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राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR): परिचय, गठन, संरचना एवं कार्य

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR): परिचय, गठन, संरचना एवं कार्य

NCPCR

संदर्भ:

हाल ही में राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (National Commission for Protection of Child Rights – NCPCR) ने BBC रिपोर्ट के आधार पर बाल शोषण विज्ञापनों (Child Exploitation Ads) के मामले में मेटा (Meta) और इंस्टाग्राम (Instagram) के खिलाफ जांच शुरू की। 

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) क्या हैं?

  • परिचय: राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) भारत सरकार का एक सांविधिक निकाय (Statutory Body) है। यह सुनिश्चित करता है कि देश की सभी नीतियां, कानून और प्रशासनिक तंत्र भारतीय संविधान तथा संयुक्त राष्ट्र बाल अधिकार कन्वेंशन (UNCRC) के अनुरूप बाल अधिकारों के संरक्षण के सिद्धांतों पर आधारित हों।
  • गठन और विधिक आधार (NCPCR Formation): इसका गठन मार्च 2007 में बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CPCR) अधिनियम, 2005 (CPCR Act 2005) के तहत एक वैधानिक संस्था के रूप में किया गया था।
  • संबद्ध मंत्रालय: प्रशासनिक रूप से यह निकाय भारत सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय (Ministry of Women and Child Development) के तत्वावधान में कार्य करता है।
  • संरचना एवं सदस्यता: आयोग में कुल 7 सदस्य होते हैं, जिनमें शामिल हैं:
  • एक अध्यक्ष (Chairperson): जो बाल कल्याण के क्षेत्र में उत्कृष्ट और विशिष्ट कार्य करने वाला व्यक्ति हो।
  • छह सदस्य (Six Members): जिनमें से कम से कम दो महिलाएं होना अनिवार्य है।
  • पात्रता: सदस्यों की नियुक्ति निम्नलिखित क्षेत्रों के प्रख्यात विशेषज्ञों में से की जाती है:
  • बाल शिक्षा, बाल विकास और देखभाल।
  • बाल अधिकार संरक्षण कानून और किशोर न्याय।
  • बाल स्वास्थ्य, बाल रोग या बाल कल्याण।
  • बाल श्रम का उन्मूलन या संकटग्रस्त बच्चों का पुनर्वास।
  • बाल मनोविज्ञान या समाजशास्त्र।
  • अध्यक्ष की नियुक्ति: केंद्र सरकार द्वारा गठित एक तीन सदस्यीय चयन समिति की सिफारिश पर की जाती है, जिसके अध्यक्ष महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के प्रभारी मंत्री होते हैं।
  • कार्यकाल (Tenure): अध्यक्ष और सदस्यों का कार्यकाल 3 वर्ष का होता है। अध्यक्ष अधिकतम 65 वर्ष की आयु तक और सदस्य 60 वर्ष की आयु तक अपने पद पर रह सकते हैं। कोई भी सदस्य अधिकतम दो कार्यकालों के लिए ही नियुक्त हो सकता है।
  • कार्य और शक्तियां (NCPCR Functions and Powers): 
    • विधिक समीक्षा: बाल अधिकारों की सुरक्षा के लिए लागू विधिक प्रावधानों की समीक्षा करना और उनकी प्रभावी प्रभावशीलता के लिए सिफारिशें देना।
  • स्वतः संज्ञान (Suo-Motu Cognizance): बाल अधिकारों के उल्लंघन के मामलों में स्वतः संज्ञान लेना, शिकायतों की जांच करना और त्वरित कानूनी कार्रवाई शुरू करना।
  • विशेष कानूनों की निगरानी:
    • पोक्सो अधिनियम (POCSO Act NCPCR): यौन अपराधों से बच्चों का संरक्षण अधिनियम, 2012 के कार्यान्वयन की निगरानी करना।
    • शिक्षा का अधिकार (Right to Education – RTE): निःशुल्क और अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम, 2009 के तहत बच्चों के अधिकारों की सुरक्षा की निगरानी करना।
    • किशोर न्याय अधिनियम: किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 का प्रभावी कार्यान्वयन सुनिश्चित करना।
  • दीवानी न्यायालय की शक्तियां: किसी भी मामले की जांच करते समय आयोग को सिविल प्रक्रिया संहिता, 1908 के तहत एक दीवानी न्यायालय (Civil Court) की शक्तियां प्राप्त होती हैं।
    • इसके तहत आयोग किसी भी व्यक्ति को समन जारी कर सकता है, गवाहों की उपस्थिति अनिवार्य कर सकता है, और किसी भी कार्यालय से सार्वजनिक दस्तावेजों या रिपोर्ट की मांग कर सकता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: National Commission for Protection of Child Rights क्या है?

उत्तर: यह भारत में बाल अधिकारों की सुरक्षा, बाल कल्याण और संबंधित कानूनों की निगरानी करने वाला देश का सर्वोच्च सांविधिक निकाय (Statutory Body) है।

प्रश्न 2: NCPCR Formation कब और किस Act के तहत हुआ?

उत्तर: इसका गठन मार्च 2007 में, संसद द्वारा पारित बाल अधिकार संरक्षण आयोग (CPCR) अधिनियम, 2005 के प्रावधानों के अंतर्गत किया गया था।

प्रश्न 3: NCPCR Structure में कितने members होते हैं?

उत्तर: आयोग की संरचना में कुल 7 सदस्य होते हैं, जिनमें एक अध्यक्ष और छह विशेषज्ञ सदस्य (कम से कम दो महिला सदस्य अनिवार्य) शामिल हैं।

प्रश्न 4: NCPCR Functions क्या हैं?

उत्तर: इसके मुख्य कार्यों में बाल अधिकारों के उल्लंघन की जांच करना, पोक्सो (POCSO) व आरटीई (RTE) अधिनियमों की निगरानी करना और सरकारों को नीतिगत सुझाव देना है।

प्रश्न 5: NCPCR child rights की protection कैसे करता है?

उत्तर: यह शिकायतों और स्वतः संज्ञान (Suo-motu) के माध्यम से जांच करके, दीवानी न्यायालय की शक्तियों का उपयोग कर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स या संस्थाओं पर बाल शोषण के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की सिफारिश करता है।

प्रश्न 6: CPCR Act 2005 का NCPCR से क्या संबंध है?

उत्तर: CPCR अधिनियम, 2005 वह मूल मूल वैधानिक आधार (Parent Act) है जो इस आयोग की स्थापना, शक्तियों, कार्यों और संगठनात्मक ढांचे को परिभाषित करता है।

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