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स्वदेशी ग्लाइड बम ‘Khagantak-243’ का सफल परीक्षण, इसमें स्टैंड-ऑफ वेपन की खासियत

स्वदेशी ग्लाइड बम ‘Khagantak-243’ का सफल परीक्षण, इसमें स्टैंड-ऑफ वेपन की खासियत

Khagantak-243 Glide Bomb

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय वायु सेना (Indian Air Force – IAF) ने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित लंबी दूरी के ग्लाइड बम ‘खगंतक-243’ (Khagantak-243 Glide Bomb) का पहला सफल ड्रॉप परीक्षण (Maiden Drop Test) पूरा किया। 

खगंतक-243 ग्लाइड बम क्या है?

  • परिचय: यह एक ‘स्मार्ट वेपन’ (Smart Weapon) है, जो विमान से मुक्त होने के बाद बिना किसी इंजन या सतत प्रणोदन (Propulsion) के, केवल अपने पंखों और वायुगतिकीय लिफ्ट (Aerodynamic Lift) के सहारे लक्ष्य की ओर बढ़ता है।
  • श्रेणी: यह 300 किलोग्राम वर्ग का हवा से गिराया जाने वाला, लंबी दूरी का, स्टैंड-ऑफ प्रिसिजन-गाइडेड ग्लाइड बम (Airborne Long-Range Stand-Off Precision-Guided Glide Bomb) है। 
  • निर्माणकर्ता: इसका विकास निजी-सार्वजनिक भागीदारी (PPP Model) के तहत किया गया है।
    • इसे नागपुर स्थित निजी क्षेत्र के स्टार्टअप जेएसआर डायनेमिक्स (JSR Dynamics) और सार्वजनिक क्षेत्र की नवरत्न कंपनी भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (Bharat Electronics Limited – BEL) ने संयुक्त रूप से विकसित किया है। 
  • सफल परीक्षण:
    • परीक्षण तिथि: 2 सितंबर 2026
    • लॉन्च प्लेटफॉर्म: इस परीक्षण के लिए भारतीय वायु सेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई Su-30MKI का उपयोग किया गया।
    • सफलताएं: परीक्षण के दौरान सुखोई विमान से बम को ड्रॉप किया गया, जिसने हवा में अपने पंख फैलाकर (Mid-glide) योजनाबद्ध तरीके से नेविगेट किया और पूर्व-निर्धारित लक्ष्य पर अत्यंत सटीक प्रहार (Detonation) कर सभी मिशन उद्देश्यों को 100% पूरा किया। 
  • विशेषताएं:
    • शारीरिक संरचना (Design): इसमें एक बेलनाकार बॉडी (Cylindrical Body), बीच में घूमने वाले ग्लाइड विंग्स (Swivel-type Mid-body Glide Wings) और पूंछ की तरफ पांच नियंत्रण सतहें (Five Aft Control Surfaces) दी गई हैं।
    • मारक क्षमता (Warhead): यह Mk-81 जनरल-पर्पज ब्लास्ट-फ्रेगमेंटेशन वारहेड से लैस है, जिसमें 125 किलोग्राम विस्फोटक सामग्री भरी होती है।
    • ऑपरेटिंग रेंज (Range): जब इसे लगभग 12,000 मीटर (12 किमी) की ऊंचाई से 0.8 मैक (Mach 0.8) की गति पर छोड़ा जाता है, तो यह 144 किमी से 180 किमी तक की दूरी तय कर सकता है।
    • मार्गदर्शन प्रणाली (Guidance System): यह मिड-कोर्स नेविगेशन के लिए इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम (INS) और जैमिंग-प्रतिरोधी मल्टी-जीएनएसएस (Satellite Navigation) का उपयोग करता है, जिससे यह जीपीएस-मुक्त या इलेक्ट्रॉनिक युद्ध वाले क्षेत्रों में भी सटीक काम करता है।
      • अंतिम चरण (Terminal Guidance) के लिए इसमें इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल (EO/IR) या पैसिव होमिंग हेड सीकर लगाए जा सकते हैं।
    • पर्यावरणीय अनुकूलता: यह -40°C से +70°C के अत्यधिक तापमान में काम करने में सक्षम है और सैन्य मानक MIL-STD-1760 के अनुरूप है।

स्टैंड-ऑफ और प्रिसिजन-गाइडेड तकनीक: कार्यप्रणाली:

  • स्टैंड-ऑफ वेपन (Stand-off Weapon India) वह हथियार है जिसे दुश्मन की वायु रक्षा प्रणालियों (Air Defence Systems) की मारक सीमा से बाहर सुरक्षित दूरी पर रहकर लॉन्च किया जा सकता है।
    • 140+ किमी से अधिक की रेंज होने के कारण, सुखोई विमान को दुश्मन के हवाई क्षेत्र या मिसाइल रडार ज़ोन में प्रवेश नहीं करना पड़ता। 
    • विमान सुरक्षित दूरी से बम दागकर वापस लौट सकता है, जिससे विमान और पायलट दोनों की उत्तरजीविता (Survivability) अत्यधिक बढ़ जाती है।
  • पारंपरिक बम (Conventional Bombs) पूरी तरह से गुरुत्वाकर्षण (Gravity) पर निर्भर बैलिस्टिक पथ का अनुसरण करते हैं।
    • इन्हें दागने के लिए लड़ाकू विमान को ठीक लक्ष्य के ऊपर या उसके बहुत करीब से उड़ान भरनी पड़ती है, जिससे विमान पर दुश्मन की एंटी-एयरक्राफ्ट गन या कम दूरी की मिसाइलों (जैसे स्टिंगर मिसाइल) का खतरा मंडराता रहता है।
  • ग्लाइड बम तकनीक में बम के विमान से अलग होते ही इसके ‘स्विवल विंग्स’ खुल जाते हैं। यह विमान की शुरुआती गति और ऊंचाई का उपयोग करके हवा की धाराओं पर तैरते हुए (Gliding) एक एयरोडायनामिक उड़ान भरता है। इसके ऑन-बोर्ड कंप्यूटर और कंट्रोल सरफेस हवा में इसके पथ को लगातार ठीक करते रहते हैं।
    • खगंतक-243 अपनी ऑन-बोर्ड कंप्यूटर गाइडेंस के कारण एक प्रिसिजन स्ट्राइक वेपन (Precision Strike Weapon) है। उपग्रहों और आंतरिक सेंसर (INS) से मिले डेटा का मिलान करके यह हवा में अपनी दिशा बदल सकता है। 
    • यदि दुश्मन अपनी पोजीशन बदलता है या हवा का दबाव मार्ग भटकाता है, तो इसके पिछले पंख (Aft Control Surfaces) मुड़कर बम को सटीक पिन-पॉइंट टारगेट पर हिट कराते हैं। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Khagantak-243 glide bomb क्या है और इसका सफल परीक्षण क्यों महत्वपूर्ण है?

उत्तर: यह 300 किलोग्राम श्रेणी का स्वदेशी स्मार्ट ग्लाइड बम है। इसका परीक्षण भारतीय वायु सेना की बिना दुश्मन के रडार में आए पिन-पॉइंट हमला करने की क्षमता को प्रमाणित करता है। 

प्रश्न 2: indigenous glide bomb technology भारत की defence capabilities को कैसे मजबूत करती है?

उत्तर: यह तकनीक भारत को कम लागत में अत्यधिक सटीक हवाई हमले (Precision Strike) करने की क्षमता देती है और महत्वपूर्ण हथियारों के लिए विदेशी आयात पर निर्भरता घटाती है।

प्रश्न 3: Khagantak-243 को stand-off weapon क्यों कहा जाता है?

उत्तर: क्योंकि इसे दुश्मन की हवाई सुरक्षा रेंज से बाहर (Stand-off distance), लगभग 140 से 180 किमी की सुरक्षित दूरी से लॉन्च किया जा सकता है।

प्रश्न 4: stand-off weapon India की क्या खासियत है और यह conventional weapons से कैसे अलग है?

उत्तर: पारंपरिक बम गुरुत्वाकर्षण से सीधे नीचे गिरते हैं, जबकि यह स्टैंड-ऑफ ग्लाइड बम हवा में तैरते हुए लंबी दूरी तय करता है, जिससे लड़ाकू विमान सुरक्षित रहता है। 

प्रश्न 5: precision guided weapon क्या होता है और Khagantak-243 में इसका क्या महत्व है?

उत्तर: यह तकनीक कंप्यूटर, उपग्रह और आंतरिक सेंसरों की मदद से लक्ष्य पर सटीक निशाना साधती है। खगंतक-243 जैमिंग-प्रतिरोधी नेविगेशन से विपरीत परिस्थितियों में भी अचूक निशाना लगाता है।

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