National Annual Report and Index on Women’s Safety Report 2025
संदर्भ:
राष्ट्रीय महिला आयोग (NMC) ने हाल ही में नेशनल एनुअल रिपोर्ट एंड इंडेक्स ऑन वुमेंस सेफ्टी (NARI) 2025 जारी किया है।
- रिपोर्ट के अनुसार, देश के शहरी क्षेत्रों में 40% महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं। कोहिमा, विशाखापत्तनम, भुवनेश्वर, आइजोल, गंगटोक, ईटानगर और मुंबई को सबसे सुरक्षित शहरों में स्थान दिया गया है।
- जबकि रांची, श्रीनगर, कोलकाता, दिल्ली, फरीदाबाद, पटना और जयपुर को सबसे कम सुरक्षित शहरों में गिना गया है।
महिला सुरक्षा पर सर्वेक्षण का निष्कर्ष:
- सर्वेक्षण का दायरा: 18 वर्ष से अधिक आयु की 12,770 महिलाओं से राय ली गई।
- महिला सुरक्षा की धारणा: देशभर में औसतन 6% महिलाएं अपने शहर में खुद को सुरक्षित महसूस करती हैं। इसका मतलब है कि लगभग 35–36% महिलाएं स्वयं को असुरक्षित महसूस करती हैं।
- मापदंड: महिला सुरक्षा का आकलन केवल शारीरिक सुरक्षा तक सीमित नहीं है। इसमें शामिल हैं: संपूर्ण सुरक्षा, पड़ोस और स्थानीय परिवेश, सार्वजनिक परिवहन, शिक्षा संस्थान, कार्यस्थल, स्वास्थ्य सेवाएँ, मनोरंजन और सार्वजनिक स्थल, ऑनलाइन उत्पीड़न
- संपर्क और शिकायत प्रणाली: यह मापदंड ढांचागत संसाधनों के अलावा उत्पीड़न की घटनाओं और उनकी शिकायतों को भी ध्यान में रखते हैं।
NARI-2025 रिपोर्ट:
- सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षा: हर तीन में से दो महिलाओं ने कहा कि वे उत्पीड़न की शिकायत नहीं करतीं। 2024 में 7% महिलाओं ने सार्वजनिक उत्पीड़न का अनुभव किया; 18–24 वर्ष की युवतियाँ सबसे ज्यादा प्रभावित।
- शिकायत और कार्रवाई: 33% ने शिकायत दर्ज कराई, लेकिन केवल 16% मामलों में कार्रवाई हुई। केवल 25% महिलाओं को शासन-प्रशासन की प्रभावी कार्रवाई पर भरोसा।
- रात का समय और असुरक्षा: रात में असुरक्षा की भावना अधिक; कारण—अपर्याप्त स्ट्रीट लाइटिंग, सीमित पुलिस पेट्रोलिंग और सामाजिक रवैया।
- कार्यस्थल: 91% महिलाएं कार्यस्थल को सुरक्षित मानती हैं। लगभग आधी महिलाओं को POSH नीति की जानकारी नहीं। 69% ने सुरक्षा उपाय “कुछ हद तक पर्याप्त” बताया, 30% से अधिक ने कमियाँ इंगित की।
- मुख्य उत्पीड़न स्थल: पड़ोस (38%) और परिवहन (29%) प्रमुख केंद्र। कार्यस्थल अपेक्षाकृत सुरक्षित, लेकिन बाहर असुरक्षा अधिक।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में कानूनी प्रतिक्रिया में चुनौतियाँ:
- अपर्याप्त कानूनी कार्रवाई: हिंसा के मामलों का अक्सर प्रभावी समाधान नहीं होता, जैसा कि कोलकाता के एक मामले में देखा गया।
- कम सजा और दोषसिद्धि दर: दहेज हत्या जैसे गंभीर मामलों में भी दोषसिद्धि कम होती है, क्योंकि अक्सर मामले शांति समझौते में बदल जाते हैं।
- घरेलू हिंसा पर कमजोर कानून: घरेलू हिंसा से जुड़े कानून कम प्रभावी हैं और अपराधियों को न्यूनतम सजा मिलती है।
- सहज जमानत नियम: पीछा करने और उत्पीड़न जैसे गंभीर अपराधों में अपराधियों को आसानी से जमानत मिल जाती है।
- धीमा न्यायिक प्रक्रिया: मुकदमे लंबित रहते हैं और कई मामलों को उचित कानूनी प्रक्रिया के बिना निपटाया जाता है
भारत में महिला सुरक्षा के लिए किए गए उपाय:
- निर्भया फंड (2013): महिलाओं की सुरक्षा बढ़ाने के लिए पैनिक बटन, सीसीटीवी निगरानी जैसी सुरक्षा परियोजनाओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है।
- वन स्टॉप सेंटर (OSC) योजना (2015): हिंसा से प्रभावित महिलाओं को कानूनी, चिकित्सा और मानसिक स्वास्थ्य संबंधी एकीकृत सहायता उपलब्ध कराती है।
- महिला हेल्पलाइन (181): संकट में महिलाओं को 24/7 तत्काल और आपातकालीन सहायता, पुलिस, अस्पताल और वन स्टॉप सेंटर से संपर्क उपलब्ध कराती है।
- बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ (2015): लिंग आधारित भेदभाव को कम करने और बालिकाओं की स्थिति व कल्याण में सुधार लाने के लिए कार्यरत।मिशन शक्ति: महिलाओं की सुरक्षा, सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए व्यापक अभियान, जिसमें सुरक्षा (“संबल”) और सशक्तिकरण (“समर्थ्य”) के उप-योजनाएँ शामिल हैं।
- उज्जवला योजना: मानव तस्करी और वाणिज्यिक यौन शोषण के शिकार महिलाओं को बचाने, पुनर्वासित करने और समाज में पुनः एकीकृत करने पर केंद्रित।