National Coastal Mission 2.0: परिचय, बजट, विशेषताएं एवं महत्व
संदर्भ:
हाल ही में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 (National Coastal Mission 2.0) के प्रभावी कार्यान्वयन के लिए आधिकारिक दिशानिर्देश जारी किए।
राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 के बारे में:
- परिचय: राष्ट्रीय तटीय मिशन 2.0 (NCM 2.0) भारत सरकार की एक व्यापक पर्यावरण और तटीय प्रबंधन पहल है। यह मिशन इसके पहले चरण (NCM 1.0, जो 2021-22 से 2025-26 तक क्रियान्वित था) का विस्तृत रूप है।
- इसका प्राथमिक लक्ष्य भारतीय तटीय पारिस्थितिकी तंत्र (Indian Coastal Ecosystem) का संरक्षण, जलवायु लचीलापन बढ़ाना और समुद्री संसाधनों का सतत उपयोग सुनिश्चित करना है।
- संचालन: इस योजना का प्रशासन भारत सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय (MoEFCC) द्वारा सीधे किया जाएगा।
- कुल स्वीकृत बजट: इस मिशन के लिए केंद्र सरकार द्वारा ₹767 करोड़ का कुल वित्तीय परिव्यय स्वीकृत किया गया है।
- प्रकार: यह 100% एक केंद्रीय क्षेत्र योजना (Central Sector Scheme) है, जिसका संपूर्ण वित्तपोषण केंद्र सरकार द्वारा किया जाता है।
- समय अवधि: यह तटीय मिशन 2.0 बजट (Coastal Mission 2.0 Budget) वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक की छह साल की अवधि के लिए आवंटित है।
- कवरेज: यह मिशन भारत की लगभग 7,516.6 किलोमीटर लंबी मुख्य भूमि और द्वीपीय तटरेखा को कवर करता है। इसे देश के 9 तटीय राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों में पूरी तरह लागू किया जाएगा।
- फोकस क्षेत्र:
- जलवायु लचीलापन: तटीय क्षेत्रों की जलवायु परिवर्तन और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने की क्षमता को मजबूत करना।
- नीली अर्थव्यवस्था (Blue Economy): समुद्री और तटीय संसाधनों के सतत उपयोग के माध्यम से आर्थिक विकास और रोजगार सृजन को बढ़ावा देना।
- सतत प्रबंधन: तटीय राज्यों और स्थानीय समुदायों के सहयोग से पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखना।
- विशेषताएं:
- समग्र सरकारी दृष्टिकोण (Whole-of-Government Approach): यह राष्ट्रीय तटीय मिशन भारत (National Coastal Mission India) केंद्र, राज्य तटीय क्षेत्र प्रबंधन प्राधिकरणों (SCZMAs) और जिला-स्तरीय निकायों के बीच संस्थागत जिम्मेदारियों को स्पष्ट करता है।
- जोखिम और भेद्यता आकलन (Vulnerability Assessments): तटीय क्षरण (Coastal Erosion), चक्रवातों और समुद्र के बढ़ते जलस्तर से उत्पन्न होने वाले जोखिमों की मैपिंग और तकनीकी ट्रैकिंग करना।
- एकीकृत स्थानिक योजना: इसके तहत लगभग 1,000 किलोमीटर प्राथमिकता वाली तटरेखा के लिए एकीकृत तटीय क्षेत्र प्रबंधन योजनाएं (ICZMPs) और तटीय समुद्री स्थानिक योजनाएं विकसित की जाएंगी।
- पारिस्थितिकी तंत्र बहाली (Ecosystem Restoration): मैंग्रोव (Mangroves), मूंगा चट्टानों (Coral Reefs) और समुद्री घास जैसे प्राकृतिक बफ़र्स का पुनरुद्धार और वैज्ञानिक प्रबंधन।
- स्थानिक योजना और अनुसंधान (Spatial Planning and Research): तटीय भूमि उपयोग के विनिमय के लिए अत्याधुनिक स्थानिक डेटा और वैज्ञानिक अनुसंधान का अनुप्रयोग।
- प्रदूषण प्रबंधन (Pollution Management): समुद्री प्लास्टिक कचरे और तटीय औद्योगिक अपशिष्टों के प्रवाह को नियंत्रित करने के लिए कड़े नियम।
- व्यापार सुगमता (Ease of Doing Business): एक सुव्यवस्थित और पारदर्शी विनियामक ढांचे के माध्यम से तटीय स्वीकृतियों की प्रक्रियाओं को सरल बनाना।
इसका महत्व:
- तटीय जैव विविधता संरक्षण (Coastal Biodiversity Conservation): भारत के समृद्ध तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र का संरक्षण (Marine Ecosystem Conservation India) कर यह लुप्तप्राय समुद्री प्रजातियों के आवासों को सुरक्षित करता है, जो वैश्विक जैव विविधता लक्ष्यों के अनुकूल है।
- आपदा जोखिम न्यूनीकरण (Coastal Protection Mission): चक्रवातों और सुनामी जैसी तीव्र प्राकृतिक आपदाओं के समय मैंग्रोव और तटीय वनस्पतियां प्राकृतिक दीवार का कार्य करती हैं। यह मिशन इन हरित ढांचों को मजबूत कर तटीय समुदायों के जीवन और संपत्ति की रक्षा करता है।
- तटीय स्थिरता और आजीविका (Coastal Sustainability India): स्थायी मत्स्य पालन और सतत पर्यटन (Sustainable Tourism) को बढ़ावा देकर यह तटीय क्षेत्रों में रहने वाले करोड़ों मछुआरों और स्थानीय आबादी की आजीविका सुरक्षा सुनिश्चित करता है।
- विकसित भारत @2047 विजन के साथ संरेखण: राष्ट्रीय ध्वज के ‘नीले चक्र’ से प्रेरित यह मिशन भारत की नीली अर्थव्यवस्था की अपार संभावनाओं को उजागर कर देश को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने में रणनीतिक योगदान देता है।
- जलवायु अनुकूलन वित्तपोषण का अभिसरण: यह मिशन राष्ट्रीय स्तर पर तटीय पर्यावरण संरक्षण (Coastal Environment Protection) के लिए राज्य के संसाधनों और अंतर्राष्ट्रीय जलवायु वित्त (जैसे ग्रीन क्लाइमेट फंड – GCF परियोजनाओं) के बीच बेहतर नीतिगत समन्वय स्थापित करता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: National Coastal Mission 2.0 क्या है?
उत्तर: यह तटीय और समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र के संरक्षण (Coastal Ecosystem Conservation), जलवायु लचीलापन बढ़ाने और नीली अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए पर्यावरण मंत्रालय की एक प्रमुख केंद्रीय योजना है।
प्रश्न 2: National Coastal Mission 2.0 का Budget कितना है?
उत्तर: इस मिशन के लिए वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2030-31 की अवधि के वास्ते ₹767 करोड़ का कुल बजट स्वीकृत किया गया है।
प्रश्न 3: National Coastal Mission 2.0 की प्रमुख विशेषताएं क्या हैं?
उत्तर: इसकी विशेषताओं में भेद्यता आकलन, पारिस्थितिकी तंत्र बहाली, प्रदूषण नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण, सतत पर्यटन और केंद्र-राज्य समन्वय के लिए ‘समग्र सरकारी दृष्टिकोण’ शामिल हैं।
प्रश्न 4: National Coastal Mission 2.0 का मुख्य उद्देश्य क्या है?
उत्तर: इसका मुख्य उद्देश्य देश के तटीय क्षेत्रों के विकास (Coastal Development India) में स्थिरता लाना, आपदा जोखिमों को कम करना और समुद्री आर्थिक क्षमता को उजागर करना है।
प्रश्न 5: National Coastal Mission 2.0 का भारत के Coastal Ecosystem के लिए क्या महत्व है?
उत्तर: यह मिशन मैंग्रोव और मूंगा चट्टानों के वैज्ञानिक संरक्षण (Coastal Management India) द्वारा तटीय क्षरण को रोकता है और तटीय समुदायों को स्थायी आजीविका प्रदान करता है।
