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What was Hamas’s three-phase ceasefire agreement, which Israel rejected?

हाल ही में हमास के सीजफायर समझौते स्वीकार करने के बाद 7 मई, 2024 को इजराइल की सेना टैंक लेकर दक्षिणी गाजा के राफा इलाके में आगे बढ़ रही हैं। उसने मिस्र से सटी गाजा की सीमा पर कब्जा कर लिया है। हमास के साथ जंग में राफा इजराइली सेना के ऑपरेशन का आखिरी पड़ाव है। इजराइल ने इंटेलिजेंस के अनुसार हमास सीमा का इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए करता है। राफा पर हमले से पहले इजराइल ने एक लाख फिलिस्तीनियों को इलाके से निकालने की बात कही है

हमास ने सीजफायर कबूल किया, लेकिन यह इजराइल को नामंजूर-

  • इजराइल से जंग के 7 महीने बाद हमास ने मिस्र और कतर के सीजफायर के प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। हमास ने 6 मई को इसे लेकर आधिकारिक बयान जारी किया।
  • हमास के लीडर इस्माइल हानिए ने कहा कि वे इजराइल के साथ युद्धविराम के लिए उनकी शर्तों को स्वीकार कर रहे हैं। हमास ने कहा, “अब फैसला इजराइल के हाथ में है कि वह सीजफायर के लिए तैयार होता है या नहीं।”
  • हालांकि, इजराइल ने कहा है कि हमास जिन शर्तों पर तैयार हुआ उसे वो मंजूर नहीं है। इसके बाद इजराइल ने जंग के आखिरी फेज की शुरुआत करते हुए दक्षिणी गाजा के राफा पर हमले किए।

हमास की युद्ध विराम की शर्तों के चरण – 

पहले चरण –

  • इसमें 40 दिनों के सीजफायर की बात है। इस दौरान 33 इजरायली बंधकों को रिहा किया जाएगा लेकिन बदले में इजरायल को भी अपनी जेलों में बंद फिलिस्तीनी कैदियों को छोड़ना होगा। ये एक तरह से होस्टेज-प्रिजनर डील है।
  • इसी फेज में एक और शर्त है, जिसके तहत इजरायल की सेना आंशिक तौर पर गाजा पट्टी छोड़ देगी, ताकि दक्षिण से उत्तरी गाजा की तरफ आना-जाना हो सके। उत्तरी गाजा वो हिस्सा है, जहां इजरायली सेना दावा कर रही है कि उसने हमास के ढांचे को पूरी तरह से खत्म कर दिया है।

दूसरा चरण –

सीजफायर को और 42 दिन आगे बढ़ाया जाए। ये आगे स्थाई युद्धविराम तक जा सकता है। गाजा पट्टी से इजरायली सेना को पूरी तरह से हटाने की बात भी इस फेज का हिस्सा है। हमास इस समय सारे बंधकों को रिहा कर देगा, लेकिन बदले में इजरायली जेलों से प्रो-हमास कैदी छोड़ जाएं।

तीसरा तथा अंतिम चरण –

इस समय हमास को फिलिस्तीनी सुरक्षा कैदियों के शवों के बदले में उन लोगों के शवों को सौंपने होंगे जो 7 अक्टूबर को मारे गए थे या कैद जिनकी मौत हो गई। इस लेनदेन के बाद गाजा पट्टी में रिकंस्ट्रक्शन का काम किया जाए, जैसा कि कतर, इजिप्ट और यूनाइटेड नेशन्स वादा कर रहे हैं। हमास ये भी चाहता है कि गाजा पट्टी पर इजरायली सेना ने जो नाकेबंदी की हुई है, वो पूरी तरह से खत्म हो जाए। 

शर्तें आने के साथ ही राफा पर शुरू हमले –

हमास की शर्तों वाली डील आने के साथ ही जंग और तेज हुई लगने लगी। दक्षिणी गाजा के राफा इलाके में कई ब्लास्ट हुए। इससे एक दिन पहले ही इजरायली आर्मी ने राफा को खाली करने के लिए वहां बसे लोगों को नोटिस भेजा था। राफा वो हिस्सा है, जहां गाजा के उत्तरी हिस्से से भागे हुए फिलिस्तीनी नागरिक बसे हैं। इजरायली सेना को यकीन है कि राफा में हजारों हमास लड़ाके हैं, साथ ही दर्जनों बंधक भी यहां छिपाए हुए होंगे क्योंकि फिलिस्तीन के पास फिलहाल इससे सुरक्षित जगह नहीं। 

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच सालों से तनाव रहा है। 1948 से अब तक 7 जंग लड़ी जा चुकी हैं।

इजराइल और गाजा के बारे में –

इजराइल –

  • देश के तौर पर इजराइल की स्थापना 14 मई, 1948 में हुई थी। इससे पहले वहां फिलिस्तीनी मुस्लिमों की जमीन थी। यहूदी मिलिशियाओं ने जंग के बाद यहां अपने लोगों को बसाया।
  • 2021 की पॉपुलेशन इंडेक्स के मुताबिक, इजराइल में 93.6 लाख लोग रहते हैं। इसमें 73.6% यहूदी, 18.1% मुस्लिम, 1.9% ईसाई के साथ अन्य समुदाय के लोग रहते है। इजराइल की दो मुख्य भाषाएं हैं, हिब्रू और अरबी।
  • इजराइल में फिलहाल लिकुड पार्टी की सरकार है। देश के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हैं। वहीं राष्ट्रपति इसहाक हर्जोग हैं।

गाजा –

  • गाजा पट्टी साल 1949 में अस्तित्व में आई। इसका एरिया करीब 365 स्क्वायर किमी है। 2020 की पॉपुलेशन इंडेक्स के मुताबिक, गाजा की कुल जनसंख्या करीब 20.5 लाख है। इनमें ज्यादातर सुन्नी मुस्लिम रहते हैं। इसके अलाव यहां शिया और अहमदी मुस्लिम का छोटा समुदाय भी है।
  • गाजा के तीन तरफ इजराइल और दक्षिण में मिस्र है। 2007 से यहां हमास का कब्जा है। गाजा में 2006 के बाद कोई चुनाव नहीं हुआ है। हमास फिलिस्तीन राज्य और फिलिस्तीनी लोगों का प्रतिनिधित्व करने का दावा करता है।
  • 1918 से 1948 तक ब्रिटेन और 1948-1967 तक मिस्र के कब्जे में रहने से पहले गाजा ओटोमन साम्राज्य का हिस्सा था। 1967 में इजराइल ने मिस्र से गाजा पट्टी और जॉर्डन से वेस्ट बैंक पर कब्जा कर लिया। 2005 में इजराइल ने गाजा से अपना कंट्रोल वापस लिया और गाजा स्वतंत्र रूप में काम करने लगा।

हमास:

हमास एक  फिलिस्तीनी राजनीतिक सशस्त्र समूह है जिसकी स्थापना वर्ष 1987 में हुई थी। यह एक उग्रवादी समूह है जो इज़रायली कब्ज़े के खिलाफ एक प्रतिरोध आंदोलन के रूप में उभरा था।

पृष्ठभूमि:

  • हमास की स्थापना वर्ष 1987 में मिस्र के मुस्लिम ब्रदरहुड की एक शाखा के रूप में की गई थी जो हिंसक जिहाद के माध्यम से अपने एजेंडे को पूरा करना चाहता था। 
  • इसने इज़रायली कब्ज़े और फतह के खिलाफ एक प्रतिरोध आंदोलन के रूप में लोकप्रियता हासिल की।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा वर्ष 1997 में हमास को एक आतंकवादी संगठन घोषित किया गया। इज़रायल और अधिकांश यूरोप सहित कई अन्य देश भी हमास के प्रति यही दृष्टिकोण अपनाते हैं।

विचारधारा:

  • हमास का मानना है कि फिलिस्तीन की भूमि के किसी भी भाग का समझौता नहीं किया जाएगा और न ही उसे किसी को दिया जायेगा।
  • फिलिस्तीन की पूर्ण मुक्ति के अतिरिक्त, हमास अन्य सभी विकल्पों को अस्वीकार करता है।

अमेरिका ने पहली बार इजराइल को गोला-बारूद की सप्लाई रोकी

  • राफा में सैन्य अभियान की घोषणा करके नेतन्याहू ने एक बार फिर अमेरिका को नाराज कर दिया है। यही कारण है कि 7 अक्टूबर 2024 के हमले के बाद पहली बार अमेरिका ने इजराइल भेजे जाने वाले गोला- बारूद की खेप रोकी।
  • एक रिपोर्ट के अनुसार इस खेप में मिसाइल समेत जंग से जुड़े कई सामान थे। इससे पहले अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने नेतन्याहू से कहा था कि राफा में सैन्य अभियान से अमेरिका-इजराइल के संबंधों पर गलत असर पड़ेगा।

समझौता करवाने में जुटे हैं मिस्र, कतर और अमेरिका

  • मिस्र, कतर और अमेरिका साथ मिलकर हमास और इजराइल के बीच युद्धविराम करवाने की कोशिश कर रहे हैं। तीनों देशों ने 26 अप्रैल को प्रपोजल पर बातचीत करने के लिए एक हाई-लेवल डेलिगेशन इजराइल भेजा था।
  • इससे पहले कतर और मिस्र की मध्यस्थता के बाद नवंबर में इजराइल-हमास के बीच पहली बार 4 दिन के लिए युद्धविराम हुआ था। इस दौरान हमास ने 112 बंधकों को रिहा किया था। वहीं इजराइल ने भी जेल में बंद 240 से ज्यादा फिलिस्तिनियों को छोड़ा था।

इजराइल ने हमास को दिया था आखिरी मौका

  • 6 महीने की जंग में इजराइल ने राफा छोड़कर पूरे गाजा पर कब्जा कर लिया है। राफा पर हमले से पहले इजराइल ने हमास को समझौते का आखिरी मौका दिया था। इजराइल ने कहा था कि अगर हमास समझौता स्वीकार नहीं करता है, इजराइल राफा पर बड़ा हमला करेगा।
  • इसी कारण मिस्र का डेलिगेशन दोनों पक्षों में समझौते करवाने को कोशिश कर रहा है। पिछले दिनों रिपोर्ट आई थी कि मिस्र बंधकों को छोड़ने के लिए हमास पर दबाव बनाने की तैयारी कर रहा है। दरअसल राफा मिस्र के बॉर्डर के पास है। इसलिए उसे डर है कि अगर इजराइली सेना राफा पर हमला करेगी, तो बड़ी संख्या में शरणार्थी मिस्र में घुसने की कोशिश करेंगे।
  • इसी से बचने के लिए इजिप्ट का एक डेलिगेशन इजराइल और हमास के बीच शांति समझौते करवाने की कोशिश में जुटा है। इस समय 10 लाख से ज्यादा फिलिस्तीनियों ने राफा शहर में पनाह ली हुई है।

इजरायल की हाँ में क्या दिक्कतें-

  • फिलहाल दोनों के बीच युद्धविराम की राह थोड़ी कठिन हैं। इजरायल के पास इसके अपने कारण हैं। शर्तों में सेना को हटाने की बात है, जिसपर इजरायल पहले भी कई बार इनकार कर चुका। उसे डर है कि सेना के हटते ही हमास फिर से फलने-फूलने लगेगा और महीनों की कवायद बेकार हो जाएगी।
  • होस्टेज-प्रिजनर डील भी मुश्किल हो सकती है। असल में हमास कुछ बंधकों के बदले अपने सैकड़ों लोगों को इजरायली जेलों से छोड़ने की मांग करता रहा।
  • फिलहाल इजरायल के भीतर 19 जेलें हैं, जहां फिलिस्तीनी रखे जाते हैं। इसके अलावा वेस्ट बैंक में जेल है। इनमें से बहुतेरे पत्थरबाजी, इजरायली लोगों और प्रॉपर्टी को नुकसान पहुंचाने की वजह से जेल में हैं। वहीं हमास, फतह, इस्लामिक जिहाद और पॉपुलर फ्रंट से जुड़े आतंकी भी हैं। इन्हें रिहा करना इजरायल के लिए खतरा बन सकता है।

गाजा में क्या है स्थिति

  • जमीनी और हवाई हमलों से उत्तरी गाजा पूरी तरह तबाह हो चुका, जबकि मध्य का कुछ हिस्सा बाकी है। दक्षिणी हिस्से राफा में हमलों की शुरुआत मानी जा रही है।
  • इस बीच अलग-अलग सूत्र दावा कर रहे हैं कि इजरायली हमलों में गाजा पट्टी समेत हमास के 35 हजार से ज्यादा लोग मारे गए।
  • वैसे यूनाइटेड नेशन्स की तुर्किए की साइट में मार्च में ये आंकड़ा 31 हजार से ज्यादा था।  
  • वहीं 72 हजार से ज्यादा जख्मी हुए। इजरायली सेना के मुताबिक, दोतरफा हमलों में उसके 247 सैनिक खत्म हुए, जबकि डेढ़ हजार के करीब सैनिक जख्मी हैं।
  • UN के मुताबिक, गाजा में नाकेबंदी और हमलों की वजह से राशन-पानी नहीं पहुंच पा रहा। इसकी वजह से हर चार में से एक शख्स खाने की कमी से जूझ रहा है।
  • हवाई हमलों से रिहायशी इमारतें ध्वस्त हो रही हैं। हालात ऐसे हैं कि सवा दो मिलियन आबादी वाली पट्टी में 80% लोग घरों से बाहर शिविरों में रहने को मजबूर हैं।

हमास ने 5 साल के युद्धविराम की इच्छा जाहिर की थी

  • कुछ दिन पहले हमास के एक सीनियर अधिकारी ने 5 साल के युद्धविराम की इच्छा जाहिर की थी।
  • खलील अल-हैय्या ने कहा था कि अगर फिलिस्तीन एक अलग और आजाद देश बनता है तो हम हथियार डाल देंगे और एक साधारण राजनीतिक पार्टी के तौर पर काम करेंगे।
  • हालांकि, 7 अक्टूबर के हमले के बाद हमास का खात्मा करने की कसम खा चुका इजराइल इस समझौते के लिए सहमत नहीं है।
  • अल-हैय्या का कहना था कि अगर फिलिस्तीन को 1967 की जंग से पहले के इलाके दिए जाते हैं तो वो इजराइल के खिलाफ युद्ध नहीं लड़ेगा।

Disclaimer: The article may contain information pertaining to prior academic years; for further information, visit the exam’s “official or concerned website”.

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