Kigali Amendment के 10 वर्ष पूरे, जानिए क्या है किगाली संशोधन?
संदर्भ:
हाल ही में 15 अक्टूबर 2026 को ओजोन परत और वैश्विक जलवायु संरक्षण के इतिहास में एक मील का पत्थर माने जाने वाले किगाली संशोधन (Kigali Amendment) को अपनाए जाने के सफलतापूर्वक 10 वर्ष पूरे (Kigali Amendment 10 Years) हुए।
किगाली संशोधन क्या हैं?
- परिचय: किगाली संशोधन (Kigali Amendment) वर्ष 1987 के ऐतिहासिक मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का एक कानूनी रूप से बाध्यकारी संशोधन (Legally Binding Amendment) है।
- जहाँ मूल मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का ध्यान ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले पदार्थों (जैसे क्लोरोफ्लोरोकार्बन – CFC) को पूरी तरह समाप्त करना था, वहीं किगाली संशोधन का विशिष्ट उद्देश्य हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (Hydrofluorocarbons – HFCs) के वैश्विक उत्पादन और उपभोग को चरणबद्ध तरीके से कम करना (HFC Phase Down) है।
- इतिहास: इसे 15 अक्टूबर 2016 को रवांडा के किगाली शहर में पक्षकारों की 28वीं बैठक (MOP28) में अपनाया गया और यह 1 जनवरी 2019 से वैश्विक स्तर पर लागू हुआ।
- हालिया आंकड़ों के अनुसार, विश्व के 175 से अधिक देश इसका अनुसमर्थन (Ratification) कर चुके हैं।
हाइड्रोफ्लोरोकार्बन (HFCs) और उनकी कमी की आवश्यकता:
- HFCs क्या हैं?: ये कृत्रिम रूप से निर्मित गैसें हैं जिनका मुख्य उपयोग रेफ्रिजरेटर, रेफ्रिजरेशन उद्योग और एयर कंडीशनिंग (Air Conditioning Environmental Impact) प्रणालियों में शीतलक (Refrigerant) के रूप में किया जाता है।
- कमी की आवश्यकता: चूँकि HFCs में क्लोरीन नहीं होता, इसलिए इनका ओजोन क्षरण क्षमता (Ozone Depletion Potential) शून्य होता है। परंतु, ये अत्यधिक शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें (Greenhouse Gases) हैं।
- भार के आधार पर इनकी ग्लोबल वार्मिंग क्षमता (Global Warming Potential – GWP) कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में हजारों गुना अधिक होती है। यदि इन्हें अनियंत्रित छोड़ दिया जाता, तो यह वैश्विक जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Change Mitigation) के प्रयासों को पूरी तरह विफल कर देतीं।
वैश्विक चरणबद्ध कमी के लक्ष्य (HFC Reduction Targets):
किगाली संशोधन के तहत वैश्विक अर्थव्यवस्थाओं को तीन अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया गया है ताकि साझा लेकिन विभेदित जिम्मेदारियों के सिद्धांत का पालन किया जा सके:
- समूह 1 (विकसित देश): इसमें अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान शामिल हैं। इन्हें वर्ष 2019 से ही कटौती शुरू करनी थी और 2036 तक 85% की कमी का लक्ष्य पूरा करना है।
- समूह 2 (विकासशील देश – मुख्य): इसमें चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका शामिल हैं। ये देश 2024 से अपनी खपत को फ्रीज करने और 2045 तक 80% कटौती करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
- समूह 3 (विकासशील देश – बाद में शामिल): इसमें भारत, पाकिस्तान, ईरान और सऊदी अरब शामिल हैं। इन्हें अपने उपभोग को 2028 तक फ्रीज करना है और 2047 तक 85% की कटौती हासिल करनी है।
- भारत ने अगस्त 2021 में केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में किगाली संशोधन के अनुसमर्थन को आधिकारिक मंजूरी दी थी।
- भारत के लिए HFCs उपभोग का आधार वर्ष (Baseline) 2024, 2025 और 2026 के औसत उत्पादन पर आधारित है। भारत 2028 में अपने HFC उपभोग को पूरी तरह स्थिर (Freeze) करेगा, जिसके बाद चार चरणों में कटौती लागू होगी:
- 2032 तक: 10% की कटौती
- 2037 तक: 20% की कटौती
- 2042 तक: 30% की कटौती
- 2047 तक: 85% की अंतिम कटौती
- भारत अपने विनिर्माण उद्योग को सहायता प्रदान करने के लिए ओजोन क्षरण पदार्थ (विनियमन और नियंत्रण) नियमों में आवश्यक विधिक सुधार कर रहा है।
- भारत वर्ष 2019 में ही अपना स्वयं का ‘इंडिया कूलिंग एक्शन प्लान’ (ICAP) लॉन्च करने वाला दुनिया का पहला देश बना था।
रणनीतिक प्रभाव:
- ग्लोबल वार्मिंग में कमी (Global Warming Reduction): यदि इस समझौते को वैश्विक स्तर पर पूरी तरह से लागू किया जाता है, तो यह वर्ष 2100 तक वैश्विक तापमान में होने वाली वृद्धि को 0.3°C से 0.5°C तक रोकने में सक्षम है। यह पेरिस जलवायु समझौते के लक्ष्यों को प्राप्त करने की दिशा में सबसे प्रभावी अंतरराष्ट्रीय तकनीकी कदम है।
- ओजोन परत का संरक्षण (Ozone Layer Protection): यद्यपि यह सीधे ओजोन क्षयकारी पदार्थों को लक्षित नहीं करता, लेकिन पर्यावरण के अनुकूल शीतलन प्रणालियों को बढ़ावा देकर यह अप्रत्यक्ष रूप से ओजोन रिकवरी (Ozone Recovery) की प्रक्रिया को सुदृढ़ करता है।
- बाजार में तकनीकी नवाचार: शीतलन उद्योग (Refrigeration Industry Climate Impact) को हाइड्रोफ्लोरोओलेफिन (HFOs) और अमोनिया जैसे कम ग्लोबल वार्मिंग क्षमता (Low-GWP) वाले विकल्पों की ओर बढ़ने के लिए प्रेरित करके इस नीति ने हरित ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: किगाली संशोधन क्या है?
उत्तर: यह मॉन्ट्रियल प्रोटोकॉल का एक कानूनी रूप से बाध्यकारी अंतरराष्ट्रीय संशोधन (Kigali Amendment) है, जिसका लक्ष्य जलवायु को नुकसान पहुँचाने वाली शक्तिशाली ‘HFCs’ गैसों के उपयोग को चरणबद्ध तरीके से कम करना है।
प्रश्न 2: किगाली संशोधन को कब अपनाया गया था?
उत्तर: इस ऐतिहासिक वैश्विक पर्यावरण समझौते को 15 अक्टूबर 2016 को रवांडा की राजधानी किगाली में आयोजित अंतरराष्ट्रीय जलवायु सम्मेलन में सर्वसम्मति से अपनाया गया था।
प्रश्न 3: किगाली संशोधन के 10 वर्ष पूरे होने का क्या महत्व है?
उत्तर: इसके 10 वर्ष (Kigali Amendment 10 Years) पूरे होना यह दर्शाता है कि वैश्विक स्तर पर तकनीकी परिवर्तन और शीतलन उद्योग में \(0.5^{\circ }C\) तक तापमान वृद्धि रोकने की दिशा में ठोस विधिक ढांचा स्थापित हो चुका है।
प्रश्न 4: Montreal Protocol क्या है?
उत्तर: यह वर्ष 1987 में हस्ताक्षरित एक अत्यंत सफल अंतरराष्ट्रीय पर्यावरण संधि है, जिसे ओजोन परत को नुकसान पहुँचाने वाले क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) जैसे पदार्थों के उत्पादन को रोकने के लिए बनाया गया था।
प्रश्न 5: Hydrofluorocarbons (HFCs) क्या होते हैं?
उत्तर: HFCs ऐसे रासायनिक शीतलक यौगिक हैं जिनका उपयोग रेफ्रिजरेटर और एयर कंडीशनर में किया जाता है। ये ओजोन परत को तो नुकसान नहीं पहुँचाते, लेकिन बहुत शक्तिशाली ग्रीनहाउस गैसें हैं।
प्रश्न 6: HFCs को कम करने की जरूरत क्यों है?
उत्तर: क्योंकि इनकी ग्लोबल वार्मिंग क्षमता (GWP) कार्बन डाइऑक्साइड की तुलना में हजारों गुना अधिक है। इन्हें कम किए बिना वैश्विक जलवायु परिवर्तन शमन (Climate Change Mitigation) के लक्ष्यों को पाना असंभव है।
