Weaves of India Festival – नई दिल्ली में शुरू हुआ महोत्सव, जानिए क्या हैं यह महोत्सव?
संदर्भ:
हाल ही में नई दिल्ली के जनपथ स्थित सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम में 24 जुलाई 2026 को भारत की समृद्ध वस्त्र विरासत को प्रदर्शित करने वाले राष्ट्रीय ‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव (Weaves of India Festival) का भव्य शुभारंभ किया गया।
‘वीव्स ऑफ़ इंडिया’ महोत्सव (Weaves of India Festival) क्या हैं?
- परिचय: यह महोत्सव भारत के पारंपरिक हथकरघा (Indian Handloom), विशिष्ट क्षेत्रीय बुनाई प्रणालियों और उत्कृष्ट शिल्प कौशल को बढ़ावा देने वाला एक सर्वोच्च राष्ट्रीय मंच है।
- यह देश भर के ग्रामीण बुनकरों, डिजाइनरों और शहरी उपभोक्ताओं के बीच एक सीधा सेतु स्थापित करता है, ताकि भारत की वस्त्र विरासत (Textile Heritage) को समकालीन बाजार में पुनर्जीवित किया जा सके।
- आयोजन स्थल: यह महोत्सव नई दिल्ली के ऐतिहासिक सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज एम्पोरियम (CCIE), जनपथ में आयोजित किया जा रहा है।
- आयोजन दिनांक: इस विशेष प्रदर्शनी का आयोजन 24 जुलाई से 7 अगस्त 2026 तक किया जा रहा है।
- यह महोत्सव 7 अगस्त को मनाए जाने वाले आगामी 12वें राष्ट्रीय हथकरघा दिवस (National Handloom Day) के उपलक्ष्य में आयोजित शुरुआती उत्सवों का हिस्सा है।
- उद्देश्य: मध्यस्थों (Middlemen) को हटाकर ग्रामीण कारीगरों और बुनकरों को सीधे राष्ट्रीय स्तर का बाजार (Direct Market Access) उपलब्ध कराना ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
- प्रामाणिक और शुद्ध हस्तनिर्मित उत्पादों के प्रति शहरी आबादी में समझ विकसित करना। [1, 3]
- पर्यावरण के अनुकूल, जैविक और प्राकृतिक रंगाई प्रणालियों पर आधारित टिकाऊ बुनाई परंपरा (Weaving Tradition) का संवर्धन करना।
- आयोजक मंत्रालय: इसका आयोजन भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय (Ministry of Textiles) के अंतर्गत विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा किया जा रहा है।
- इस परियोजना को क्रियान्वित करने में सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCIC) ने पूर्ण प्रशासनिक एवं तकनीकी सहयोग प्रदान किया है।
- मुख्य घटक:
- 116 विरासत बुनाई शैलियों का समागम: महोत्सव का मुख्य आकर्षण देश भर की 116 अद्वितीय पारंपरिक विरासत बुनाई शैलियों को एक ही छत के नीचे प्रदर्शित करना है।
- राज्यों की विविधता: इसमें ओडिशा, आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, मणिपुर, छत्तीसगढ़, बिहार, तेलंगाना, गुजरात, जम्मू-कश्मीर और त्रिपुरा सहित विभिन्न राज्यों की पारंपरिक शिल्पकला शामिल है।
- भौगोलिक संकेतक (GI) और प्रामाणिकता: इस हब में प्रदर्शित वस्त्रों पर ‘हथकरघा मार्क’ (Handloom Mark) और सिल्क मार्क’ (Silk Mark) की अनिवार्यता है, जो नकली पावरलूम उत्पादों के खिलाफ उपभोक्ताओं को सुरक्षा देती है।
- लाइव बुनाई कार्यशाला: प्रदर्शनी में आगंतुकों और शोधकर्ताओं के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता बुनकरों द्वारा करघे (Looms) पर लाइव बुनाई का प्रदर्शन किया जा रहा है ताकि इस कला की जटिलता को समझा जा सके।
- क्रेता-विक्रेता संवाद (B2B Platforms): फैशन डिजाइनरों, वस्त्र संवर्धकों (Textile Promoters) और राष्ट्रीय शिल्पकारों (Indian Crafts) के बीच सीधे संवाद और दीर्घकालिक व्यापारिक समझौतों के लिए विशेष बिजनेस लाउंज स्थापित किए गए हैं।
- महत्व:
- ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बल: यह शिल्पकार महोत्सव (Artisan Festival) सीधे तौर पर देश के सुदूर क्षेत्रों के बुनकरों को बिना किसी वित्तीय कटौती के शत-प्रतिशत लाभ प्रदान करने में सफल रहा है।
- सांस्कृतिक कूटनीति (Cultural Diplomacy): भारत के हथकरघा उद्योग को वैश्विक ‘स्लो फैशन’ (Slow Fashion) और सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के पूरक के रूप में स्थापित करके यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की सॉफ्ट पावर को मजबूत करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: वीव्स ऑफ़ इंडिया महोत्सव क्या है?
उत्तर: यह भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष राष्ट्रीय हथकरघा प्रदर्शनी (Handloom Exhibition) है, जो भारत की समृद्ध वस्त्र कला को प्रदर्शित करती है।
प्रश्न 2: इस महोत्सव का उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य देश की पारंपरिक बुनाई (Traditional Weaving) शैलियों का संरक्षण करना और बुनकरों को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़कर उनके उत्पादों को बढ़ावा देना है।
प्रश्न 3: इसमें किन राज्यों की पारंपरिक बुनाई प्रदर्शित की जाती है?
उत्तर: इसमें उत्तर प्रदेश की बनारसी, तमिलनाडु की कांचीपुरम सिल्क, ओडिशा की संबलपुरी इकत, बिहार की बावनबूटी और जम्मू-कश्मीर की कानी पश्मीना सहित कई राज्यों की कलाएं शामिल हैं।
प्रश्न 4: इस कार्यक्रम का आयोजन कौन करता है?
उत्तर: इसका आयोजन वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय द्वारा सेंट्रल कॉटेज इंडस्ट्रीज कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (CCIC) के सहयोग से किया जाता है।
प्रश्न 5: बुनकरों को इससे क्या लाभ मिलता है?
उत्तर: बुनकरों को बिना बिचौलियों के सीधा बाजार मिलता है, उनके पारंपरिक ज्ञान को राष्ट्रीय पहचान (Handloom Promotion) मिलती है और बड़े डिजाइनरों के साथ व्यापारिक संबंध बनते हैं।
