ASEAN India Maritime Exercise 2026: परिचय, स्थान, संस्करण, थीम एवं भागीदारी
संदर्भ:
हाल ही में 28 सितंबर, 2026 को फिलीपींस के सुबिक बे (Subic Bay) में बहुपक्षीय नौसैनिक अभ्यास आसियन-भारत समुद्री अभ्यास 2026 (ASEAN India Maritime Exercise 2026) का शुभारंभ हुआ.
आसियन-भारत समुद्री अभ्यास 2026 के बारे मे:
- परिचय: ASEAN India Maritime Exercise भारतीय नौसेना (Indian Navy) और आसियान (ASEAN) सदस्य देशों के रक्षा बलों के बीच आयोजित होने वाला बहुपक्षीय समुद्री अभ्यास ढांचा (Maritime Exercise Framework) है.
- आसियान (ASEAN) दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों का एक प्रमुख क्षेत्रीय संगठन है जो आर्थिक विकास और क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देता है।
- पूरा नाम: एसोसिएशन ऑफ साउथ ईस्ट एशियन नेशन्स (Association of Southeast Asian Nations)
- स्थापना: 8 अगस्त 1967 (बैंकॉक घोषणा-पत्र द्वारा)
- मुख्यालय: जकार्ता, इंडोनेशिया
- आदर्श वाक्य (Motto): ‘वन विजन, वन आइडेंटिटी, वन कम्युनिटी’ (One Vision, One Identity, One Community)
- संस्थापक सदस्य: इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर और थाईलैंड
- सदस्य देश: आसियान में वर्तमान में 10 मुख्य सदस्य देश शामिल हैं।
- संस्करण: यह इस संयुक्त अभ्यास का दूसरा संस्करण (Second Edition) है.
- इसका पहला उद्घाटन संस्करण वर्ष 2023 में सिंगापुर में सफलतापूर्वक आयोजित किया गया था.
- सह-मेजबान: इस वर्ष एआईएमई-2026 (AIME 2026) का सह-आयोजन भारतीय नौसेना और फिलीपीन नौसेना द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है.
- विशेष वर्ष: वर्ष 2026 को ‘आसियन-भारत समुद्री सहयोग वर्ष’ (ASEAN-India Year of Maritime Cooperation 2026) के रूप में मनाया जा रहा है, जो इस अभ्यास की प्रासंगिकता को और बढ़ाता है.
- थीम: “विश्वास में अटूट, समुद्र में एकजुट” (Anchored in Trust, United at Sea).
- उद्देश्य: संयुक्त प्रशिक्षण के माध्यम से गहरे रणनीतिक विश्वास का निर्माण करना और संकट के समय एक साथ परिचालन क्षमता (Operational Capability) का प्रदर्शन करना है.
- भागीदार:
- भारतीय नौसेना (Indian Navy): भारत की ओर से दो स्वदेशी युद्धपोत शामिल हुए हैं—
- आईएनएस सह्याद्रि (INS Sahyadri): यह शिवालिक श्रेणी का उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट (Stealth Frigate) है.
- आईएनएस कुलिश (INS Kulish): यह कोरा श्रेणी का मिसाइल कार्वेट (Corvette) युद्धपोत है.
- आसियान भागीदार (ASEAN Assets): फिलीपींस के बीआरपी जोस रिज़ाल (BRP Jose Rizal), बीआरपी तारलाक (BRP Tarlac) और सिंगापुर के आरएसएस जस्टिस (RSS Justice) सहित क्षेत्र की अन्य प्रमुख नौसेनाओं ने अपनी अग्रिम पंक्ति की युद्धपोतों के साथ इसमें भाग लिया.
- गतिविधियां: यह अभ्यास मुख्य रूप से दो रणनीतिक चरणों में विभाजित है:
- बंदरगाह चरण (Harbour Phase): सुबिक बे में आयोजित इस चरण में विषय वस्तु विशेषज्ञों के बीच विचार-विमर्श (Subject Matter Expert Exchanges), क्रॉस-डेक दौरे, खेल-कूद गतिविधियां और मानवीय सहायता एवं आपदा राहत (HADR) पर परिचालन समन्वय (Operational Synchronisation) शामिल हैं.
- समुद्री चरण (Sea Phase): फिलीपींस के ज़ाम्बालेस प्रांत के तट के निकट दक्षिण चीन सागर के रणनीतिक मुहाने पर लाइव सामरिक अभ्यास किए जा रहे हैं. इनमें बोर्डिंग ऑपरेशन (VBSS), वायु रक्षा अभ्यास (Air Defence), हेलीकॉप्टर क्रॉस-डेक लैंडिंग और मेडिकल इवैक्यूएशन जैसी जटिल गतिविधियां शामिल हैं.
भारत और हिंद-प्रशांत क्षेत्र के लिए इसका महत्व:
- ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को सुदृढ़ करना (Strengthening Act East Policy): यह अभ्यास भारत की एक्ट ईस्ट नीति (Act East Policy) को व्यावहारिक स्वरूप प्रदान करता है. दक्षिण-पूर्व एशिया के साथ आर्थिक संबंधों के साथ-साथ रक्षा सहयोग को बढ़ाना भारत की भू-राजनीतिक प्राथमिकता है.
- ‘महासागर’ और सागर विजन का समर्थन (Alignment with MAHASAGAR and SAGAR): यह अभ्यास भारत के राष्ट्रीय विजन महासागर (Mutual and Holistic Advancement for Security and Growth Across Regions – MAHASAGAR) और ‘सागर’ (SAGAR) सिद्धांतों के अनुकूल है. यह दर्शाता है कि हिंद-प्रशांत में सुरक्षा और सामूहिक विकास सभी देशों की साझा जिम्मेदारी है.
- अंतर-परिचालनीयता में वृद्धि (Enhancing Interoperability): विभिन्न नौसेनाओं के बीच संचार कोड, सामरिक संरचनाओं (Tactical Formations) और परिचालन प्रक्रियाओं में एकरूपता आने से भविष्य में समुद्री डकैती, तस्करी और आपदाओं के खिलाफ संयुक्त मोर्चेबंदी आसान होगी.
- सामरिक संतुलन और दक्षिण चीन सागर में उपस्थिति (Strategic Balancing): फिलीपींस के सुबिक बे में यह अभ्यास आयोजित होना भू-राजनीतिक रूप से संवेदनशील है. नियम-आधारित वैश्विक व्यवस्था (Rules-based International Order) और संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून संधि (UNCLOS) का समर्थन करते हुए भारत इस क्षेत्र में नौवहन की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) का पक्षधर रहा है.
- स्वदेशी रक्षा विनिर्माण का प्रदर्शन (Showcasing Indigenous Defence Capabilities): आईएनएस सह्याद्रि और आईएनएस कुलिश जैसे अत्याधुनिक स्वदेशी पोतों की भागीदारी भारत की ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल और घरेलू पोत निर्माण क्षमता (Domestic Shipbuilding Capabilities) को अंतरराष्ट्रीय मंच पर प्रदर्शित करती है.
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: ASEAN-India Maritime Exercise 2026 क्या है?
उत्तर: यह भारत और आसियान (ASEAN) देशों की नौसेनाओं के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग, परिचालन तालमेल और आपसी समझ बढ़ाने के लिए आयोजित एक बहुपक्षीय संयुक्त नौसैनिक अभ्यास है.
प्रश्न 2: ASEAN-India Maritime Exercise 2026 का आयोजन कहाँ किया गया?
उत्तर: इस अभ्यास का सह-आयोजन फिलीपींस के सुबिक बे (Subic Bay) और उसके निकटवर्ती समुद्री क्षेत्रों में सफलतापूर्वक किया जा रहा है.
प्रश्न 3: ASEAN-India Maritime Exercise का यह कौन सा संस्करण है?
उत्तर: यह भारत-आसियान समुद्री अभ्यास (ASEAN India Naval Exercise 2026) का दूसरा संस्करण (Second Edition) है. पहला संस्करण 2023 में सिंगापुर में हुआ था.
प्रश्न 4: ASEAN-India Maritime Exercise 2026 की Theme क्या है?
उत्तर: इस वर्ष के अभ्यास की आधिकारिक थीम “विश्वास में अटूट, समुद्र में एकजुट” (Anchored in Trust, United at Sea) रखी गई है.
प्रश्न 5: इस Maritime Exercise में कौन-कौन से देश भाग ले रहे हैं?
उत्तर: इस अभ्यास (ASEAN India Defence Exercise) में भारत और आसियान (ASEAN) के सभी सदस्य देश अपनी नौसैनिक परिसंपत्तियों व विशेषज्ञों के साथ भाग ले रहे हैं.
