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Police Modernization Mission: परिचय, बजट, कवरेज एवं महत्व 

Police Modernization Mission: परिचय, बजट, कवरेज एवं महत्व 

Police Modernization Mission

संदर्भ:

हाल ही में भारत सरकार ने आंतरिक सुरक्षा को सुदृढ़ करने और कानून व्यवस्था को आधुनिक चुनौतियों के अनुरूप ढालने के लिए पुलिस आधुनिकीकरण मिशन (Police Modernization Mission) के तहत नए वित्तीय आवंटन और तकनीकी उन्नयन दिशानिर्देश जारी किए.

पुलिस आधुनिकीकरण मिशन (Police Modernization Mission) के बारे में:

  • परिचय: यह मिशन भारत की राज्य पुलिस बलों (State Police Forces) को आधुनिक हथियारों, अत्याधुनिक संचार प्रणालियों, उन्नत गतिशीलता और डिजिटल बुनियादी ढांचे से लैस करने के लिए केंद्र सरकार की एक व्यापक पहल है.
    • इसका मुख्य आधार ‘राज्यों के पुलिस आधुनिकीकरण के लिए सहायता’ (Assistance to States for Modernization of Police – ASUMP) योजना है, जिसे पहले MPF (Modernization of State Police Forces) योजना के नाम से जाना जाता था.
  • नोडल एजेंसी: इस मिशन का कार्यान्वयन पूर्ण रूप से भारत सरकार के गृह मंत्रालय (Ministry of Home Affairs – MHA) द्वारा किया जाता है.
  • उद्देश्य:
    • आंतरिक सुरक्षा सुदृढ़ीकरण: आतंकवाद, उग्रवाद, नक्सलवाद और साइबर अपराधों से प्रभावी ढंग से निपटना.
    • विदेशी प्रणालियों पर निर्भरता कम करना: पुलिस बलों के लिए स्वदेशी रूप से विकसित रक्षा उपकरणों और संचार प्रणालियों को बढ़ावा देना.
    • नागरिक-केंद्रित पुलिसिंग: पुलिस थानों को आधुनिक और उत्तरदायी बनाकर पुलिस और जनता के बीच विश्वास पैदा करना.
  • बजट:केंद्रीय बजट 2026-27 के तहत ‘पुलिस आधुनिकीकरण और आंतरिक सुरक्षा’ के व्यापक अंब्रेला ढांचे के लिए पर्याप्त वित्तीय आवंटन किया गया है.
    • इसके लिए 24,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं।
    • इसमें ASUMP scheme के लिए राज्यों को उनकी श्रेणी (जैसे- पूर्वोत्तर और हिमालयी राज्य: 90:10 अनुपात; अन्य राज्य: 60:40 केंद्र-राज्य अनुपात) के आधार पर वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है.
  • कवरेज:
    • अखिल भारतीय प्रभाव: यह मिशन देश के सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों को कवर करता है.
    • विशेष ध्यान: जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित क्षेत्रों और पूर्वोत्तर राज्यों के संवेदनशील सीमावर्ती जिलों पर इसका विशेष ध्यान है।
  • घटक:
    • तकनीकी आधुनिकीकरण (Police Technology Modernization): इसके तहत सीसीटीएनएस (CCTNS – Crime and Criminal Tracking Network & Systems) और आईसीजेएस (ICJS – Interoperable Criminal Justice System) को मजबूत किया जा रहा है. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और डेटा एनालिटिक्स (Data Analytics) टूल्स का एकीकरण किया जा रहा है ताकि अपराधियों की पहचान और भविष्य की अपराध मैपिंग आसानी से की जा सके.
    • हथियारों का आधुनिकीकरण (Police Weapons Modernization): राज्य पुलिस को पारंपरिक हथियारों के स्थान पर आधुनिक स्वचालित राइफलों (जैसे INSAS, AK-सीरीज), बॉडी वियर कैमरे, और कम घातक (Less-lethal) आधुनिक रक्षा हथियारों से लैस करना.
    • गतिशीलता और वाहन (Police Mobility Modernization): गश्त (Patrolling) और त्वरित प्रतिक्रिया टीमों (QRTs) के लिए आधुनिक जीपीएस-सक्षम वाहनों, ड्रोन और दुर्गम क्षेत्रों के लिए विशेष रूप से डिजाइन किए गए मोटर चालित वाहनों की व्यवस्था.
    • संचार प्रणालियां (Police Communication Systems): सुरक्षित और एन्क्रिप्टेड डिजिटल रेडियो नेटवर्क, जैसे पोलनेट (POLNET 2.0) का विस्तार करना ताकि आपातकालीन स्थितियों में निर्बाध संचार सुनिश्चित हो सके.
    • पुलिस थानों का आधुनिकीकरण (Police Stations Modernization): पुलिस थानों (Police Infrastructure India) को डिजिटल रिकॉर्ड रूम, फॉरेंसिक साक्ष्य संग्रह किट, महिला हेल्प डेस्क और स्वागत कक्षों से युक्त आधुनिक स्मार्ट (SMART) थानों में बदलना.

सरकार द्वारा चलाई जा रही अन्य संबंधित योजनाएं:

  • स्मार्ट पुलिसिंग पहल (SMART Policing Initiative): पुलिस को संवेदनशील (Strict), मोबाइल (Mobile), सतर्क (Alert), उत्तरदायी (Accountable), विश्वसनीय (Reliable) और तकनीकी रूप से सक्षम (Techno-savvy) बनाना.
  • राष्ट्रीय फॉरेंसिक विज्ञान विश्वविद्यालय (NFSU) का विस्तार: पुलिस जांच में वैज्ञानिक साक्ष्यों के उपयोग को बढ़ाने के लिए फॉरेंसिक इंफ्रास्ट्रक्चर का विकास.

मिशन का महत्व:

  • विधि व्यवस्था का सुदृढ़ीकरण: आधुनिक प्रौद्योगिकी से कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) की प्रतिक्रिया क्षमता (Response Time) और खुफिया जानकारी जुटाने की दक्षता में अभूतपूर्व सुधार होता है.
  • फॉरेंसिक आधारित त्वरित जांच: पारंपरिक प्रताड़ना प्रणालियों को वैज्ञानिक और डिजिटल फोरेंसिक साक्ष्य संग्रह से प्रतिस्थापित कर दोषसिद्धि दर (Conviction Rate) को बढ़ाया जा सकता है.
  • राष्ट्रीय सुरक्षा (National Security) पर प्रभाव: सीमावर्ती और आंतरिक संवेदनशील राज्यों में आधुनिक हथियारों और सुरक्षित संचार प्रणालियों की उपलब्धता से उग्रवाद और राष्ट्र-विरोधी तत्वों पर त्वरित कार्रवाई संभव होती है.
  • आर्थिक विकास के लिए अनुकूल वातावरण: एक सुरक्षित और अपराध-मुक्त समाज प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) और घरेलू व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करता है, जो भारत के आर्थिक लक्ष्यों के लिए अनिवार्य है.

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Police Modernization Mission India क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: यह राज्यों के पुलिस बलों को वित्तीय और तकनीकी सहायता प्रदान कर आंतरिक सुरक्षा (National Security) चुनौतियों से निपटने तथा पुलिसिंग को कुशल और नागरिक-अनुकूल बनाने की एक राष्ट्रीय पहल है.

प्रश्न 2: Assistance to States for Modernization of Police scheme के तहत राज्यों को किस तरह की सहायता मिलती है?

उत्तर: इस ASUMP scheme के तहत केंद्र सरकार राज्यों को आधुनिक हथियारों, वाहनों, उन्नत संचार उपकरणों और फॉरेंसिक सेटअप के लिए फंड (60:40 और 90:10 के अनुपात में) प्रदान करती है.

प्रश्न 3: ASUMP scheme का police infrastructure modernization में क्या महत्व है?

उत्तर: यह योजना पुलिस बुनियादी ढांचे (Police Infrastructure India) की कमियों को दूर कर थानों को डिजिटल बनाने, आधुनिक रिकॉर्ड रूम और सुरक्षित लॉजिस्टिक्स अवसंरचना विकसित करने में केंद्रीय भूमिका निभाती है.

प्रश्न 4: police modernization budget कितना है और इसका उपयोग किन क्षेत्रों में किया जाता है?

उत्तर: गृह मंत्रालय (MHA) के वार्षिक बजट आवंटन का एक बड़ा हिस्सा इसके लिए आरक्षित होता है, जिसका उपयोग मुख्यतः डिजिटल नेटवर्क, अत्याधुनिक हथियार, वाहन और फॉरेंसिक लैब के निर्माण में होता है.

प्रश्न 5: Indian police modernization के तहत police stations में कौन-कौन से बदलाव किए जाते हैं?

उत्तर: इसके तहत थानों में सीसीटीवी निगरानी, महिला हेल्प डेस्क, सुरक्षित कंप्यूटर नेटवर्क (CCTNS), स्वचालित हथियार स्टोर और नागरिक-अनुकूल स्वागत कक्ष स्थापित किए जाते हैं.

प्रश्न 6: police technology modernization से law enforcement agencies को क्या फायदा होता है?

उत्तर: तकनीकी आधुनिकीकरण से जांच एजेंसियों को डेटा-संचालित जांच, त्वरित साइबर क्राइम मैपिंग, अपराधियों की फिंगरप्रिंट/चेहरा पहचान तकनीक (AFIS) और अंतर-राज्यीय समन्वय में बड़ी मदद मिलती है.

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