा।
  • राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमा चौकसी (National Security & Border Vigilance): यद्यपि यह मुख्य रूप से एक नागरिक उपग्रह है, लेकिन इसकी त्वरित और उच्च-आवृत्ति इमेजिंग क्षमताएं सशस्त्र बलों (Armed Forces) के लिए गेम-चेंजर होंगी। यह वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) और नियंत्रण रेखा (LoC) पर घुसपैठ की कोशिशों को तुरंत पकड़ सकता है।
  • कृषि और पर्यावरण योजना (Agriculture and Forestry): फसलों के स्वास्थ्य का आकलन, सूखे की स्थिति का पूर्वानुमान, जल निकायों की निगरानी और देश के हरित आवरण (Green Cover) में हो रहे बदलावों का सटीक डेटा इसके माध्यम से मिलेगा।
  • इसरो की मजबूत वापसी (ISRO’s Big Comeback): पिछले कुछ महीनों में पीएसएलवी (PSLV) और अन्य मिशनों में मिले आंशिक झटकों के बाद, यह भारी-भरकम GSLV-F17 मिशन इसरो के तकनीकी लचीलेपन और जटिल क्रायोजेनिक प्रणालियों (Cryogenic Propulsion Technology) पर उसकी महारत को वैश्विक मंच पर साबित करेगा। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: EOS-05 (GISAT-1A) Satellite क्या है?

उत्तर: यह इसरो द्वारा विकसित भारत का पहला अत्याधुनिक जियो-इमेजिंग भू-प्रेक्षण उपग्रह (Geo-Imaging Earth Observation Satellite) है। 

प्रश्न 2: EOS-05 को भारत की ‘Third Eye’ क्यों कहा जा रहा है?

उत्तर: क्योंकि यह 36,000 किमी की ऊंचाई से निरंतर, बिना रुके भारतीय उपमहाद्वीप पर पैनी नजर रखेगा और हर 5 से 30 मिनट में लाइव तस्वीरें दे सकता है।

प्रश्न 3: GISAT-1A Satellite का Launch कब होगा?

उत्तर: इस उपग्रह का प्रक्षेपण 4 सितंबर 2026 को श्रीहरिकोटा के सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से निर्धारित है।

प्रश्न 4: EOS-05 Satellite को किसने विकसित किया है?

उत्तर: इस 2,367 किलोग्राम वजनी अत्याधुनिक उपग्रह को पूरी तरह से ISRO द्वारा स्वदेशी तकनीकों से निर्मित किया गया है।

प्रश्न 5: EOS-05 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य आपदा प्रबंधन (Disaster Warning), चक्रवात ट्रैकिंग, कृषि अवसंरचना की निगरानी और राष्ट्रीय सुरक्षा में सहायता करना है। 

प्रश्न 6: Earth Observation Satellite क्या होता है?

उत्तर: ऐसे उपग्रह जो अंतरिक्ष से पृथ्वी की सतह, वायुमंडल, महासागरों और मौसम के पैटर्न की तस्वीरें और वैज्ञानिक डेटा एकत्र करते हैं।

प्रश्न 7: EOS-05 भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह भारत को उप-नैनोसेकंड स्तर और त्वरित रीयल-टाइम इमेजिंग क्षमता देकर मौसम विज्ञान, कृषि योजना और रणनीतिक रक्षा प्रणालियों को आत्मनिर्भर बनाता है।

प्रश्न 8: GISAT-1A से भारत को किस तरह की तस्वीरें और जानकारी मिलेगी?

उत्तर: इससे उच्च-रिजॉल्यूशन वाली मल्टी-स्पेक्ट्रल और हाइपर-स्पेक्ट्रल तस्वीरें मिलेंगी, जिससे बादलों के होने पर भी धरातल की सटीक भौगोलिक स्थिति जांची जा सकेगी।

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