RELIEF Scheme Extension 2027: सरकार ने योजना के घटक-II की समय-सीमा को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाया
संदर्भ:
हाल ही में वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय (Ministry of Commerce and Industry) ने निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए रिलीफ योजना (RELIEF Scheme) के घटक-II की समय-सीमा को 31 मार्च 2027 तक बढ़ाने की घोषणा की।
रिलीफ योजना के बारे में:
- परिचय: RELIEF Scheme, भारत सरकार द्वारा शुरू की गई एक समयबद्ध और लक्षित वित्तीय सहायता तथा जोखिम-शमन पहल (Targeted Financial Assistance and Risk-Mitigation Measure) है।
- पूरा नाम: निर्यात सुविधा के लिए लचीलापन और रसद हस्तक्षेप (Resilience & Logistics Intervention for Export Facilitation – RELIEF)।
- उद्देश्य: इसका मुख्य उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट (West Asia Export Crisis) और खाड़ी क्षेत्र में भू-राजनीतिक व्यवधानों के कारण माल ढुलाई लागत (Freight Costs) तथा बीमा प्रीमियम में हुई अत्यधिक वृद्धि से भारतीय निर्यातकों को सुरक्षा प्रदान करना है।
- शुरुआत: इस विशेष योजना को मूल रूप से 19 मार्च 2026 को लॉन्च किया गया था।
- मंत्रालय: यह योजना वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय और विदेश व्यापार महानिदेशालय (DGFT) के तत्वावधान में संचालित है।
- कार्यान्वयन संस्था: भारतीय निर्यात ऋण गारंटी निगम (Export Credit Guarantee Corporation of India – ECGC) इस योजना की नोडल और कार्यान्वयन एजेंसी है।
- मूल कार्यक्रम (Parent Programme): यह योजना निर्यात संवर्धन मिशन (Export Promotion Mission – EPM) का एक हिस्सा है, जिसका कुल बजटीय परिव्यय ₹497 करोड़ है।
- योजना के विभिन्न घटक (Components of the Scheme): इस योजना को निर्यात चक्र के विभिन्न चरणों के आधार पर तीन मुख्य घटकों में विभाजित किया गया है:
- घटक-I (Component I): मौजूदा ईसीजीसी पॉलिसीधारकों के लिए ₹56 करोड़ का कोष, जो युद्ध संबंधी जोखिमों (War Risks) के लिए 100% तक का बढ़ा हुआ कवर प्रदान करता है।
- घटक-II (Component II): आगामी शिपमेंट के लिए ₹159 करोड़ का प्रावधान, जिसके तहत नए और मौजूदा निर्यातकों को 95 प्रतिशत जोखिम कवरेज (95% Risk Coverage) सुनिश्चित किया जाता है। सरकार ने इसी घटक की समय-सीमा बढ़ाकर 31 मार्च 2027 की है।
- घटक-III (Component III): गैर-ईसीजीसी MSME निर्यातकों के लिए ₹282 करोड़ का आवंटन, जो असाधारण सरचार्ज या माल ढुलाई लागत की 50% प्रतिपूर्ति (Reimbursement) प्रदान करता है।
- प्रमुख विशेषताएं:
- बढ़ा हुआ बीमा कवर (Enhanced Insurance Cover): घटक-II के तहत आगामी शिपमेंट के लिए निर्यातकों को 95% तक जोखिम सुरक्षा (RELIEF Scheme Risk Coverage) प्रदान की जाती है।
- प्रीमियम का स्थिरीकरण (Premium Protection): पात्र निर्यातकों को व्यवधान-पूर्व के स्तर (Pre-disruption Levels) पर बीमा प्रीमियम का लाभ मिलता है, जिससे वैश्विक संकट के समय भी वे अतिरिक्त वित्तीय बोझ से बचे रहते हैं।
- कार्गो का प्रकार: यह लाभ फुल कंटेनर लोड (FCL), लेस दैन कंटेनर लोड (LCL) और रेफ्रिजरेटेड (रीफर) कंटेनर पर समान रूप से लागू होता है।
- अपवाद: यह योजना ऊर्जा शिपमेंट (Energy Shipments) जैसे कच्चे तेल और गैस के निर्यात पर लागू नहीं होती है।
- डिजिटल प्रक्रिया: लाभ प्राप्त करने के इच्छुक निर्यातक सहायक दस्तावेजों के साथ ECGC ग्राहक पोर्टल (www.ecgcltd.in) के माध्यम से ऑनलाइन दावे प्रस्तुत कर सकते हैं।
भारत के निर्यात पर इस निर्णय का प्रभाव:
- वैश्विक अनिश्चितता में स्थिरता (Stability Amid Global Uncertainty): पश्चिम एशिया और लाल सागर (Red Sea) संकट के कारण समुद्री व्यापार मार्ग बाधित हुए हैं।
- यह विस्तार भारतीय निर्यातकों को एक वित्तीय सुरक्षा कवच (Financial Safety Net) प्रदान करता है, जिससे वे बिना किसी डर के वैश्विक क्रय आदेश (International Orders) स्वीकार कर सकते हैं।
- लॉजिस्टिक लागत का न्यूनीकरण (Mitigation of Logistics Cost): युद्ध जोखिम और बढ़े हुए समुद्री भाड़े (Freight Rates) के कारण भारतीय निर्यात की प्रतिस्पर्धात्मकता घट रही थी। प्रीमियम दरों के स्थिर रहने से निर्यातकों के लाभ मार्जिन की रक्षा होगी।
- MSME क्षेत्र को संबल (Support to MSME Sector): भारत के कुल निर्यात में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) की हिस्सेदारी लगभग 45% है। बड़े कॉर्पोरेट्स की तुलना में MSME में जोखिम सोखने की क्षमता कम होती है, इसलिए 95% का यह ईसीजीसी जोखिम कवर (ECGC Export Insurance) उनके अस्तित्व के लिए संजीवनी का काम करेगा।
- आपूर्ति श्रृंखला का लचीलापन (Supply Chain Resilience): यह सरकारी निर्यात सहायता पहल (Government Export Support Initiative) भारतीय उत्पादों की वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Global Supply Chain) में विश्वसनीयता बनाए रखती है, जिससे भारत एक भरोसेमंद व्यापार भागीदार के रूप में उभरता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: RELIEF योजना क्या है और इसका मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: यह वाणिज्य मंत्रालय की एक समयबद्ध पहल (RELIEF Scheme India 2026) है, जिसका उद्देश्य पश्चिम एशिया संकट के कारण बढ़े लॉजिस्टिक और बीमा जोखिमों से भारतीय निर्यातकों की रक्षा करना है।
प्रश्न 2: सरकार ने RELIEF योजना के घटक-II की समय-सीमा कब तक बढ़ाई है?
उत्तर: वाणिज्य विभाग ने भू-राजनीतिक व्यवधानों को देखते हुए इस योजना के दूसरे घटक की समय-सीमा को 31 मार्च 2027 तक विस्तारित कर दिया है।
प्रश्न 3: RELIEF योजना के तहत किन निर्यातकों को लाभ मिलता है?
उत्तर: यह लाभ 16 मार्च 2026 को या उसके बाद ईसीजीसी (ECGC) से स्टैंडअलोन या होल टर्नओवर बीमा पॉलिसी लेने वाले पात्र भारतीय निर्यातकों को प्राप्त होता है।
प्रश्न 4: RELIEF योजना के घटक-II के अंतर्गत कितना जोखिम कवर प्रदान किया जाता है?
उत्तर: इसके तहत निर्दिष्ट क्षेत्रों में भेजे जाने वाले योग्य कंटेनर कार्गो शिपमेंट के लिए 95 प्रतिशत तक जोखिम कवरेज (95% Risk Coverage) प्रदान किया जाता है।
प्रश्न 5: सरकार ने RELIEF योजना की समय-सीमा बढ़ाने का फैसला क्यों लिया?
उत्तर: पश्चिम एशिया (West Asia Crisis) में जारी निरंतर संघर्ष और खाड़ी एवं समीपवर्ती समुद्री मार्गों पर रसद अनिश्चितताओं के कारण निर्यात प्रवाह बनाए रखने के लिए यह निर्णय लिया गया।
