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Somnath Swabhiman Parv का हुआ जिक्र, सोमनाथ मंदिर का 1000 वर्षों का अस्तित्व

Somnath Swabhiman Parv का हुआ जिक्र, सोमनाथ मंदिर का 1000 वर्षों का अस्तित्व

Somnath Swabhiman Parv

संदर्भ:

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने मासिक रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के 138वें एपिसोड (रविवार, 27 सितंबर 2026) में ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ (Somnath Swabhiman Parv) का विशेष उल्लेख किया। 

  • यह राष्ट्रव्यापी उत्सव सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले बड़े विदेशी आक्रमण के 1,000 वर्ष पूरे होने और स्वतंत्रता के बाद इसके गौरवशाली पुनर्निर्माण के उपलक्ष्य में मनाया जा रहा है। 

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व 2026:

  • आक्रमण के 1,000 वर्ष: जनवरी 1026 ईस्वी में क्रूर आक्रांता महमूद गजनवी (Mahmud of Ghazni) ने सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण कर उसे पूरी तरह ध्वस्त कर दिया था।
    • वर्ष 2026 इस घटना के 1,000 वर्ष (Somnath Temple 1000 Years) पूरे होने का प्रतीक है। 
  • पुनर्निर्माण के 75 वर्ष (अमृत पर्व): स्वतंत्र भारत में आधुनिक मंदिर के जीर्णोद्धार और गर्भगृह में प्राण-प्रतिष्ठा के 75 वर्ष (11 मई 1951 को तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा उद्घाटन) भी इसी वर्ष पूरे हुए हैं।
  • पीएम मोदी का संदेश: प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि 1026 ईस्वी में जब गजनवी ने सोमनाथ को खंडित किया था, उसी वर्ष उसने गुजरात के प्रसिद्ध मोढेरा सूर्य मंदिर (Modhera Sun Temple) पर भी हमला किया था।
    • उस समय मोढेरा मंदिर को बने केवल एक ही वर्ष हुआ था, जिसे राजा भीमदेव प्रथम (Bhimdev I) ने 1025 ईस्वी में बनवाया था। 
    • पीएम मोदी ने कहा कि भारत की पहचान मिटाने आए आक्रांताओं का आज कोई वजूद नहीं है, जबकि सोमनाथ आज भी अरब सागर के तट पर पूरी भव्यता के साथ भारत की अमरता का आशीर्वाद दे रहा है। 

सोमनाथ मंदिर के बारे में:

  • स्थिति: सोमनाथ मंदिर गुजरात के वेरावल में प्रभास पाटन के समुद्र तट पर स्थित भगवान शिव का अत्यंत प्राचीन और पवित्र मंदिर है।
    • यह मंदिर कपिला, हिरन और सरस्वती नदियों के संगम के पास अरब सागर के तट पर स्थित है।
  • विशेषताएं:
    • वास्तुकला की शैली: वर्तमान मंदिर का निर्माण चालुक्य शैली यानी मारू-गुर्जर स्थापत्य शैली (Māru-Gurjara Architecture Style) में किया गया है। इसका पुनरुद्धार प्रसिद्ध वास्तुकार प्रभाशंकर सोमपुरा ने किया था।
    • मुख्य संरचना: मंदिर में तीन मुख्य भाग हैं—गर्भगृह (Garbhagriha), सभामंडप (Sabhamandap) और नृत्यमंडप। इसका मुख्य शिखर 150 फीट ऊंचा है, जिसके शीर्ष पर 10 टन वजनी स्वर्ण कलश स्थापित है।
    • बाण स्तंभ (Arrow Pillar/Baan Stambh): मंदिर के समुद्र तटीय प्रांगण में एक ऐतिहासिक स्तंभ है, जिसे ‘आबाधित समुद्र मार्ग’ (Unobstructed Sea Route) सूचक माना जाता है। इस पर लिखा है कि इस बिंदु से दक्षिण ध्रुव (South Pole) तक सीधे रेखा में एक भी भूखंड या द्वीप नहीं है, जो प्राचीन भारतीय खगोल विज्ञान की सटीकता को दर्शाता है।

सोमनाथ मंदिर का इतिहास:

  • पहला दर्ज आक्रमण (First Recorded Attack – 1026 CE): गजनवी साम्राज्य के सुल्तान महमूद ने भारत के उत्तर-पश्चिमी हिस्सों को लूटने के बाद सौराष्ट्र तट पर स्थित इस समृद्ध मंदिर को निशाना बनाया। उसने मंदिर की अपार संपदा को लूटा, शिवलिंग को खंडित किया और हजारों पुजारियों व रक्षकों का नरसंहार किया।
    • इस विनाश के तुरंत बाद, मालवा के राजा भोज और गुजरात के चालुक्य (सोलंकी) राजा भीमदेव प्रथम ने मिलकर मंदिर का पत्थरों से भव्य पुनर्निर्माण करवाया। 
  • बाद के विनाश और जीर्णोद्धार: सोमनाथ मंदिर को इतिहास में कई बार तोड़ा और बनाया गया, जो भारतीय सभ्यता के लचीलेपन (Civilisational Resilience) को दर्शाता है:
  • 1299 ईस्वी: दिल्ली सल्तनत के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के सेनापति उलूग खान ने राजा कर्ण को हराकर मंदिर को पुनः ध्वस्त किया। इसका पुनर्निर्माण राजा महिपाल देव ने करवाया।
  • 1395 ईस्वी: मुजफ्फर शाह प्रथम (गुजरात का सुल्तान) ने मंदिर को नुकसान पहुँचाया।
  • 1451 ईस्वी: महमूद बेगड़ा ने मंदिर पर हमला कर इसकी संपदा लूटी।
  • 1706 ईस्वी: मुगल बादशाह औरंगजेब ने मंदिर को पूरी तरह नष्ट करने और वहां सैन्य चौकियां स्थापित करने का क्रूर आदेश दिया।
    • जब औरंगजेब के हमले के बाद मंदिर खंडहर में तब्दील हो गया था, तब इंदौर की मराठा शासक महारानी अहिल्याबाई होल्कर ने 1783 में मूल स्थल के पास ही एक नए सोमनाथ मंदिर का निर्माण कराया ताकि पूजा की निरंतरता बनी रहे। इसे ‘पुराना सोमनाथ मंदिर’ भी कहा जाता है।

आधुनिक सोमनाथ मंदिर: पुनरुत्थान की गाथा

स्वतंत्रता के बाद सोमनाथ का पुनरुत्थान आधुनिक भारत के सांस्कृतिक राष्ट्रवाद का पहला बड़ा प्रतीक बना:

  • सरदार पटेल का संकल्प: नवंबर 1947 में जूनागढ़ की मुक्ति के बाद देश के पहले गृहमंत्री सरदार वल्लभभाई पटेल ने सोमनाथ के भव्य पुनर्निर्माण का ऐतिहासिक संकल्प लिया। उनके साथ के.एम. मुंशी (K.M. Munshi) ने इस भगीरथ कार्य में मुख्य भूमिका निभाई।
  • सरकारी धन का प्रयोग नहीं: महात्मा गांधी की सलाह पर, इसके निर्माण के लिए सरकारी खजाने के बजाय आम जनता के दान से सोमनाथ ट्रस्ट (Somnath Temple Trust) का गठन किया गया।
  • ऐतिहासिक प्राण-प्रतिष्ठा (11 मई 1951): तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के विरोध के बावजूद, भारत के प्रथम राष्ट्रपति डाॅ. राजेंद्र प्रसाद ने भव्य समारोह में भाग लिया और गर्भगृह में ज्योतिर्लिंग की प्राण-प्रतिष्ठा की।
    • उन्होंने कहा था, “सोमनाथ का यह मंदिर इस बात का प्रतीक है कि निर्माण की शक्ति विनाश की शक्ति से कहीं अधिक प्रबल होती है।” 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: Somnath Swabhiman Parv 2026 क्या है?

उत्तर: यह वर्ष 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए गजनवी के आक्रमण के 1,000 वर्ष और इसके आधुनिक पुनरुद्धार के 75 वर्ष पूरे होने पर मनाया जा रहा राष्ट्रीय स्वाभिमान पर्व है। 

प्रश्न 2:सोमनाथ मंदिर के 1000 वर्ष पूरे होने का क्या महत्व है?

उत्तर: यह इस बात का वैश्विक प्रमाण है कि अनगिनत विनाशकारी हमलों के बाद भी भारतीय संस्कृति, सभ्यता की चेतना और सनातन धर्म का अस्तित्व अक्षुण्ण रहा।

प्रश्न 3: Somnath Temple पर पहला recorded attack कब हुआ था?

उत्तर: मंदिर पर पहला सबसे भीषण और ऐतिहासिक रूप से प्रलेखित हमला जनवरी 1026 ईस्वी में महमूद गजनवी द्वारा किया गया था।

प्रश्न 4: Somnath Temple को कितनी बार पुनर्निर्मित किया गया?

उत्तर: इतिहास में गजनवी, खिलजी और औरंगजेब जैसे शासकों द्वारा मंदिर को कई बार ध्वस्त किया गया और राजा भीमदेव, अहिल्याबाई तथा सरदार पटेल द्वारा इसे कई बार पुनर्निर्मित किया गया। 

प्रश्न 5: सोमनाथ मंदिर किस Jyotirlinga से संबंधित है?

उत्तर: सोमनाथ मंदिर को भगवान शिव के पवित्र द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से प्रथम (First of 12 Jyotirlingas) ज्योतिर्लिंग माना जाता है।

प्रश्न 6: Somnath Temple का वर्तमान मंदिर कब पुनर्निर्मित हुआ?

उत्तर: आधुनिक भारत में इसका निर्माण सरदार पटेल के प्रयासों से हुआ और 11 मई 1951 को राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने इसकी प्राण-प्रतिष्ठा की।

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