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दुर्लभ Spot-Bellied Eagle-Owl: वर्गीकरण, शारीरिक विशेषताएं एवं संरक्षण स्थिति

दुर्लभ Spot-Bellied Eagle-Owl: वर्गीकरण, शारीरिक विशेषताएं एवं संरक्षण स्थिति 

Spot-Bellied Eagle-Owl

संदर्भ:

हाल ही में केरल के कोझिकोड जिले के जनकिकाडु (Janakikadu) वन क्षेत्र में स्पॉट-बेलिड ईगल-उल्लू (Spot-Bellied Eagle-Owl) को पहली बार देखा गया और उसकी तस्वीर खींची गई, जो इस जिले में इस दुर्लभ प्रजाति का पहला प्रामाणिक फोटोग्राफिक रिकॉर्ड है।

स्पॉट-बेलिड ईगल-उल्लू के बारे मे:

  • वैज्ञानिक नाम: इसका वैज्ञानिक नाम केटूपा निपालेंसिस (Ketupa nipalensis) है, जिसे पूर्व में बुबो निपालेंसिस (Bubo nipalensis) के नाम से भी जाना जाता था।
    • हालिया आनुवंशिक अध्ययनों के बाद इसे केटूपा वर्ग में शामिल किया गया है।
  • जगत एवं संघ: यह जंतु जगत (Animalia) और कॉर्डेटा (Chordata) संघ के अंतर्गत आता है।
  • वर्ग और गण: यह पक्षी वर्ग (Aves) और उल्लू गण (Strigiformes) से संबंधित है।
  • कुल/परिवार: यह विशिष्ट रूप से स्ट्रिगिडे (Strigidae) परिवार का सदस्य है, जिसे ‘सच्चे उल्लू’ (Typical Owls) भी कहा जाता है।
  • भौगोलिक विस्तार (Eagle Owl Distribution): यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप और दक्षिण-पूर्वी एशिया (जैसे भारत, श्रीलंका, नेपाल, भूटान, म्यांमार, थाईलैंड, लाओस, कंबोडिया और वियतनाम) का मूल निवासी है।
    • भारत में यह हिमालय की निचली पहाड़ियों (कुमाऊं से लेकर असम और अरुणाचल प्रदेश तक) और दक्षिण भारत के पश्चिमी घाट (Western Ghats) के राज्यों जैसे केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा और महाराष्ट्र में पाया जाता है।
  • विशिष्ट आवास (Owl Species Habitat): यह मुख्य रूप से घने, सदाबहार जंगलों (Dense Evergreen Forests), नम पर्णपाती वनों (Moist Deciduous Forests) और पर्वतीय शोला जंगलों (Shola Forests) में निवास करता है। यह समुद्र तल से लेकर 3,000 मीटर तक की ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाकों में रहना पसंद करता है।
  • शारीरिक विशेषताएं:
    • आकार और वजन: यह भारत का दूसरा सबसे बड़ा उल्लू है। इसकी लंबाई लगभग 55 से 65 सेंटीमीटर होती है और इसका वजन 1.5 से 2.5 किलोग्राम तक हो सकता है। इसके पंखों का फैलाव (Wingspan) लगभग 1.5 से 1.7 मीटर तक होता है।
    • रंग और धब्बे: इसकी ऊपरी पीठ गहरे भूरे और चॉकलेट रंग की होती है जिस पर सफेद चकत्ते होते हैं। इसका नाम ‘स्पॉट-बेलिड’ इसके पेट के निचले हिस्से (Underbelly) के कारण पड़ा है, जो हल्के क्रीम रंग का होता है और उस पर शेवरॉन के आकार के (Chevron-shaped) बोल्ड काले-भूरे धब्बे बने होते हैं।
    • कर्ण-गुच्छ (Ear Tufts): इसके सिर पर सींग जैसे दिखने वाले लंबे और बाहर की ओर झुके हुए कर्ण-गुच्छ (Ear-tufts) होते हैं, जो लगभग 63 से 76 मिलीमीटर लंबे होते हैं।
    • नेत्र और चोंच: इसकी आंखें गहरी काली होती हैं, जो इसे अन्य पीली आंखों वाले ईगल-उल्लों से अलग करती हैं। इसकी चोंच घुमावदार और पीले रंग की होती है, और इसके पैर मज़बूत पंखों से ढके होते हैं लेकिन उंगलियों के अग्रभाग नग्न होते हैं।
  • निशाचर प्रकृति: यह भारत के प्रमुख निशाचर पक्षियों (Nocturnal Birds) में से एक है, जो पूरी तरह रात के समय सक्रिय (Strictly Nocturnal) होकर शिकार करता है। 
  • आवाज: यह अपनी डरावनी और इंसानों जैसी चीखने वाली आवाज के लिए जाने जाते है, जिसके कारण भारत के कई ग्रामीण इलाकों में इसे स्थानीय स्तर पर ‘जंगलों का भूत’ (Ghost of the Forest) या ‘डेविल बर्ड’ (Devil Bird) कहा जाता है।
    • केरल में इसे स्थानीय रूप से ‘कोल्लियान’ (Kolliyan) या ‘कट्टू मूँगा’ (Kattumoonga) भी कहते हैं।
  • आहार और शिकार: यह एक शीर्ष शिकारी (Apex Predator) है। यह अपने मज़बूत पंजों से सांपों, बड़े पक्षियों (जैसे तीतर और मोर) और छोटे स्तनधारियों जैसे सियार (Golden Jackals), खरगोश, कस्तूरी बिलाव (Civets) और छोटे बंदरों तक का शिकार आसानी से कर लेता है।
  • संरक्षण स्थिति:
संरक्षण मानकस्थिति
IUCN रेड लिस्ट (IUCN Red List)अल्पचिंतनीय (Least Concern – LC)
CITESपरिशिष्ट II (Appendix II)
वन्यजीव संरक्षण (Wildlife Protection India)भारतीय वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत उच्च सुरक्षा प्राप्त।
  • प्रमुख खतरे: यद्यपि वैश्विक स्तर पर यह ‘अल्पचिंतनीय’ है, लेकिन जंगलों की कटाई (Deforestation), आवास विखंडन (Habitat Fragmentation) और अंधविश्वास के चलते इसके अंगों व पंखों के लिए होने वाले अवैध शिकार (Poaching) के कारण इसकी स्थानीय आबादी तेजी से घट रही है। 

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: स्पॉट-बेलिड ईगल-उल्लू क्या है?

उत्तर: यह भारत में पाया जाने वाला स्ट्रिगिडे परिवार का एक अत्यंत विशाल, शक्तिशाली और दुर्लभ मांसाहारी निशाचर उल्लू (Raptor) है। 

प्रश्न 2: स्पॉट-बेलिड ईगल-उल्लू का वैज्ञानिक नाम क्या है?

उत्तर: इसका वैज्ञानिक नाम केटूपा निपालेंसिस (Ketupa nipalensis) है, जिसे पहले बुबो निपालेंसिस भी कहा जाता था।

प्रश्न 3: यह पक्षी किन क्षेत्रों में पाया जाता है?

उत्तर: यह मुख्य रूप से भारतीय उपमहाद्वीप (Himalayas और पश्चिमी घाट) तथा दक्षिण-पूर्वी एशिया के घने सदाबहार जंगलों में पाया जाता है। 

प्रश्न 4: स्पॉट-बेलिड ईगल-उल्लू की प्रमुख शारीरिक विशेषताएं क्या हैं?

उत्तर: इसकी लंबाई 55-65 सेमी होती है, सिर पर बड़े कर्ण-गुच्छ होते हैं और इसके हल्के पेट पर काले शेवरॉन-आकार के धब्बे होते हैं।

प्रश्न 5: यह उल्लू दिन में सक्रिय रहता है या रात में?

उत्तर: यह एक पूर्णतः निशाचर (Nocturnal) पक्षी है, जो दिनभर घने पेड़ों में आराम करता है और रात के अंधेरे में सक्रिय होता है।

प्रश्न 6: स्पॉट-बेलिड ईगल-उल्लू का भोजन क्या है?

उत्तर: यह एक शक्तिशाली शिकारी है जो मुख्य रूप से सांपों, बड़े पक्षियों (तीतर, मोर) और छोटे स्तनधारियों (सियार, बिलाव) का शिकार करता है।

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