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Sarnath UNESCO World Heritage – प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 

Sarnath UNESCO World Heritage – प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल 

Sarnath UNESCO World Heritage

संदर्भ:

हाल ही में दक्षिण कोरिया के बुसान में आयोजित यूनेस्को (UNESCO) की विश्व धरोहर समिति के 48वें सत्र में भारत के प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ (Sarnath UNESCO World Heritage) को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची (World Heritage List) में शामिल कर लिया गया है। इसके साथ ही यह भारत का 45वां और उत्तर प्रदेश का चौथा विश्व धरोहर स्थल बन गया है। 

प्राचीन बौद्ध स्थल सारनाथ (Sarnath) के बारे में:

  • परिचय: सारनाथ बौद्ध धर्म के चार सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक है। बौद्ध संघ की स्थापना भी इसी स्थान पर हुई थी।
  • स्थान (Location): यह उत्तर प्रदेश में अवस्थित हैं। यह वाराणसी (काशी) शहर से लगभग 10 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में स्थित है। यह गंगा और वरुणा नदियों के संगम के निकट स्थित है।
  • क्षेत्रफल (Area): सारनाथ का मुख्य पुरातात्विक परिसर (Archaeological Site) लगभग 0.5 वर्ग किलोमीटर (लगभग 120-130 एकड़) के क्षेत्र में फैला हुआ है। हालांकि, विस्तृत पर्यटन क्षेत्र इससे बड़ा है। 
  • ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
    • प्राचीन नाम: प्राचीन बौद्ध ग्रंथों में सारनाथ को ऋषिपत्तन, इसिपतना और मृगदाव (हिरण उद्यान) के नाम से पुकारा गया है। आधुनिक नाम ‘सारनाथ’ की उत्पत्ति ‘सारंगनाथ’ (मृगों के स्वामी) अर्थात भगवान बुद्ध से मानी जाती है। 
    • धार्मिक महत्व: यह बौद्ध धर्म (Buddhism) के चार प्रमुख पवित्र तीर्थस्थलों (लुम्बिनी, बोधगया, सारनाथ और कुशीनगर) में से एक है। ज्ञान प्राप्ति के पश्चात गौतम बुद्ध ने अपने प्रथम पांच शिष्यों को यहीं अपना पहला उपदेश दिया था। 
    • ऐतिहासिक निरंतरता: भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के उत्खनन के अनुसार, यहाँ ईसा पूर्व से लेकर 12वीं शताब्दी ईस्वी तक (मौर्य, कुषाण, गुप्त, पाल और गहड़वाल राजवंश) लगभग 16 शताब्दियों का क्रमिक इतिहास मिलता है। 
  • निर्माणकर्ता: सारनाथ में समय-समय पर अलग-अलग राजाओं और शासकों ने यहाँ निर्माण कार्य करवाए:
    • सम्राट अशोक (मौर्य वंश): तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व (3rd Century BCE) में इन्होंने यहाँ प्रसिद्ध धमेख स्तूप, अशोक स्तंभ (सिंह चतुर्मुख) और सिंहपुर का निर्माण करवाया।
    • गुप्त राजवंश: चौथी से छठी शताब्दी के दौरान गुप्त राजाओं ने सारनाथ का पुनरुद्धार किया, यहाँ कई सुंदर बौद्ध मूर्तियों और मंदिरों का निर्माण करवाया।
    • कुमारदेवी (गाहड़वाल वंश): 12वीं शताब्दी में कन्नौज की रानी कुमारदेवी ने यहाँ एक विशाल ‘धर्मचक्र-जिन-विहार’ (मठ) बनवाया था।
  • प्रमुख स्मारक:
  • चौखंडी स्तूप (Chaukhandi Stupa): यह ईंटों से निर्मित एक ऊंचे चबूतरे पर स्थित स्तूप है, जो मूल रूप से गुप्त काल (4थी-5वीं शताब्दी ईस्वी) का है। यह उस स्थान का प्रतीक है जहां बुद्ध अपने पांच साथियों से दोबारा मिले थे।
    • इस स्तूप के शीर्ष पर एक अष्टकोणीय मीनार (Octagonal Tower) स्थित है, जिसे 1588 ईस्वी में राजा टोडरमल के पुत्र गोवर्धन ने हुमायूं की सारनाथ यात्रा की स्मृति में बनवाया था।
  • धमेख स्तूप (Dhamek Stupa): यह सारनाथ का सबसे विशाल और ध्यानाकर्षण करने वाला स्तूप है। गुप्त काल में निर्मित इस बेलनाकार स्तूप की ऊंचाई 43.6 मीटर है। इसकी दीवारों पर गुप्तकालीन उत्कृष्ट ज्यामितीय और पुष्प आकृतियों की नक्काशी (Floral Carvings) की गई है। माना जाता है कि इसी स्थान पर बुद्ध ने ‘धम्मचक्कपवत्तन सुत्त’ (Dhammacakkappavattana Sutta) दिया था।
  • धर्मराजिका स्तूप (Dharmarajika Stupa): इसका निर्माण मौर्य सम्राट अशोक ने बुद्ध के मूल धातु अवशेषों (Relics) को सुरक्षित रखने के लिए करवाया था। 
  • अशोक स्तंभ (Ashokan Pillar): बलुआ पत्थर से निर्मित इस ऐतिहासिक स्तंभ के शीर्ष पर सिंह चतुर्मुख (Lion Capital) स्थापित था, जो वर्तमान में भारत का राष्ट्रीय प्रतीक (National Emblem) है। इसके चक्र को भारतीय राष्ट्रीय ध्वज में स्थान दिया गया है।
  • मूलगंध कुटी विहार (Mulagandha Kuti Vihara): यह वह स्थान है जहां बुद्ध ध्यान लगाते थे। आधुनिक काल में यहाँ महाबोधि सोसायटी द्वारा एक सुंदर मंदिर बनाया गया है जिसमें जापान के कलाकार कोत्सुत्सु नोसु द्वारा बनाए गए भित्तिचित्र (Murals) मौजूद हैं। 

भारत के शीर्ष यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल (Top UNESCO World Heritage Sites in India):

  • अजंता की गुफाएं (महाराष्ट्र – 1983): भारत के सर्वप्रथम यूनेस्को स्थलों में शामिल। यह गुफाएं बौद्ध वास्तुकला और भित्तिचित्रों (Fresco Paintings) का अनूठा उदाहरण हैं।
  • एलोरा की गुफाएं (महाराष्ट्र – 1983): भारत का प्रथम बहु-धार्मिक गुफा परिसर (हिंदू, बौद्ध, जैन)। यहाँ का कैलाश मंदिर दुनिया की सबसे बड़ी एकल चट्टान काटकर बनाई गई (Monolithic) संरचना है।
  • आगरा का किला (उत्तर प्रदेश – 1983): उत्तर प्रदेश (Uttar Pradesh Tourism) का प्रथम विश्व धरोहर स्थल, जो मुगल सैन्य वास्तुकला की भव्यता को दर्शाता है।
  • ताजमहल (उत्तर प्रदेश – 1983): सफेद संगमरमर से निर्मित विश्व के सात अजूबों में से एक और भारत का सबसे प्रसिद्ध सांस्कृतिक स्मारक।
  • महाबलिपुरम के स्मारक (तमिलनाडु – 1984): पल्लव राजवंश द्वारा निर्मित रथ मंदिर और तटीय मंदिर (Shore Temple), जो दक्षिण भारतीय वास्तुकला के शुरुआती स्तंभ हैं।
  • कोणार्क का सूर्य मंदिर (ओडिशा – 1984): ओडिशा राज्य का प्रथम स्थल। कलिंग वास्तुकला में निर्मित यह मंदिर एक विशाल रथ के आकार का है, जिसे ‘ब्लैक पैगोडा’ भी कहा जाता है।
  • काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम – 1985): भारत के शुरुआती प्राकृतिक धरोहर स्थलों में से एक, जो दुनिया के दो-तिहाई एक सींग वाले गैंडों (One-horned Rhinos) का घर है।
  • केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान (राजस्थान – 1985): राजस्थान का पहला प्राकृतिक स्थल, जो हजारों दुर्लभ और विलुप्तप्राय पक्षियों (जैसे साइबेरियन क्रेन) के लिए प्रसिद्ध है।
  • हम्पी के स्मारक (कर्नाटक – 1986): विजयनगर साम्राज्य की प्राचीन राजधानी के अवशेष, जो अपनी पत्थर की नक्काशी और विट्ठल मंदिर के रथ के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • खजुराहो के स्मारक (मध्य प्रदेश – 1986): चंदेल शासकों द्वारा निर्मित नागर शैली (Nagara Style) के मंदिर, जो अपनी कामुक मूर्तियों और स्थापत्य कला के लिए विख्यात हैं।
  • सांची के बौद्ध स्मारक (मध्य प्रदेश – 1989): भारत का सबसे प्राचीन पत्थर का ढांचा, जिसका महान स्तूप मौर्य सम्राट अशोक द्वारा स्थापित किया गया था।
  • रानी की वाव (गुजरात – 2014): पाटण में स्थित एक अनूठी भूमिगत जल वास्तुकला (Stepwell), जिसे मारू-गुर्जर शैली में निर्मित किया गया है।
  • नालंदा महाविहार (बिहार – 2016): प्राचीन भारत का एक वैश्विक शिक्षा केंद्र (Monastic University), जो बौद्ध दर्शन और ज्ञान का गढ़ था।
  • धोलावीरा (गुजरात – 2021): भारत में सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) का पहला शहर जिसे यह दर्जा मिला; यह अपनी उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली के लिए प्रसिद्ध है।
  • मोइदम्स – अहोम राजवंश की दफन प्रणाली (असम – 2024): उत्तर-पूर्वी भारत का पहला सांस्कृतिक स्थल, जिसे असम का ‘पिरामिड’ भी कहा जाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: सारनाथ को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में क्यों शामिल किया गया?

उत्तर: सारनाथ को उसके असाधारण सार्वभौमिक मूल्य (Outstanding Universal Value), अद्वितीय बौद्ध स्थापत्य कला और वैश्विक स्तर पर शांति व करुणा के ऐतिहासिक प्रसार के कारण शामिल किया गया है।

प्रश्न 2: सारनाथ का ऐतिहासिक महत्व क्या है?

उत्तर: यह वह प्राचीन स्थल है जहां सम्राट अशोक ने बौद्ध धर्म के प्रसार के लिए प्रख्यात स्तंभ और स्तूप बनवाए, और यहीं से भारत का राष्ट्रीय प्रतीक लिया गया है। 

प्रश्न 3: यूनेस्को विश्व धरोहर सूची क्या है?

उत्तर: यह यूनेस्को द्वारा 1972 के कन्वेंशन के तहत वैश्विक स्तर पर मानवीय संस्कृति, वास्तुकला और प्राकृतिक दृष्टि से उत्कृष्ट महत्व के स्थलों को दिया जाने वाला एक अंतरराष्ट्रीय संरक्षण दर्जा है।

प्रश्न 4: भारत के कितने स्थल यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं?

उत्तर: सारनाथ के शामिल होने के बाद, वर्तमान में भारत के कुल 45 स्थल (37 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक और 1 मिश्रित) यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल हैं। 

प्रश्न 5: सारनाथ का बौद्ध धर्म से क्या संबंध है?

उत्तर: बुद्ध ने ज्ञान प्राप्ति के बाद अपना पहला उपदेश (धम्मचक्कपवत्तन) यहीं दिया था, जिससे बौद्ध संघ की स्थापना और बौद्ध शिक्षाओं की शुरुआत हुई थी।

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