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Shilp Samagam Mela 2026 गुवाहाटी में हुआ शुरू, 31 महिला कारीगर ले रही है हिस्सा

Shilp Samagam Mela 2026 गुवाहाटी में हुआ शुरू, 31 महिला कारीगर ले रही है हिस्सा

Shilp Samagam Mela 2026

संदर्भ: 

हाल ही में गुवाहाटी में आठ दिनों तक चलने वाले प्रतिष्ठित शिल्प समागम मेला 2026 (Shilp Samagam Mela 2026) का शुभारंभ किया गया।

शिल्प समागम मेला 2026 के मुख्य बिंदु:

  • परिचय: यह मेला भारत सरकार द्वारा समाज के आर्थिक और सामाजिक रूप से पिछड़े तथा वंचित वर्गों के कारीगरों को सशक्त बनाने के लिए चलाया जाने वाला एक प्रमुख विपणन मंच (Marketing Platform) है।
    • इसके अंतर्गत अनुसूचित जाति (SC), अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC), सफाई कर्मचारियों और विमुक्त जनजातियों (DNT) के हुनरमंद कारीगरों को अपने उत्पादों की प्रदर्शनी लगाने का अवसर दिया जाता है। 
  • आयोजन: इस वर्ष यह 8 दिवसीय मेला 21 अक्टूबर 2026 से शुरू हुआ है और इसका समापन 28 अक्टूबर 2026 को होगा। 
  • स्थान: इसका आयोजन असम के गुवाहाटी में खानापारा स्थित फार्म गेट ग्राउंड (Farm Gate Ground, Khanapara) पर किया जा रहा है।
    • यह मेला प्रतिदिन सुबह 11 बजे से रात 9 बजे तक आम जनता के लिए खुला रहता है।
  • संस्करण: वर्ष 2026 के शिल्प समागम मेले (Shilp Samagam 2026) का पहला चरण 19 अक्टूबर 2026 को मैसूरु (कर्नाटक) में सफलतापूर्वक संपन्न हुआ था। 
  • आयोजक: यह मेला भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय (Ministry of Social Justice and Empowerment) की एक शीर्ष पहल है। मंत्रालय के अंतर्गत काम करने वाले तीन प्रमुख राष्ट्रीय निगम इसके कार्यान्वयन में मुख्य भूमिका निभाते हैं:
    • NSFDC: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (National Scheduled Castes Finance and Development Corporation)। 
    • NBCFDC: राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम (National Backward Classes Finance and Development Corporation)।
    • NSKFDC: राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी वित्त एवं विकास निगम (National Safai Karamcharis Finance and Development Corporation)। 
  • उद्देश्य:
    • विपणन सहायता प्रदान करना: हाशियाकृत समुदायों के कारीगरों को बिना किसी मध्यस्थ (Middlemen) के सीधे उपभोक्ताओं से जोड़ना।
    • उद्यमिता को बढ़ावा: पारंपरिक शिल्प कौशल को आत्मनिर्भर और संवहनीय व्यवसायों में बदलने के लिए प्रेरित करना।
    • वित्तीय सहायता जागरूकता: आगंतुकों और स्वयं सहायता समूहों (Self Help Groups India) को मंत्रालय की ऋण और कल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देना।
  • महिला कारीगरों की सहभागिता (Participation of Women Artisans): गुवाहाटी संस्करण में देश भर (जिसमें पूर्वोत्तर राज्य भी शामिल हैं) से कुल 75 प्रतिष्ठित कारीगर हिस्सा ले रहे हैं, जिनमें 31 महिला कारीगर शामिल हैं।
  • हस्तशिल्प के माध्यम से महिला सशक्तिकरण (Women Empowerment Through Handicrafts) को रेखांकित करते हुए इन महिला उद्यमियों को परिवहन, भोजन, दैनिक भत्ता और स्टॉल का पूरा खर्च मंत्रालय द्वारा मुफ्त उपलब्ध कराया गया है ताकि उनकी परिचालन लागत शून्य हो सके। 
  • प्रदर्शित होने वाले पारंपरिक उत्पाद (Traditional Handicraft Products): मेले में भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा (Indian Handloom and Handicrafts) की लगभग 40 से अधिक विशिष्ट किस्में प्रदर्शित की जा रही हैं, जिनमें शामिल हैं:
  • कपड़े और साड़ियाँ: पारंपरिक हथकरघा साड़ियाँ, सिल्क वस्त्र और ब्लॉक-प्रिंटेड परिधान।
  • सजावटी उत्पाद: टेराकोटा उत्पाद, शीशम और रोज़वुड की दीवार कला, जूट बैग और कृत्रिम आभूषण।
  • दैनिक उत्पाद: चमड़े के सामान, लकड़ी के टिकाऊ खिलौने, जैविक शहद, अचार, अगरबत्ती और हर्बल मसाले। 
  • भारत-ट्यूलिप पहल (BHARAT-TULIP Initiative): इस मेले का एक मुख्य फोकस केंद्र सरकार की डिजिटल पहल ‘भारत-ट्यूलिप’ (पारंपरिक कारीगरों के उत्थान और आजीविका कार्यक्रम – Traditional Artisans’ Upliftment Livelihood Programme) को बढ़ावा देना है।
    • इसके अंतर्गत भौतिक बिक्री के अलावा कारीगरों के उत्पादों को ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म (E-commerce Platforms) से जोड़ा जाता है, जिससे स्थानीय कारीगरों को वैश्विक बाजार (Local to Global) तक पहुंच मिलती है। 

इस मेले से मिलने वाले बहुआयामी लाभ:

  • आर्थिक स्वावलंबन और बिचौलियों का अंत: सीधे ग्राहकों से संवाद स्थापित होने के कारण कारीगरों को उनके उत्पादों का शत-प्रतिशत मूल्य मिलता है, जिससे उनकी आय में सुधार होता है।
  • लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण: 31 महिला कारीगरों की भागीदारी यह दर्शाती है कि यह मेला ग्रामीण महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता देकर उन्हें सूक्ष्म उद्यमी (Micro-Entrepreneurs) बना रहा है।
  • सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण: यह भारत की लुप्तप्राय पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प (Traditional Indian Handicrafts) कलाओं को नया जीवन और समकालीन उपभोक्ता बाजार प्रदान करता है।
  • पूर्वोत्तर क्षेत्र का एकीकरण: गुवाहाटी में आयोजन से पूर्वोत्तर की स्वदेशी जनजातीय कलाओं को देश के मुख्य आर्थिक ढांचे से जुड़ने का प्रत्यक्ष अवसर मिलता है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Shilp Samagam Mela 2026 क्या है और इसका उद्देश्य क्या है?

उत्तर: यह सामाजिक न्याय मंत्रालय द्वारा आयोजित हस्तशिल्प प्रदर्शनी है, जिसका उद्देश्य वंचित समुदायों के कारीगरों को विपणन सहायता और संवहनीय आजीविका के अवसर प्रदान करना है।

प्रश्न 2: शिल्प समागम मेला 2026 में कितनी महिला कारीगर हिस्सा ले रही हैं?

उत्तर: गुवाहाटी में आयोजित इस 8-दिवसीय मेले में देश भर के कुल 75 कारीगरों में से 31 महिला कारीगर हिस्सा ले रही हैं।

प्रश्न 3: Shilp Samagam Mela में किस तरह के Handicraft Products प्रदर्शित किए जाते हैं?

उत्तर: यहाँ पारंपरिक हथकरघा साड़ियाँ, टेराकोटा उत्पाद, रोज़वुड सजावटी सामान, ब्लॉक-प्रिंट उत्पाद, जैविक मसाले, शहद और चमड़े के हस्तनिर्मित सामान प्रदर्शित किए जाते हैं।

प्रश्न 4: महिला कारीगरों और छोटे उद्यमियों को इस मेले से क्या लाभ मिलता है?

उत्तर: उन्हें मुफ्त स्टॉल, यात्रा भत्ता और ‘भारत-ट्यूलिप’ ई-कॉमर्स नेटवर्क के जरिए व्यापक बाजार, डिजिटल पहचान एवं सीधे ग्राहकों से व्यापार करने का अवसर मिलता है।

प्रश्न 5: Shilp Samagam Mela 2026 का आयोजन कहां और कब हुआ?

उत्तर: यह मेला 21 से 28 अक्टूबर 2026 तक असम के गुवाहाटी में खानापारा स्थित फार्म गेट पर आयोजित किया जा रहा है।

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