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भारत में अनुसंधान को आसान बनाने के लिए नीतिगत सुधार (Policy Reforms for Ease of Research in India) | Apni Pathshala

Policy Reforms for Ease of Research in India

Policy Reforms for Ease of Research in India

Policy Reforms for Ease of Research in India – 

संदर्भ:

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री ने भारत में नवाचार, अनुसंधान और विज्ञान को प्रोत्साहित करने के लिए व्यापक नीतिगत सुधारों की घोषणा की है। इन सुधारों का उद्देश्य ‘Ease of Innovation’, ‘Ease of Doing Research’ और ‘Ease of Science’ को बढ़ावा देना है, जिससे वैज्ञानिक समुदाय और स्टार्टअप्स को अधिक सहयोगात्मक और अनुकूल वातावरण मिल सके।

भारत में Ease of Doing Research’ को बढ़ावा देने के लिए नीति सुधार

क्या है Ease of Doing Research’?

  • यह उन सुधारों को दर्शाता है जिनका उद्देश्य शोध कार्य को सरल, तेज़ और कम नौकरशाही बाधाओं वाला बनाना है।
  • इसका मुख्य फोकस है शैक्षणिक और वैज्ञानिक संस्थानों में स्वायत्तता और लचीलापन बढ़ाना।

मुख्य नीति पहलें और विशेषताएँ:

  1. GeM के बाहर खरीद की अनुमति:
    • अब वैज्ञानिक संस्थान विशेष वैज्ञानिक उपकरणों की खरीद के लिए सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) को बायपास कर सकते हैं।
    • इससे ऐसे उपकरणों की खरीद तेज़ होगी जो GeM पर उपलब्ध नहीं हैं।
  2. संस्थागत प्रमुखों को अधिक स्वायत्तता:
    • अब विश्वविद्यालयों के कुलपति और संस्थान निदेशक ₹200 करोड़ तक की ग्लोबल टेंडर इनक्वायरी (GTE) स्वीकृत कर सकते हैं।
    • इससे निर्णय लेने में तेजी आएगी।
  3. वित्तीय सीमाओं में वृद्धि:
    • सीधी खरीद की सीमा: ₹1 लाख → ₹2 लाख
    • विभागीय समिति से खरीद की सीमा: ₹1–10 लाख → ₹2–25 लाख
    • सीमित/विज्ञापित निविदा की सीमा: ₹50 लाख → ₹1 करोड़
  4. R&D में विलंब को कम करना:
    • ये सुधार उन प्रमुख समस्याओं को हल करते हैं जैसे:
      • खरीद प्रक्रियाओं में देरी, अनुमोदन में जटिलता, छूट प्रक्रिया में बाधाएँ
  1. ट्रस्टबेस्ड गवर्नेंस मॉडल:
    • सुधारों का आधार भरोसे और जवाबदेही” का मॉडल है।
    • इससे संस्थानों को स्वतंत्र और जिम्मेदार तरीके से अनुसंधान व्यय करने में मदद मिलेगी।

भारत में अनुसंधान एवं विकास (R&D) की स्थिति

 सरकारी निवेश: भारत का कुल R&D खर्च (GERD) 2010–11 में ₹60,196.75 करोड़ से बढ़कर 2020–21 में ₹1,27,380.96 करोड़ हो गया।

  • GDP के मुकाबले GERD केवल 7% है, जो वैश्विक औसत से कम है।

वित्त पोषण का स्रोत: लगभग 63% निवेश सार्वजनिक क्षेत्र से आता है, जबकि निजी क्षेत्र का योगदान मात्र 7% है।

  • 2025–26 के बजट में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग को ₹20,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं, जिससे निजी क्षेत्र आधारित R&D फंड शुरू किया जाएगा।

अनुसंधान अवसंरचना: IITs और IISc जैसे संस्थान उन्नत सुविधाओं और उच्च गुणवत्ता वाले शोध कार्य के लिए प्रमुख हैं।

  • भारत उच्च शिक्षा में दुनिया में तीसरे स्थान पर है (अमेरिका और चीन के बाद)।

शोध निष्कर्ष: भारत शोध प्रकाशनों में तीसरे स्थान पर है (2022 में 3 लाख से अधिक), लेकिन शोध की गुणवत्ता और प्रभाव में सुधार की आवश्यकता है।

  • पेटेंट फाइलिंग में भारत 6वें स्थान पर है, परंतु शोध को व्यावसायिक उत्पाद में बदलने की क्षमता सीमित है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग: भारत वैश्विक अनुसंधान साझेदारियों में सक्रिय है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय फंडिंग प्राप्त करने में चुनौतियाँ बनी हुई हैं।

सुधारों का महत्व:

तेजी से प्रोजेक्ट निष्पादन: नौकरशाही देरी में कमी से वैज्ञानिक शोध तेजी से आगे बढ़ सकेंगे।

स्टार्टअप्स और शोधार्थियों को बढ़ावा: उच्च स्तरीय उपकरणों तक आसान पहुंच, युवा नवाचारकर्ताओं को प्रेरित करेगी।

R&D निवेश को प्रोत्साहन: यह नीति सार्वजनिक व निजी क्षेत्रों के R&D सहयोग के लिए अनुकूल माहौल का संकेत देती है।

नई शिक्षा नीति (NEP 2020) का समर्थन: बहु-विषयक शोध और छात्र-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देती है।

$100 अरब विज्ञान अर्थव्यवस्था का निर्माण: स्पेस और न्यूक्लियर क्षेत्र की तरह सभी शोध क्षेत्रों में उदारीकरण की सफलता दोहराने का लक्ष्य।

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