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Tribunals Reforms Bill 2026 लोकसभा से पारित, जानिए बिल के मुख्य प्रावधान

Tribunals Reforms Bill 2026 लोकसभा से पारित, जानिए बिल के मुख्य प्रावधान

Tribunals Reforms Bill 2026

संदर्भ:

हाल ही में लोकसभा (Lok Sabha) ने विपक्षी सांसदों के हंगामे के बीच अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 (Tribunals Reforms Bill 2026) को बिना किसी विस्तृत चर्चा के पारित किया।

  • Tribunals (अधिकरण) ऐसी विशेष अर्ध-न्यायिक संस्थाएं (Quasi-Judicial Bodies) होती हैं, जिन्हें किसी खास प्रकार के विवादों या तकनीकी मामलों को जल्दी सुलझाने के लिए कानून के तहत बनाया जाता है। इनका मुख्य मकसद आम अदालतों पर मुकदमों का बोझ कम करना होता है।

अधिकरण सुधार विधेयक, 2026 (Tribunals Reforms Bill 2026) क्या हैं?

  • परिचय: यह विधेयक भारत में विभिन्न प्रशासनिक और न्यायिक अधिकरणों (Tribunals) के अध्यक्षों तथा सदस्यों की नियुक्ति, सेवा शर्तों, और उनकी प्रशासनिक कार्यप्रणाली को विनियमित करने के लिए लाया गया है।
    • यह न्यायिक स्वतंत्रता (Tribunal Independence) और प्रशासनिक पारदर्शिता (Tribunal Transparency) सुनिश्चित करने वाला एक वैधानिक ढांचा है।
  • प्रतिस्थापन: यह नया विधेयक पूर्ववर्ती अधिकरण सुधार अधिनियम, 2021 (Tribunals Reforms Act 2021) को निरस्त (Repeal) कर उसका स्थान लेगा।
    • मद्रास बार एसोसिएशन बनाम भारत संघ (Madras Bar Association v. Union of India) मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने 2021 के अधिनियम की कुछ प्रमुख धाराओं को असंवैधानिक घोषित कर दिया था। 
    • न्यायालय का मानना था कि वे प्रावधान शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत (Separation of Powers) और न्यायपालिका की स्वतंत्रता के खिलाफ थे।
  • आवश्यकता:
    • एकसमान पारिस्थितिकी तंत्र: विभिन्न अधिकरणों के सदस्यों की योग्यताओं और सेवा शर्तों में एकरूपता (Uniformity) की कमी को दूर करना।
    • न्यायालय के आदेशों का अनुपालन: सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुरूप एक पूर्णतः स्वतंत्र और निष्पक्ष निगरानी तंत्र स्थापित करना।
    • लंबित मामलों का त्वरित निस्तारण: ट्रिब्यूनलों में खाली पड़े पदों को पारदर्शी और समयबद्ध तरीके से भरकर न्यायिक दक्षता (Tribunal Accountability) में सुधार करना।
  • प्रावधान:
    • राष्ट्रीय अधिकरण आयोग की स्थापना (National Tribunals Commission – NTC): इस विधेयक का मुख्य प्रावधान प्रावधान एक स्वतंत्र राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (National Tribunal Commission India) का गठन करना है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली में होगा। यह 5 सदस्यीय निकाय होगा, जिसमें शामिल होंगे:
  • अध्यक्ष (Chairperson): सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त न्यायाधीश या किसी हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश।
  • दो न्यायिक सदस्य: हाई कोर्ट के पूर्व मुख्य न्यायाधीश या न्यायाधीश।
  • दो तकनीकी सदस्य: लोक प्रशासन, वित्त, कानून, बैंकिंग या प्रौद्योगिकी क्षेत्र में न्यूनतम 25 वर्षों का अनुभव रखने वाले विशेषज्ञ। 
  • नियुक्ति प्रक्रिया: आयोग के अध्यक्ष और न्यायिक सदस्यों की नियुक्ति केंद्र सरकार द्वारा भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) से अनिवार्य परामर्श के बाद की जाएगी।
  • अधिकरणों की निगरानी (Oversight of Tribunals): यह आयोग देश के 16 प्रमुख अधिकरणों (Tribunals) की नियुक्तियों और कामकाज की निगरानी करेगा।
    • इसके दायरे में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT), आयकर अपीलीय अधिकरण (ITAT), केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (CAT), और सशस्त्र बल अधिकरण (AFT) जैसे शीर्ष निकाय शामिल हैं।
  • चयन और नियुक्ति प्रक्रिया (Selection Process):
    • खोज-सह-चयन समिति: ट्रिब्यूनलों में नियुक्तियों के लिए आयोग एक विशेष सर्च-कम-सिलेक्शन कमेटी का गठन करेगा।
    • समय सीमा: समिति प्रत्येक रिक्ति के लिए एक मुख्य नाम और एक प्रतीक्षा सूची (Waiting List) की सिफारिश करेगी। केंद्र सरकार को इस सिफारिश के 3 महीने के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
  • कार्यकाल और आयु सीमा (Tenure and Age Limit):
    • NTC सदस्यों का कार्यकाल: 5 वर्ष या 70 वर्ष की आयु (जो भी पहले हो)।
    • अधिकरणों के अध्यक्ष: कार्यकाल 5 वर्ष या अधिकतम 70 वर्ष की आयु तक।
    • अधिकरणों के सदस्य: कार्यकाल 5 वर्ष या अधिकतम 67 वर्ष की आयु तक।
    • पुनर्नियुक्ति: पिछले कार्य प्रदर्शन (Performance Review) के आधार पर सदस्यों को पुनर्नियुक्ति का अवसर मिल सकेगा।
  • डिजिटल अवसंरचना और जवाबदेही (Digital Infrastructure & Accountability): विधेयक के तहत एक नेशनल ट्रिब्यूनल्स डेटा ग्रिड (National Tribunals Data Grid) का विकास किया जाएगा।
    • इसके माध्यम से देश भर के अधिकरणों में लंबित मामलों, फैसलों की दरों और रिक्तियों की वास्तविक समय (Real-time) पर ट्रैकिंग की जा सकेगी।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल, 2026 क्या है?

उत्तर: यह भारत में 16 प्रमुख न्यायिक अधिकरणों के अध्यक्षों और सदस्यों की नियुक्तियों तथा सेवा शर्तों को पारदर्शी बनाने के लिए लाया गया एक ऐतिहासिक सुधार विधेयक है।

प्रश्न 2: लोकसभा ने ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल 2026 कब पारित किया?

उत्तर: लोकसभा (Lok Sabha) ने इस महत्वपूर्ण विधेयक को मानसून सत्र के दौरान 10 अगस्त 2026 को ध्वनि मत से पारित कर दिया।

प्रश्न 3: ट्रिब्यूनल्स रिफॉर्म्स बिल 2026 का मुख्य उद्देश्य क्या है?

उत्तर: इसका उद्देश्य अधिकरण प्रणाली में (Tribunal System in India) सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों के अनुरूप पारदर्शिता, एकरूपता और न्यायिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करना है।

प्रश्न 4: National Tribunals Commission क्या है?

उत्तर: यह विधेयक के तहत प्रस्तावित एक 5-सदस्यीय स्वतंत्र वैधानिक निकाय है, जो देश के ट्रिब्यूनलों में नियुक्तियों, प्रदर्शन की समीक्षा और शिकायतों की जांच करेगा।

प्रश्न 5: नए बिल के तहत कितने ट्रिब्यूनलों की निगरानी की जाएगी?

उत्तर: राष्ट्रीय अधिकरण आयोग (NTC) के गठन के बाद देश के कुल 16 केंद्रीय अधिकरणों (जैसे NGT, NCLAT, CAT) की प्रशासनिक निगरानी की जाएगी।

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