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फर्न की नई प्रजाति “Pteris madhusoodananii” की खोज

फर्न की नई प्रजाति “Pteris madhusoodananii” की खोज

Pteris madhusoodananii

संदर्भ:

हाल ही में भारतीय वनस्पतिशास्त्रियों ने तमिलनाडु राज्य की कोल्ली हिल्स (पूर्वी घाट) में फर्न (Fern) की एक दुर्लभ और नई प्रजाति टेरिस मधुसूदनन (Pteris madhusoodananii) की महत्वपूर्ण खोज की।

टेरिस मधुसूदनन (Pteris madhusoodananii) के बारे में:

  • भौगोलिक क्षेत्र: यह नई प्रजाति भारत के पूर्वी घाट (Eastern Ghats) में स्थित कोल्ली हिल्स (Kolli Hills) की पहाड़ियों से खोजी गई है.
    • यह फर्न मुख्य रूप से पुलीअंसोलाई शोला वन (Puliansolai Shola) के बाहरी इलाकों में समुद्र तल से 1100 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर, नम और छायादार स्थानों पर पाया गया.
    • वर्तमान में इसकी उपस्थिति मात्र 8 वर्ग किलोमीटर के एक गैर-संरक्षित क्षेत्र में दर्ज की गई है. 
  • खोजकर्ता: इस प्रजाति को गवर्नमेंट विक्टोरिया कॉलेज (पलक्कड़), श्री व्यास एनएसएस कॉलेज और गवर्नमेंट कॉलेज चित्तूर के शोधकर्ताओं (के.एस. अभिलाष, एलन एलेक्स फिलिप आदि) की एक संयुक्त टीम ने खोजा.
  • वैज्ञानिक नामकरण: इस प्रजाति का विशिष्ट नाम ‘मधुसूदनन’ (Pteris madhusoodananii) कालीकट विश्वविद्यालय के वनस्पति विज्ञान विभाग के पूर्व प्रमुख प्रोफेसर डॉ. पी. वी. मधुसूदनन के सम्मान में रखा गया है. 
  • प्रकाशन: इस नई प्रजाति का आधिकारिक विवरण 30 जुलाई 2026 को प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय पत्रिका ‘नॉर्डिक जर्नल ऑफ बॉटनी’ (Nordic Journal of Botany) में प्रकाशित हुआ.
  • वर्गीकरण: 
    • जगत (Kingdom): पादप (Plantae)
    • संघ (Division): टेरिडोफाइटा (Pteridophyta)
    • कुल (Family): टेरिडेसी (Pteridaceae)
    • वंश (Genus): टेरिस (Pteris)
  • विशेषताएं:
    • पत्तियों की बनावट (Lamina Texture): इसकी पत्तियाँ (Fronds) अत्यधिक सख्त, चमड़े जैसी (Leathery) और चमकदार गहरे हरे रंग की होती हैं.
    • अद्वितीय वास्तुकला (Pinna-Pinnule Architecture): इस फर्न की छोटी पत्तियाँ डंठल के साथ एक विशिष्ट पैटर्न में व्यवस्थित होती हैं. इसके निचले खंडों के आधार पर एक बहुत ही प्रमुख उभार या पाली (Lobe) पाई जाती है, जो इसे इस वंश की अन्य प्रजातियों से अलग करती है.
    • बीजाणु सूक्ष्म संरचना (Spore Micromorphology): स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (SEM) परीक्षण से पता चला है कि इसके बीजाणुओं के चारों ओर एक संकीर्ण और लहरदार किनारे वाली पट्टी होती है जिसे ‘सिंगुलम’ (Cingulum) कहा जाता है. अन्य समान फर्न प्रजातियों में यह पट्टी चिकनी और चौड़ी होती है.
  • वैश्विक स्थिति: टेरिस (Pteris) वंश के अंतर्गत दुनिया भर में फर्न की लगभग 300 प्रजातियां पाई जाती हैं, जो मुख्य रूप से उष्णकटिबंधीय और उपोष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में फैली हैं.
  • भारत में स्थिति: भारत में टेरिडोफाइट्स (Ferns and Allies) की समृद्ध विविधता है. भारत में फर्न की कुल 1,000 से अधिक प्रजातियां पाई जाती हैं.  
  • आईयूसीएन स्थिति (IUCN Status): अत्यधिक सीमित भौगोलिक सीमा और केवल दो छोटे स्थानों पर उपस्थिति के कारण, इस प्रजाति को प्रारंभिक रूप से आईयूसीएन (IUCN) रेड लिस्ट के मानदंडों के तहत ‘अत्यंत संकटग्रस्त’ (Critically Endangered – CR) श्रेणी में वर्गीकृत किया गया है.
  • पारिस्थितिकीय खतरे: सड़क निर्माण, पेड़ों की कटाई और जंगलों को कृषि भूमि में बदलने जैसी मानवीय गतिविधियों के कारण इसके प्राकृतिक आवास का तेजी से विखंडन (Habitat Fragmentation) हो रहा है. 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Pteris madhusoodanan क्या है?

उत्तर: यह भारत में खोजी गई फर्न (Fern/टेरिडोफाइटा) की एक अत्यंत दुर्लभ, नई और संकटग्रस्त पादप प्रजाति (New Fern Species India) है.

प्रश्न 2: Pteris madhusoodanan की खोज कहां हुई?

उत्तर: इसकी खोज भारत के दक्षिणी राज्य तमिलनाडु के कोल्ली हिल्स (पूर्वी घाट) के छायादार शोला वन क्षेत्रों में की गई है.

प्रश्न 3: यह नई fern species भारत के किस क्षेत्र में पाई गई?

उत्तर: यह नई प्रजाति भारत के पूर्वी घाट (Eastern Ghats) पर्वतीय क्षेत्र में पाई गई है, और यह इसी क्षेत्र की स्थानिक (Endemic) है.

प्रश्न 4: Pteris madhusoodanan की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?

उत्तर: इसकी पत्तियाँ सख्त व चमड़े जैसी होती हैं, इसके निचले हिस्से में विशिष्ट पाली (Lobe) होती है और इसके बीजाणुओं में संकीर्ण, लहरदार सिंगुलम (Cingulum) होता है. 

प्रश्न 5: इस नई fern species का नाम किसके नाम पर रखा गया है?

उत्तर: इसका नाम प्रसिद्ध भारतीय वनस्पतिशास्त्री और कालीकट विश्वविद्यालय के पूर्व प्रोफेसर डॉ. पी. वी. मधुसूदनन के सम्मान में रखा गया है.र की खाड़ी के तट पर स्थित है।

प्रश्न 4: VOC Port ने Scope-2 emissions को कैसे खत्म किया?

उत्तर: बंदरगाह ने 7.04 मेगावाट सौर ऊर्जा और 2 मेगावाट पवन ऊर्जा का ऐसा ढांचा तैयार किया जिसका उत्पादन इसके कुल बिजली उपभोग से अधिक हो गया।

प्रश्न 5: Port को renewable energy से क्या फायदा हुआ?

उत्तर: इससे बंदरगाह का शुद्ध कार्बन उत्सर्जन 45% कम हो गया, बिजली खर्च में भारी बचत हुई और यह कार्बन क्रेडिट से राजस्व कमाने के योग्य बना।

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