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Mullaperiyar Dam- अवस्थिति, प्रशासन, विवाद और प्रयास

Mullaperiyar Dam- अवस्थिति, प्रशासन, विवाद और प्रयास

Mullaperiyar Dam

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रीय बांध सुरक्षा प्राधिकरण (NDSA) के तहत गठित पांच सदस्यीय उप-निरीक्षण समिति (Sub-Monitoring Committee) ने केरल के इडुक्की जिले में स्थित मुल्लापेरियार बांध (Mullaperiyar Dam) का गहन सुरक्षा निरीक्षण (Safety Inspection) किया। 

मुल्लापेरियार बांध (Mullaperiyar Dam) के बारे में: 

  • अवस्थिति: यह बांध केरल के इडुक्की जिले में पश्चिमी घाट की प्राचीन इलायची पहाड़ियों (Cardamom Hills) के मध्य स्थित है।
    • यह संवेदनशील पेरियार टाइगर रिजर्व (Periyar Tiger Reserve) के अंतर्गत आता है। 
    • इसका निर्माण 1887 से 1895 के बीच ब्रिटिश काल में हुआ था। 
  • नदियों का संगम: इस बांध का निर्माण मुख्य रूप से मुल्लायार और पेरियार नदियों के संगम स्थल पर किया गया है। इसी कारण इसे ‘मुल्ला-पेरियार’ नाम मिला है। 
  • भौतिक आयाम: यह चूने और सुर्खी (Masonry Gravity Dam) से बना 131 वर्ष पुराना ढांचा है। इसकी मुख्य लंबाई लगभग 365.85 मीटर (1,200 फीट) और ऊँचाई 53.66 मीटर (155 फीट) है। 
  • प्रशासनिक स्वरूप: यह बांध पूरी तरह से केरल की भौगोलिक सीमा के भीतर स्थित है, लेकिन वर्ष 1886 के एक ऐतिहासिक पट्टे (Lease Agreement) के कारण इसका स्वामित्व, संचालन और रखरखाव तमिलनाडु सरकार द्वारा किया जाता है। 
  • महत्व:
    • शुष्क क्षेत्रों का उद्धार: इस बांध का मुख्य उद्देश्य पेरियार नदी के अतिरिक्त जल को एक भूमिगत सुरंग के माध्यम से मोड़कर मद्रास प्रेसीडेंसी (अब तमिलनाडु) के शुष्क वर्षाछाया क्षेत्रों (Rain Shadow Regions) तक पहुँचाना था।
    • कृषि का आधार: यह जलाशय तमिलनाडु के 5 दक्षिणी जिलों—थेनी, दिंडीगुल, मदुरै, शिवगंगा और रामनाथपुरम की कृषि अवसंरचना (Agriculture Infrastructure) की रीढ़ है। इसके जल से लाखों हेक्टेयर भूमि सिंचित होती है।
    • पेयजल और आजीविका: इन जिलों के लाखों नागरिकों की पेयजल आपूर्ति (Drinking Water Supply) पूरी तरह मुल्लापेरियार जलाशय (Mullaperiyar Reservoir) पर निर्भर है। इसके अतिरिक्त, यह तमिलनाडु में जलविद्युत उत्पादन (Hydropower Generation) का भी एक प्रमुख स्रोत है। 

अंतर्राज्यीय जल विवाद और दोनों राज्यों का पक्ष (Inter-State Water Dispute & Perspectives):

मुल्लापेरियार बांध विवाद (Mullaperiyar Dam Dispute) भारत के सबसे लंबे समय से चल रहे अंतर्राज्यीय जल विवादों (Inter-State Water Dispute India) में से एक है: 

  • केरल का पक्ष:
    • अत्यधिक आयु: केरल का तर्क है कि 100 से अधिक वर्ष पुराना होने के कारण यह बांध संरचनात्मक रूप से कमजोर (Structural Weakness) हो चुका है।
    • भूकंपीय संवेदनशीलता: यह क्षेत्र भूकंपीय क्षेत्र-III (Seismic Zone III) में आता है। बांध के टूटने की स्थिति में केरल के निचले जिलों (विशेषकर इडुक्की, एर्नाकुलम और कोट्टायम) के 50 लाख से अधिक नागरिकों का जीवन संकट में पड़ जाएगा।
    • समाधान: केरल तमिलनाडु को पानी देने का विरोध नहीं करता, बल्कि जल स्तर को कम रखने की वकालत करता है। केरल का मुख्य प्रस्ताव उसी स्थान पर एक नया आधुनिक बांध (New Dam) बनाना है। 
  • तमिलनाडु का पक्ष:
    • ऐतिहासिक अधिकार: तमिलनाडु 1886 के पट्टा समझौते (Mullaperiyar Lease Agreement) के तहत अपने विधिक अधिकारों का दावा करता है, जो 999 वर्षों के लिए वैध है।
    • संरचनात्मक मजबूती: तमिलनाडु का दावा है कि समय-समय पर किए गए सुदृढ़ीकरण कार्यों (Strengthening Measures) के कारण बांध पूरी तरह सुरक्षित है।
    • जल स्तर बढ़ाने की मांग: तमिलनाडु कृषि आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए बांध के जल स्तर को उसकी पूर्ण जलाशय क्षमता 152 फीट तक बढ़ाना चाहता है।

विवाद को सुलझाने के प्रयास:

  • पेरियार झील पट्टा समझौता (1886): त्रावणकोर के महाराजा और ब्रिटिश राज्य के बीच 999 साल का समझौता हुआ, जिसने तमिलनाडु को संचालन अधिकार दिए।
  • केंद्रीय जल आयोग का हस्तक्षेप (1979): सुरक्षा चिंताओं के बाद, केंद्रीय जल आयोग (CWC) ने मध्यम अवधि के सुधार होने तक जल स्तर को अस्थाई रूप से 136 फीट पर सीमित करने की सिफारिश की।
  • सर्वोच्च न्यायालय का फैसला (2006): सुप्रीम कोर्ट (Mullaperiyar Dam Supreme Court) ने तमिलनाडु को सुरक्षा सुदृढ़ीकरण के बाद जल स्तर को 142 फीट तक बढ़ाने की अनुमति दी। इसके तुरंत बाद केरल विधानसभा ने कानून बनाकर इस पर रोक लगा दी, जिसे कोर्ट ने बाद में रद्द कर दिया।
  • ऐतिहासिक संविधान पीठ निर्णय (7 मई 2014): सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की पीठ ने बांध को संरचनात्मक रूप से सुरक्षित घोषित किया। कोर्ट ने जल स्तर को 142 फीट तक बनाए रखने की मंजूरी दी और बांध की देखरेख के लिए एक स्थायी पर्यवेक्षी समिति (Supervisory Committee) का गठन किया।
  • उप-समिति का सुदृढ़ीकरण (2022): सुप्रीम कोर्ट ने पर्यवेक्षी समिति को और अधिक शक्तियां प्रदान कीं, जो बांध सुरक्षा अधिनियम, 2021 (Dam Safety Act) के नियमों के समकक्ष हैं।
  • हालिया गतिरोध (अगस्त 2026): तमिलनाडु सरकार ने बजट में जल स्तर को पुनः बढ़ाने और बेबी बांध (Baby Dam) के पास पेड़ काटने की अनुमति के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिसमें केरल पर “अवरोधक रवैया” अपनाने का आरोप लगाया गया है। केरल ने इसके विरोध में सुरक्षा ऑडिट पूरा होने तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग की है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: मुल्लापेरियार बांध कहां स्थित है?

उत्तर: यह बांध भौगोलिक रूप से भारत के दक्षिणी राज्य केरल के इडुक्की जिले में पेरियार टाइगर रिजर्व के भीतर स्थित है।

प्रश्न 2: मुल्लापेरियार बांध को लेकर Kerala और Tamil Nadu के बीच विवाद क्या है?

उत्तर: यह विवाद बांध की संरचनात्मक सुरक्षा (Dam Safety), इसके संचालन नियंत्रण और जलाशय के जल स्तर (Water Level) को लेकर है।

प्रश्न 3: मुल्लापेरियार बांध का निर्माण कब हुआ था?

उत्तर: इस ऐतिहासिक राजगीरी बांध का निर्माण ब्रिटिश काल के दौरान 1887 से 1895 के मध्य इंजीनियर जॉन पेनीक्विक द्वारा किया गया था। 

प्रश्न 4: मुल्लापेरियार बांध किस नदी पर बना है?

उत्तर: यह बांध मुख्य रूप से पेरियार नदी और उसकी सहायक नदी मुल्लायार के पवित्र संगम स्थल पर निर्मित है।

प्रश्न 5: मुल्लापेरियार बांध का नियंत्रण किस राज्य के पास है?

उत्तर: केरल में स्थित होने के बावजूद, 1886 के पट्टा समझौते के तहत इसका पूर्ण स्वामित्व और संचालन तमिलनाडु सरकार के पास है।

प्रश्न 6: मुल्लापेरियार बांध की सुरक्षा को लेकर चिंता क्यों रहती है?

उत्तर: बांध की आयु 130 वर्ष से अधिक होने और इसके भूकंप-संवेदनशील क्षेत्र (Seismic Zone) में स्थित होने के कारण केरल को इसके टूटने का डर रहता है।

प्रश्न 7: Mullaperiyar Dam Agreement क्या है?

उत्तर: यह 29 अक्टूबर 1886 को त्रावणकोर रियासत और मद्रास प्रेसीडेंसी के बीच हुआ 999 वर्षीय पट्टा समझौता है, जो तमिलनाडु को जल अधिकार देता है।

प्रश्न 8: मुल्लापेरियार बांध का Water Level विवाद क्या है?

उत्तर: तमिलनाडु सिंचाई आवश्यकताओं के लिए जल स्तर को 142-152 फीट करना चाहता है, जबकि केरल सुरक्षा कारणों से इसे 136 फीट तक सीमित रखने की मांग करता है।

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