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भारतीय परिवारों पर जीएसटी बोझ पर अध्ययन (Study on GST Burden on Indian Households) | Ankit Avasthi Sir

Study on GST Burden on Indian Households

Study on GST Burden on Indian Households

Study on GST Burden on Indian Households – 

संदर्भ:

2022–23 के Household Consumption Expenditure Survey (HCES) पर आधारित नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ पब्लिक फाइनेंस एंड पॉलिसी (NIPFP) के प्रो. सच्चिदानंद मुखर्जी द्वारा किए गए अध्ययन में खुलासा हुआ है कि भारत की GST प्रणाली गरीब और मध्य वर्ग दोनों पर लगभग समान भार डालती है।

प्रमुख निष्कर्ष:

ग्रामीण क्षेत्र:

  • निचले 50% उपभोक्ता: 31% GST बोझ
  • मध्य 30% उपभोक्ता: 31%
  • शीर्ष 20% उपभोक्ता: 37%

शहरी क्षेत्र:

  • निचले 50% उपभोक्ता: 29% GST बोझ
  • मध्य 30% उपभोक्ता: 30%
  • शीर्ष 20% उपभोक्ता: 41% यह आंकड़े Oxfam की 2023 रिपोर्ट से भिन्न हैं, जिसमें कहा गया था कि सबसे गरीब 50% लोग कुल GST संग्रह का दो-तिहाई वहन करते हैं जबकि सबसे अमीर 10% केवल 3-4%।

GST की संरचना और उद्देश्य:

  • GST एक उपभोग आधारित अप्रत्यक्ष कर है, जिसमें आवश्यक वस्तुएं कम दरों या छूट के तहत रखी जाती हैं।
  • विलासिता और गैर-जरूरी वस्तुएं ऊंची दरों पर कर के दायरे में आती हैं।
  • सैद्धांतिक रूप से यह प्रगतिशील कर प्रणाली मानी जाती है, लेकिन वास्तविकता में इसकी प्रगतिशीलता सीमित पाई गई है।

क्यों समान बोझ बन रहा है?

  • उच्च अनिवार्य खर्च: गरीब वर्ग अपनी अधिकांश आय आवश्यक वस्तुओं पर खर्च करता है जिन पर आंशिक रूप से GST लगता है।
  • सीमित प्रगतिशीलता: अमीर वर्ग विलासिता की वस्तुएं जरूर खरीदता है, लेकिन GST में उनका योगदान अपेक्षा के अनुरूप नहीं बढ़ता।
  • GST की संरचना: कुछ आवश्यक वस्तुओं पर छूट होने के बावजूद, निचले और मध्य वर्ग पर समान भार बना रहता है।
  • अप्रत्यक्ष कर की प्रकृति: GST आमदनी नहीं बल्कि खपत पर आधारित है, जिससे यह कम प्रगतिशील हो जाता है।

नीतिगत निहितार्थ:

  • समानता पर असर: GST आय का पुनर्वितरण प्रभावी ढंग से नहीं कर पा रहा।
  • संभावित प्रतिगतिकता (Regressivity): गरीबों के लिए यह कर प्रणाली प्रतिगामी हो सकती है।
  • सामाजिक न्याय का प्रश्न: निचले वर्ग पर लगातार कर भार से कल्याणकारी योजनाओं की आवश्यकता और बढ़ती है।

आगे की राह (Way Forward):

  • प्रगतिशीलता को बढ़ाना: गरीबों के लिए महत्वपूर्ण वस्तुओं पर GST दर और घटाई जाए।
  • कर छूट प्रणाली को सुदृढ़ करना: उपभोक्ता व्यवहार और HCES डेटा के आधार पर आवश्यक वस्तुओं की सूची को समय-समय पर संशोधित किया जाए।
  • प्रभाव मूल्यांकन की व्यवस्था: GST के वितरणीय प्रभावों पर नियमित अध्ययन कर नीति में सुधार किए जाएं।
  • नकद सब्सिडी या टैक्स क्रेडिट: कमजोर वर्गों के लिए डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से कर भार की भरपाई की जा सकती है।

वस्तु एवं सेवा कर (GST): एक संक्षिप्त परिचय

परिभाषा: GST (Goods and Services Tax) एक व्यापक (comprehensive), गंतव्य-आधारित (destination-based) अप्रत्यक्ष कर है जो वस्तुओं और सेवाओं की आपूर्ति पर लगाया जाता है। यह वैट (VAT), उत्पाद शुल्क (Excise), सेवा कर (Service Tax) जैसे विभिन्न अप्रत्यक्ष करों को समाप्त कर एक ही कर प्रणाली में समाहित करता है।

प्रमुख विशेषताएँ:

  • एकीकृत कर प्रणाली: पूरे देश में ‘एक राष्ट्र, एक कर’ की अवधारणा।
  • मल्टीस्टेज टैक्स: उत्पादन से लेकर अंतिम उपभोक्ता तक हर चरण पर कर लागू होता है।
  • इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC): व्यवसायों को खरीद पर दिए गए टैक्स का क्रेडिट बिक्री पर दिए जाने वाले टैक्स से समायोजित करने की सुविधा मिलती है।

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