Nearly 60% of MGNREGS budget already spent in first 5 months of financial year
संदर्भ:
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, महत्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (MGNREGS) के लिए 2025-26 के बजट का लगभग 60% खर्च हो चुका है, जबकि वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही खत्म होने में अभी एक महीना बाकी है। कुल ₹86,000 करोड़ के बजट में से ₹51,521 करोड़ अब तक खर्च हो चुके हैं।
मनरेगा के खर्च पर नया नियम:
- पहली बार खर्च सीमा: हाल ही में वित्त वर्ष 2025-26 की पहली छमाही में मनरेगा के खर्च को कुल आवंटन का 60% तक सीमित किया गया।
- व्यवस्था में बदलाव: अब मनरेगा मंथली/क्वार्टरली एक्सपेंडिचर प्लान (MEP/QEP) के तहत आएगा, जो वित्त मंत्रालय की खर्च नियंत्रण प्रणाली का हिस्सा है। पहले यह योजना पूरी तरह मांग आधारित थी।
- बजट और प्राथमिक खर्च: कुल बजट ₹86,000 करोड़; पहली छमाही में खर्च केवल ₹51,600 करोड़ तक सीमित। पिछले वर्ष की लंबित देनदारियां लगभग ₹21,000 करोड़।
- योजना गतिविधियाँ: ग्रामीण सड़क निर्माण, सिंचाई, जल संरक्षण और अन्य रोजगार संबंधी कार्य।
- संभावित प्रभाव: इस खर्च नियंत्रण के बावजूद ग्रामीणों की 100 दिनों की रोजगार गारंटी को बढ़ाकर 150 दिन करने और दैनिक मजदूरी ₹370 से ₹400 करने की मांगें उठ रही हैं। कुछ राज्यों में पहले से ₹400 प्रतिदिन लागू है।
MGNREGA के बारे में?
MGNREGA का पूरा नाम Mahatma Gandhi National Rural Employment Guarantee Act, 2005 है। यह भारत सरकार द्वारा 2005 में पारित एक कानून है, जिसका उद्देश्य ग्रामीण नागरिकों को रोजगार का अधिकार प्रदान करना है।
मुख्य बातें:
- इस कानून के तहत योग्य ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को कम से कम 100 दिन का असंगठित श्रम सुनिश्चित किया जाता है।
- इसका मुख्य उद्देश्य ग्रामीण लोगों को रोजगार उपलब्ध कराना और उनकी आर्थिक स्थिति सुधारना है।
- MGNREGA के पीछे कई संगठनों और व्यक्तियों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है, जिनमें मजदूर किसान शक्ति संगठन और प्रसिद्ध विकास अर्थशास्त्री जीन ड्रेज़ शामिल हैं।
- MKSS ने सरकार के सूखा राहत कार्यक्रमों में श्रमिकों को संगठित करने की पहल की, जिसने लंबे समय तक सक्रियता के लिए मार्ग प्रशस्त किया और अंततः MGNREGA के निर्माण में योगदान दिया।
MGNREGA के प्रमुख प्रावधान:
- पात्रता:
- आवेदक भारतीय नागरिक होना चाहिए।
- आवेदन के समय आयु 18 वर्ष या उससे अधिक हो।
- आवेदक ग्रामीण परिवार का सदस्य होना चाहिए।
- असंगठित कार्य करने के लिए इच्छुक होना।
- रोजगार की गारंटी: MGNREGA योजना के तहत सभी इच्छुक ग्रामीण नागरिकों को कम से कम 100 दिन का असंगठित रोजगार सरकार द्वारा तय न्यूनतम वेतन पर उपलब्ध कराया जाता है।
- बेरोजगारी भत्ता: यदि आवेदक को 15 दिनों के भीतर काम नहीं मिलता, तो उसे बेरोजगारी भत्ता देने का अधिकार है। पहले 30 दिनों के लिए भत्ता न्यूनतम वेतन का 1/4 और उसके बाद का आधा (1/2) प्रदान किया जाता है।
- सामाजिक ऑडिट: MGNREGA की धारा 17 के तहत सभी कार्यों का सामाजिक ऑडिट अनिवार्य है।
- निवास के पास रोजगार का प्राथमिकता: आवेदकों को आमतौर पर गांव से 5 किमी के दायरे में काम प्रदान किया जाता है। यदि कार्य 5 किमी से अधिक दूर है, तो आवेदक को यात्रा भत्ता उपलब्ध कराया जाता है।
- विकेंद्रीकृत योजना: MGNREGA के कार्यों की योजना, कार्यान्वयन और निगरानी में पंचायती राज संस्थान की प्रमुख भूमिका होती है। ग्राम सभाओं को काम सुझाने और कार्यों की प्राथमिकताएं तय करने का अधिकार होता है। योजना के अनुसार, कम से कम आधे कार्यों को ग्राम सभा के मार्गदर्शन में पूरा करना अनिवार्य है।
- कार्य की शर्तें और भुगतान: कार्य के दौरान उचित कार्य परिस्थितियों, चिकित्सा सुविधाओं और मुआवजे की व्यवस्था करना अनिवार्य है। भुगतान साप्ताहिक आधार पर किया जाता है और 15 दिनों से अधिक विलंब नहीं होना चाहिए। विलंब होने पर मुआवजा दिया जाता है।