WJP Rule of Law Index 2026 जारी, भारत 143 देशों की सूची में 88वें स्थान पर रहा
संदर्भ:
हाल ही में वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट (World Justice Project – WJP) द्वारा अपनी प्रमुख वार्षिक रिपोर्ट WJP कानून शासन सूचकांक 2026 (WJP Rule of Law Index 2026) जारी की गई। इस सूचकांक में कुल 143 देशों की सूची में भारत 88वें स्थान पर रहा है, जो पिछले वर्ष (2025 में 86वां स्थान) की तुलना में दो स्थान नीचे खिसक गया।

WJP Rule of Law Index 2026 के मुख्य बिंदु:
- परिचय: WJP कानून शासन सूचकांक 2026, दुनिया भर में कानून के शासन (Rule of Law) को मापने और समझने के लिए सबसे प्रमुख एवं स्वतंत्र डेटा स्रोत है।
- यह इस बात का आकलन करता है कि विभिन्न देशों के नागरिक अपने रोजमर्रा के जीवन में कानून के शासन का किस प्रकार अनुभव और धारणा करते हैं।
- सूचकांक की कार्यप्रणाली (Rule of Law Index Methodology): यह रिपोर्ट व्यापक वैश्विक सर्वेक्षणों पर आधारित होती है, जिसमें दो मुख्य घटकों का उपयोग किया जाता है:
- सामान्य जनसंख्या सर्वेक्षण (General Population Poll – GPP): प्रत्येक देश के तीन सबसे बड़े शहरों में आम जनता से लिया जाने वाला फीडबैक.
- योग्य उत्तरदाता प्रश्नावली (Qualified Respondents’ Questionnaire – QRQ): विभिन्न कानूनी विशेषज्ञों, वकीलों और शिक्षाविदों द्वारा भरा जाने वाला तकनीकी डेटा.
- स्कोरिंग प्रणाली: सूचकांक में स्कोर 0 से 1 के पैमाने पर दिया जाता है, जहाँ ‘1’ कानून के शासन के प्रति सर्वोच्च और मजबूत अनुपालन को प्रदर्शित करता है।
- सूचकांक के 8 प्रमुख मानक (Eight Primary Factors): WJP की यह रिपोर्ट मुख्य रूप से 8 प्रमुख स्तंभों पर आधारित 44 उप-कारकों के व्यापक मूल्यांकन से तैयार की जाती है:
- सरकारी शक्तियों पर सीमाएं (Constraints on Government Powers): यह जांचना कि क्या कार्यपालिका शक्तियों पर संस्थागत अंकुश है।
- भ्रष्टाचार की अनुपस्थिति (Absence of Corruption Index): सार्वजनिक और न्यायिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार का स्तर।
- पारदर्शी सरकार (Open Government Index): नागरिकों के लिए सूचना की उपलब्धता और सरकारी डेटा की पारदर्शिता।
- मौलिक अधिकार (Fundamental Rights Ranking): अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों का संरक्षण।
- व्यवस्था और सुरक्षा (Order and Security): अपराध नियंत्रण और नागरिक सुरक्षा की स्थिति।
- नियामक प्रवर्तन (Regulatory Enforcement): नियमों और विनियमों को लागू करने की प्रभावशीलता।
- दीवानी न्याय (Civil Justice Ranking): दीवानी मामलों की न्याय प्रणाली में समयबद्धता और निष्पक्षता।
- अधिनियमित/आपराधिक न्याय (Criminal Justice Index): आपराधिक जांच और न्यायिक प्रणाली की स्वतंत्रता।
- 2026 वैश्विक रैंकिंग और प्रदर्शन (Global Rule of Law Rankings)
- शीर्ष 5 देश: वैश्विक रैंकिंग में यूरोपीय देशों का दबदबा बरकरार है। डेनमार्क (0.90 स्कोर) प्रथम स्थान पर रहा, जिसके बाद क्रमशः नॉर्वे, फिनलैंड, स्वीडन और लक्ज़मबर्ग का स्थान है।
- सबसे निचले स्थान वाले देश: सूचकांक में सबसे अंतिम स्थान पर वेनेजुएला (143वां स्थान) रहा। इसके बाद क्रमशः अफगानिस्तान (142वां), हैती (141वां), कंबोडिया (140वां) और निकारागुआ (139वां) का स्थान है।
- वैश्विक मंदी का रुझान: रिपोर्ट के अनुसार, लगातार 9वें वर्ष वैश्विक स्तर पर कानून के शासन में गिरावट दर्ज की गई है। दुनिया के 62% देशों के समग्र स्कोर में इस वर्ष कमी आई है, जिसका प्रमुख कारण संकुचित होता नागरिक स्थान (Shrinking Civic Space) और न्यायिक स्वतंत्रता में कमी है।
- भारत का प्रदर्शन और स्कोर (India Rule of Law Score 2026):
- समग्र स्कोर और रैंक: भारत का कुल सूचकांक स्कोर 0.48 रहा, जिसके साथ भारत 143 देशों की सूची में 88वें स्थान पर है।
- क्षेत्रीय स्थिति (South Asia Region): दक्षिण एशिया के 6 देशों में भारत तीसरे स्थान पर है।
- इस क्षेत्र में नेपाल (वैश्विक रैंक 72) शीर्ष प्रदर्शनकर्ता रहा है, जिसके बाद श्रीलंका का स्थान आता है। पाकिस्तान (140वां) और बांग्लादेश इस क्षेत्र में भारत से काफी पीछे हैं.
- वैश्विक महाशक्तियों से तुलना: इस सूचकांक में संयुक्त राज्य अमेरिका 30वें स्थान पर, चीन 92वें स्थान पर तथा रूस 121वें स्थान पर स्थित है।
भारत के लिए इस सूचकांक का महत्व और चिंताएं:
- न्यायिक अवसंरचना और देरी (Judicial Delays): भारत की कम रैंकिंग का एक बड़ा कारण दीवानी और आपराधिक न्याय (Civil & Criminal Justice) प्रणालियों में होने वाली अत्यधिक देरी, मामलों का लंबित होना और बुनियादी ढांचे की कमी है।
- आर्थिक प्रभाव और वैश्विक निवेश (Economic Impact & Investment): मजबूत ‘विधि का शासन’ सीधे तौर पर किसी देश के व्यापार सुगमता सूचकांक (Ease of Doing Business) को प्रभावित करता है।
- वैश्विक निवेशक उन देशों को प्राथमिकता देते हैं जहाँ अनुबंध प्रवर्तन (Contract Enforcement) और नागरिक सुरक्षा की स्थिति सुदृढ़ होती है।
- आर्थिक स्थिरता और मुद्रास्फीति (Macroeconomic Stability): WJP रिपोर्ट के अनुसार, जिन देशों में कानून का शासन मजबूत होता है, वहाँ मुद्रास्फीति (Inflation) अधिक नियंत्रित रहती है। कमजोर विधिक संरचना वाले देशों में बाजार में मूल्य अस्थिरता अधिक देखी जाती है।
- संवैधानिक लक्ष्यों की प्राप्ति: भारतीय संविधान की प्रस्तावना (Preamble) न्याय, स्वतंत्रता और समानता की बात करती है। यह सूचकांक दर्शाता है कि भारत को अभी जमीनी स्तर पर विधिक प्रशासनिक सुधारों (Legal Reforms) की गति तेज करने की आवश्यकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: WJP कानून शासन सूचकांक (Rule of Law Index) क्या है?
उत्तर: यह वर्ल्ड जस्टिस प्रोजेक्ट (World Justice Project Report) द्वारा जारी एक वार्षिक वैश्विक सूचकांक है जो विभिन्न देशों में कानून के वास्तविक अनुपालन का मूल्यांकन करता है।
प्रश्न 2: WJP Rule of Law Index 2026 में भारत को कौन-सा स्थान मिला है?
उत्तर: इस सूचकांक (WJP Index India 88th Rank) में भारत 0.48 स्कोर के साथ 143 देशों में 88वें स्थान पर रहा है।
प्रश्न 3: कानून शासन सूचकांक 2026 में कुल कितने देशों को शामिल किया गया है?
उत्तर: वर्ष 2026 के इस वैश्विक सूचकांक (Rule of Law Index 143 Countries) में दुनिया भर के 143 देशों और न्यायक्षेत्रों को शामिल किया गया है।
प्रश्न 4: WJP कानून शासन सूचकांक किन प्रमुख मानकों के आधार पर तैयार किया जाता है?
उत्तर: यह भ्रष्टाचार की अनुपस्थिति, मौलिक अधिकार, पारदर्शी सरकार, सुरक्षा, और दीवानी व आपराधिक न्याय प्रणाली जैसे 8 प्रमुख कारकों पर आधारित होता है।
प्रश्न 5: WJP Rule of Law Index 2026 में प्रथम स्थान पर कौन-सा देश रहा?
उत्तर: यूरोपीय देश डेनवार्क 0.90 के सर्वोच्च स्कोर के साथ सूचकांक में लगातार प्रथम स्थान पर बना हुआ है।