WHO 3 by 35 Initiative
WHO 3 by 35 Initiative –
संदर्भ:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने गैर-संक्रामक रोगों (NCDs) के वैश्विक बोझ को कम करने के लिए “3 बाय 35″ पहल शुरू की है। यह रणनीति तंबाकू, शराब और मीठे पेयों जैसे तीन उच्च-जोखिम उत्पादों को लक्षित करती है, जो हृदय रोग, कैंसर, मधुमेह और अन्य दीर्घकालिक बीमारियों के प्रमुख कारण हैं। WHO का लक्ष्य है कि 2035 तक इन उत्पादों पर स्वास्थ्य करों के ज़रिए कम से कम 50% वास्तविक मूल्य वृद्धि की जाए, ताकि दुनिया भर में हो रही 75% से अधिक मौतों को रोका जा सके।
हेल्थ टैक्स (Health Tax): क्या है और क्यों जरूरी है?
परिभाषा:
हेल्थ टैक्स वह कर होता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक उत्पादों — जैसे तंबाकू, शराब और मीठे पेय पदार्थों — पर लगाया जाता है। इसका उद्देश्य केवल राजस्व जुटाना नहीं, बल्कि सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा भी होता है।
मुख्य उद्देश्य:
- हानिकारक उपभोग में कमी:
- इन उत्पादों की कीमत बढ़ाकर उनकी खपत घटाना, जिससे गंभीर बीमारियों और समयपूर्व मृत्यु को रोका जा सके।
- उदाहरण: कोलंबिया में सिगरेट पर कर बढ़ने से उपभोग में 34% की गिरावट आई।
- राजस्व सृजन: अगले दशक में वैश्विक स्तर पर US$ 1 ट्रिलियन अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न किया जा सकता है।
- स्वास्थ्य प्रणाली को सशक्त बनाना: सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज, रोकथाम कार्यक्रमों और स्वास्थ्य ढांचे को वित्तपोषित करने के लिए इस्तेमाल।
- एसडीजी लक्ष्य 3 (SDG 3) को समर्थन:
- सभी आयु वर्गों के लिए स्वास्थ्य और भलाई को सुनिश्चित करना।
- 2030 तक गैर-संचारी रोगों (NCDs) से मृत्यु में एक-तिहाई की कमी लाने का लक्ष्य।
हेल्थ टैक्स की आवश्यकता: प्रमुख कारण
- स्वास्थ्य पर प्रभाव:
- तंबाकू, शराब और मीठे पेय पदार्थों का अत्यधिक सेवन गैर–संचारी रोगों (NCDs) की महामारी को बढ़ाता है।
- NCDs वैश्विक स्तर पर 75% से अधिक मौतों के लिए जिम्मेदार हैं।
- आर्थिक प्रभाव:
- ये उत्पाद नकारात्मक बाहरी प्रभाव (externalities) पैदा करते हैं—जैसे दूसरों के स्वास्थ्य पर बोझ।
- साथ ही, आंतरिक छिपी हुई लागतें (internalities) होती हैं—जैसे दीर्घकालिक बीमारी, उत्पादकता में कमी।
- केवल तंबाकू उपयोग से ही 2012 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को US$ 1.4 ट्रिलियन का नुकसान हुआ।
- समानता को बढ़ावा:
- गैर-संचारी रोगों (NCDs) का प्रभाव निम्न-आय वर्गों पर अधिक पड़ता है।
- हेल्थ टैक्स से न केवल स्वास्थ्य सेवाएं सशक्त होती हैं, बल्कि स्वास्थ्य समानता (health equity) भी बढ़ती है।
हेल्थ टैक्स: चुनौतियाँ
- उद्योगों का विरोध: तंबाकू और पेय पदार्थ उद्योगों की मजबूत लॉबिंग के कारण नीतियों में विलंब या कमजोर क्रियान्वयन होता है।
- नीति निर्माण में व्यावसायिक हित अक्सर जनस्वास्थ्य पर हावी हो जाते हैं।
- प्रतिगामी कर का डर: हेल्थ टैक्स से निम्न-आय वर्ग पर अधिक आर्थिक बोझ पड़ सकता है।
- राजस्व अस्थिरता (Revenue Volatility):
- जैसे-जैसे उपभोग घटेगा, कर से होने वाली आय में गिरावट आ सकती है।
- इससे दीर्घकालिक सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों की स्थिरता प्रभावित हो सकती है।
- कर छूट और उद्योग समझौते:कुछ दीर्घकालिक कर छूट या समझौते भविष्य में कर बढ़ोतरी को रोक सकते हैं, जिससे जनस्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
भारत में अस्वास्थ्यकर उत्पादों की खपत को कम करने के लिए उठाए गए प्रमुख कदम
- उच्च कर व्यवस्था (Taxation Measures):
- एरेटेड बेवरेजेस (कार्बोनेटेड पेय): 28% GST के साथ अतिरिक्त 12% मुआवज़ा उपकर लगाया गया है।
- उच्च वसा, शक्कर और नमक वाले खाद्य पदार्थ: इन पर 12% GST लगाया गया है ताकि इनकी खपत को हतोत्साहित किया जा सके।
- ट्रांस फैट पर नियंत्रण: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने
खाद्य उत्पादों में ट्रांस फैटी एसिड (TFA) को कुल तेल और वसा के अधिकतम 2% तक सीमित किया