National Accounts Statistics 2026 जारी, 2022-23 को आधार वर्ष मानकर तैयार किया गया डाटा

संदर्भ:
हाल ही में राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office – NSO) ने “राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी – 2026” (National Accounts Statistics 2026) रिपोर्ट जारी की। इस बार व्यापक आर्थिक संकेतकों को अधिक सटीक बनाने के लिए आधार वर्ष 2022-23 (Base Year 2022-23 GDP) को नया मानक माना गया।
राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (NAS) क्या है?
- परिचय: राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी (National Accounts Statistics) भारत के आर्थिक स्वास्थ्य को मापने वाली एक अत्यंत महत्वपूर्ण वार्षिक सांख्यिकी रिपोर्ट है। यह देश की कुल आय, उत्पादन, व्यय, बचत और पूंजी निर्माण का व्यापक और एकीकृत लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है। सरल शब्दों में, यह देश की समष्टि आर्थिक संकेतकों (Macroeconomic Indicators) की आधिकारिक बैलेंस शीट है।
- जारीकर्ता संस्था: यह रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (Ministry of Statistics and Programme Implementation – MoSPI) के अधीन कार्य करने वाले राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (National Statistical Office India) द्वारा प्रतिवर्ष तैयार और जारी की जाती है।
- शुरुआत: भारत में राष्ट्रीय आय के आकलन की शुरुआत स्वतंत्रता के बाद वाणिज्य मंत्रालय द्वारा की गई थी। इसके बाद वर्ष 1956 में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) ने राष्ट्रीय लेखा सांख्यिकी का पहला आधिकारिक संकलन जारी किया था, जिसे ‘श्वेत पत्र’ (White Paper) भी कहा जाता है। तब से लेकर अब तक अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप को शामिल करने के लिए समय-समय पर इसके आधार वर्ष (Base Year) में संशोधन किया जाता रहा है।
- मुख्य उद्देश्य:
- नीति निर्माण का आधार: सरकार, नीति निर्माताओं और रिजर्व बैंक (RBI) को राजकोषीय और मौद्रिक नीतियां बनाने के लिए वास्तविक आर्थिक डेटा उपलब्ध कराना।
- संरचनात्मक परिवर्तनों का मापन: भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy GDP Data) के प्राथमिक, द्वितीयक और तृतीयक क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को ट्रैक करना।
- अंतरराष्ट्रीय तुलना: भारतीय आर्थिक विकास की गति की तुलना वैश्विक मानकों (जैसे संयुक्त राष्ट्र के SNA 2008) के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय स्तर पर करना।
- प्रमुख घटक: इस व्यापक सांख्यिकीय ढांचे में निम्नलिखित घटकों से संबंधित 60 विवरण (Statements) शामिल किए जाते हैं:
- सकल घरेलू उत्पाद (Gross Domestic Product – GDP) और राष्ट्रीय आय (National Income Statistics India)।
- सकल मूल्य वर्धित (Gross Value Added – GVA) और विभिन्न क्षेत्रों (कृषि, उद्योग, सेवा) का उत्पादन।
- निजी अंतिम उपभोग व्यय (Private Final Consumption Expenditure – PFCE) और सरकारी व्यय।
- घरेलू बचत (Domestic Savings) और सकल पूंजी निर्माण (Capital Formation)।
- सार्वजनिक क्षेत्र के लेन-देन (Public-Sector Transactions) और बाह्य लेनदेन (External Transactions)।
National Accounts Statistics 2026 के प्रमुख निष्कर्ष एवं विशेषताएं
वर्ष 2026 के इस संस्करण में भारतीय सांख्यिकीय प्रणाली में व्यापक और ऐतिहासिक सुधार किए गए हैं, जिनकी मुख्य विशेषताएं इस प्रकार हैं:
- नया आधार वर्ष 2022-23 (New Base Year 2022-23 GDP): एनएसओ ने पुराने आधार वर्ष 2011-12 को बदलकर वर्ष 2022-23 को नया आधार वर्ष घोषित किया।
- पिछले एक दशक में डिजिटल अर्थव्यवस्था, ई-कॉमर्स, स्टार्टअप्स और उपभोक्ता प्राथमिकताओं में बड़े बदलाव आए हैं। पुराना आधार वर्ष इन बदलावों को प्रदर्शित करने में असमर्थ था।
- मूल्य सूचकांकों का समावेश: आर्थिक गणना में सटीकता लाने के लिए जून 2026 में जारी नए उत्पादक मूल्य सूचकांक (Producer Price Index – PPI), औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP), और बैंकिंग सेवा मूल्य सूचकांक (BkSPI) को शामिल किया गया है, जिनका आधार वर्ष भी 2022-23 है।
- थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के स्थान पर पीपीआई (PPI) का उपयोग करने से विनिर्माण और व्यापार सेवाओं में मुद्रास्फीति का वास्तविक प्रभाव अधिक स्पष्ट हुआ है।
- उन्नत डेटा स्रोत: इस नई श्रृंखला में वस्तु एवं सेवा कर (GST) के डेटा और कॉर्पोरेट मामलों के मंत्रालय के एमसीए (MCA) डेटा का व्यापक उपयोग किया गया है।
- असंगठित और अनौपचारिक क्षेत्र के सटीक मूल्यांकन के लिए ‘असंगठित क्षेत्र के उद्यमों का वार्षिक सर्वेक्षण’ (ASUSE) और ‘आवधिक श्रम बल सर्वेक्षण’ (PLFS) के वार्षिक आंकड़ों को आधार बनाया गया है, जिससे पारंपरिक अनुमानों की त्रुटियां दूर हुई हैं।
- कार्यप्रणाली में सुधार: इनपुट (कच्चा माल) और आउटपुट (अंतिम उत्पाद) दोनों की मुद्रास्फीति को अलग-अलग मापने के लिए डबल-डिफ्लेटर दृष्टिकोण (Double-Deflator Approach) लागू किया गया है। इससे विनिर्माण क्षेत्र के वास्तविक मूल्य वर्धन (Real GVA) की गणना अत्यधिक सटीक हो गई है।
- संशोधित जीडीपी अनुमान (Revised GDP Estimates India 2026): इन सुधारों के कारण वित्त वर्ष 2023-24 के लिए वास्तविक जीडीपी विकास दर 7.3% और वित्त वर्ष 2024-25 के लिए 7.2% आंकी गई है।
- वहीं, वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अनंतिम अनुमान (Provisional Estimates) के अनुसार भारत की वास्तविक जीडीपी वृद्धि दर 7.8% रहने का अनुमान लगाया गया है, जो मजबूत आर्थिक सुधार को दर्शाता है।
महत्व:
- राजकोषीय संकेतकों पर प्रभाव: नई गणना से नाममात्र जीडीपी (Nominal GDP) के स्तरों में सुधार होने से सरकार के राजकोषीय घाटे (Fiscal Deficit) और ‘ऋण-टू-जीडीपी अनुपात’ (Debt-to-GDP Ratio) के लक्ष्यों को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने में मदद मिलेगी।
- विदेशी निवेश और निवेशक विश्वास: अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप अत्यधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक डेटा प्रणाली होने से वैश्विक रेटिंग एजेंसियों और विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) का भारतीय अर्थव्यवस्था पर विश्वास सुदृढ़ होगा।
- नीतिगत सुधार: यह नया डेटा ढांचा सरकार को रोजगार सृजन, गरीबी उन्मूलन और बुनियादी ढांचे के विकास (Infrastructure Development) के लिए अधिक लक्षित और प्रभावी योजनाएं बनाने में मदद करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: National Accounts Statistics 2026 क्या है?
उत्तर: यह राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी वार्षिक रिपोर्ट है, जो भारत की राष्ट्रीय आय, उत्पादन, व्यय और सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का व्यापक लेखा-जोखा प्रस्तुत करती है।
प्रश्न 2: National Accounts Statistics 2026 में 2022-23 को Base Year क्यों बनाया गया है?
उत्तर: देश के बदलते आर्थिक ढांचे, नए उपभोक्ता पैटर्न और डिजिटल लेन-देन को जीडीपी गणना में सही ढंग से शामिल करने के लिए पुराने वर्ष (2011-12) को बदला गया है।
प्रश्न 3: National Accounts Statistics 2026 किस संस्था ने जारी किया है?
उत्तर: यह रिपोर्ट सांख्यिकी और कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) के अंतर्गत कार्यरत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) द्वारा जारी की गई है।
प्रश्न 4: भारत में GDP का Base Year क्या है?
उत्तर: इस नवीनतम संशोधन के बाद भारत में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) की गणना का वर्तमान आधार वर्ष अब 2022-23 हो गया है।
प्रश्न 5: Base Year 2022-23 से India GDP Calculation में क्या बदलाव होगा?
उत्तर: इसके तहत नए मूल्य सूचकांकों (PPI), जीएसटी डेटा और ‘डबल-डिफ्लेटर’ प्रणाली का उपयोग किया जाएगा, जिससे जीडीपी और आर्थिक विकास दर के आंकड़े अत्यधिक सटीक और त्रुटिहीन होंगे।
प्रश्न 6: National Accounts Statistics में किन आर्थिक आंकड़ों को शामिल किया जाता है?
उत्तर: इसमें मुख्य रूप से राष्ट्रीय आय, प्रति व्यक्ति आय, उपभोग व्यय, पूंजी निर्माण, बचत दरें और सार्वजनिक एवं बाहरी आर्थिक लेन-देन के आंकड़ों को शामिल किया जाता है।