Vitamin D
संदर्भ:
एक प्रमुख नई स्टडी के अनुसार, विटामिन D का स्तर मानसिक और तंत्रिका विकास संबंधी समस्याओं में भूमिका निभा सकता है। नीचे विटामिन D से संबंधित सभी प्रमुख तथ्यों को संरचित रूप में प्रस्तुत किया गया है:
(Vitamin D) विटामिन D क्या है?
- यह एक वसा में घुलनशील विटामिन है, जो हड्डियों और रोग प्रतिरोधक प्रणाली के लिए आवश्यक है।
- यह दो मुख्य रूपों में पाया जाता है:
- विटामिन D2 (एर्गोकैल्सीफेरोल) – पौधों और फोर्टिफाइड खाद्य पदार्थों से
- विटामिन D3 (कोलीकैल्सीफेरोल) – त्वचा में सूर्य की UVB किरणों के संपर्क से बनता है; पशु उत्पादों में भी पाया जाता है।
अनुशंसित मात्रा:
- वयस्कों के लिए: 600 IU/दिन
- वृद्धों, गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं में आवश्यकता अधिक होती है।
- ध्यान दें: 1 IU = 0.025 माइक्रोग्राम कोलीकैल्सीफेरोल या एर्गोकैल्सीफेरोल
प्रमुख कार्य:
- कैल्शियम और फॉस्फोरस का आंतों से अवशोषण सुनिश्चित करना
- हड्डियों और दांतों को मजबूत बनाए रखना
- प्रतिरक्षा प्रणाली को संतुलित करना
- मांसपेशी क्रिया और कोशिका वृद्धि में भूमिका निभाना
स्रोत:
- प्राकृतिक स्रोत:
- सूर्य का प्रकाश (प्राकृतिक संश्लेषण), वसायुक्त मछली (जैसे सैल्मन, मैकेरल), अंडे की जर्दी
- पूरक (Supplements): खासकर उन लोगों के लिए जिनका जीवन इनडोर है या जो उच्च अक्षांशों में रहते हैं
विटामिन D की कमी से होने वाले रोग:
- रिकेट्स (Rickets): बच्चों में हड्डियों का टेढ़ा-मेढ़ा होना
- ऑस्टियोमलेशिया: वयस्कों में नरम हड्डियां
- ऑस्टियोपोरोसिस: भंगुर हड्डियां
- बार-बार संक्रमण: प्रतिरक्षा प्रणाली की कमजोरी के कारण