Mines and Minerals Amendment Bill 2026 को संसद की मंजूरी, जानिए बिल के प्रावधान
संदर्भ:
हाल ही में संसद ने खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (Mines and Minerals Amendment Bill 2026) को मंजूरी दी।
Mines and Minerals Amendment Bill 2026 के मुख्य प्रावधान:
खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (Mines and Minerals Development and Regulation Act – MMDR Act) में किए गए इस ऐतिहासिक संशोधन के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:
- खनिज-युक्त भूमि पर केंद्रीय नियंत्रण:
- नियामक दायरा: यह विधेयक केंद्र सरकार को न केवल खदानों और खनिजों के विकास को नियंत्रित करने की शक्ति देता है, बल्कि खनिज-युक्त भूमि (Mineral-bearing Lands) के नियमन का अधिकार भी प्रदान करता है।
- मापदंड निर्धारण: ऐसी भूमि की पहचान केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित वैज्ञानिक और तकनीकी मापदंडों के अनुसार की जाएगी।
- धारा 9D का समावेश: अधिनियम में एक नई धारा 9D (Section 9D) जोड़ी गई है।
- अतिरिक्त करों पर रोक: इसके तहत राज्य सरकारें खनिज अधिकारों (Mineral Rights) या खनिज-युक्त भूमि पर किसी भी नाम से मनमाना कर, उपकर (Cess) या अन्य अतिरिक्त शुल्क नहीं लगा सकेंगी.
- केंद्रीय प्रतिबंध: राज्य केवल केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित शर्तों, सीमाओं या प्रतिबंधों के अधीन ही ऐसे कर लगा सकते हैं. यह प्रतिबंध खनिज की मात्रा, मूल्य, रॉयल्टी या किसी भी अन्य आधार पर लागू होगा.
- शुल्कों की अमान्यता:
- बकाया राशि की वैधता: संशोधन लागू होने से पहले राज्यों द्वारा अधिरोपित ऐसा कोई भी शुल्क या उपकर, जो अभी तक कंपनियों द्वारा भुगतान नहीं किया गया है या राज्यों द्वारा वसूला नहीं गया है, उसे पूर्णतः अमान्य (Invalid) माना जाएगा.
- रिफंड का नियम: हालांकि, जो राशि पहले ही जमा या वसूल की जा चुकी है, उसे राज्यों द्वारा वापस (Refund) नहीं किया जाएगा.
- नियम-निर्माण शक्ति: यह विधेयक केंद्र सरकार को खनिज कराधान, खनिज ब्लॉक नीलामी (Mining Auction India), और राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले शुल्कों की ऊपरी सीमा (Cap) तय करने के लिए नियम बनाने की व्यापक शक्तियां सौंपता है.
विधेयक को लाने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
- अत्यधिक कर का बोझ (Heavy Tax Burden): भारतीय खनन उद्योग (Mining Industry India) दुनिया के सबसे अधिक कर-भार वाले क्षेत्रों में से एक बन गया था। विभिन्न राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले विविध शुल्कों के कारण परिचालन लागत (Operational Cost) व्यावसायिक रूप से अव्यवहारिक हो रही थी. [5, 9]
- कराधान में अनिश्चितता (Fiscal Unpredictability): खनन संचालन शुरू होने के बाद भी राज्यों द्वारा अचानक नए कर, उपकर या लेवी लगा दिए जाते थे। इस अप्रत्याशित कराधान ढांचे के कारण बड़े निवेशक निवेश करने से कतराते थे.
- कर दरों में क्षेत्रीय असमानता (Non-uniform Rates across States): अलग-अलग राज्यों में एक ही खनिज पर कर और उपकर की दरें अत्यधिक भिन्न थीं। इस विनियामक अंतर (Regulatory Arbitrage) के कारण देश के भीतर खनिज बाजार विकृत हो रहा था.
- पूर्वव्यापी कराधान के विवाद (Retrospective Taxation Issues): कुछ राज्यों द्वारा पूर्वव्यापी प्रभाव (Retrospective Effect) से भारी-भरकम कर दावों ने खनन कंपनियों के समक्ष गंभीर वित्तीय संकट और लंबे कानूनी विवाद खड़े कर दिए थे.
- महत्वपूर्ण खनिजों की सुरक्षा (Critical Minerals Security): उभरती प्रौद्योगिकियों, स्वच्छ ऊर्जा संक्रमण (Energy Transition) और रक्षा क्षेत्र के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिजों (Critical Minerals) के घरेलू निष्कर्षण (Domestic Extraction) को बढ़ावा देने के लिए एक स्थिर नीतिगत ढांचे की तत्काल आवश्यकता थी.
विधेयक का महत्व:
- राजकोषीय निश्चितता और स्थिरता (Fiscal Certainty and Predictability): एक समान और केंद्र-निर्देशित कराधान ढांचे से खनन क्षेत्र में विनियामक निश्चितता आएगी। इससे दीर्घकालिक व्यावसायिक रणनीतियों को तैयार करने में मदद मिलेगी.
- निजी निवेश में वृद्धि (Boosting Private Investment): कराधान के मोर्चे पर कानूनी विवादों और अनिश्चितता के समाप्त होने से खनन क्षेत्र में निवेश (Mining Sector Investment) बढ़ेगा, विशेषकर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (FDI) और बड़े घरेलू कॉर्पोरेट आकर्षित होंगे.
- खनिज अन्वेषण को प्रोत्साहन (Impus to Mineral Exploration India): स्थिर नीति से अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग करके गहरे दबे हुए तथा महत्वपूर्ण खनिजों के खनिज अन्वेषण (Mineral Exploration Policy) में तेजी आएगी, जिससे भारत आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ेगा.
- आयात निर्भरता में कमी (Reducing Mineral Imports): घरेलू खनिज उत्पादन (Mineral Production India) में वृद्धि होने से देश को लॉजिस्टिक्स लागत में बचत होगी और चीन जैसे देशों पर महत्वपूर्ण खनिजों के लिए रणनीतिक निर्भरता कम होगी.
- व्यापार सुगमता में सुधार (Improving Ease of Doing Business): जटिल और बहुस्तरीय राज्य-स्तरीय लेवी के खात्मे से अनुपालन लागत (Compliance Costs) कम होगी, जो भारतीय खनन उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाएगी.
- संतुलित राष्ट्रीय आर्थिक विकास (Balanced National Economic Growth): बुनियादी ढांचे (Infrastructure), डिजिटल प्रणालियों और विनिर्माण क्षेत्र को कच्चे माल की निर्बाध और किफायती स्थानीय आपूर्ति सुनिश्चित होगी, जिससे ‘विकसित भारत 2047’ के लक्ष्य को गति मिलेगी.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक 2026 क्या है?
उत्तर: यह संसद द्वारा पारित एक कानून है जो खनिज क्षेत्र में एक समान राजकोषीय ढांचा बनाने के लिए 1957 के मूल अधिनियम में संशोधन करता है.
प्रश्न 2: MMDR Amendment Bill 2026 का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य खनन क्षेत्र (Indian Mining Sector) पर अत्यधिक कर के बोझ को कम करना, विनियामक अनिश्चितता को दूर करना और निवेश बढ़ाना है.
प्रश्न 3: इस Bill में Mining Sector के लिए क्या बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं?
उत्तर: इसके तहत नई धारा 9D जोड़कर राज्यों को खनिज अधिकारों पर मनमाने अतिरिक्त कर या उपकर लगाने से प्रतिबंधित किया गया है.
प्रश्न 4: Mines and Minerals Act क्या है?
उत्तर: यह 1957 का एक केंद्रीय कानून (MMDR Act) है जो भारत में खदानों के नियमन और खनिज संसाधनों (Mineral Resources India) के विकास को नियंत्रित करता है.
प्रश्न 5: MMDR Act में संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?
उत्तर: राज्यों द्वारा लगाए जाने वाले अप्रत्याशित, गैर-समान और पूर्वव्यापी करों से उत्पन्न विनियामक विकृतियों और भारी कानूनी मुकदमों को समाप्त करने के लिए इसकी आवश्यकता पड़ी.
प्रश्न 6: नए Bill का Mineral Exploration पर क्या असर पड़ेगा?
उत्तर: राजकोषीय स्थिरता मिलने से वैश्विक खनन कंपनियां भारत में आधुनिक तकनीकों के साथ गहरे खनिज ब्लॉकों के अन्वेषण (Mineral Exploration) में निवेश करेंगी.
प्रश्न 7: Critical Minerals को लेकर इस Bill का क्या महत्व है?
उत्तर: यह सेमीकंडक्टर, हरित ऊर्जा और रक्षा के लिए आवश्यक महत्वपूर्ण खनिज खनन (Critical Mineral Mining) क्षेत्र को वित्तीय सुरक्षा और गति प्रदान करता है.न हुआ, जिसमें लगभग 1.5 करोड़ (15 मिलियन) से अधिक लोगों को अपना घर छोड़ना पड़ा। प्रशासनिक कमियों, वित्तीय विसंगतियों और तय समय पर चुनाव न कराने के कारण टेबल टेनिस फेडरेशन ऑफ इंडिया (Table Tennis Federation of India – TTFI) की मान्यता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया.
