39th Surajkund International Self-Reliant Crafts Festival

संदर्भ:
इस वर्ष 39वां सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय आत्मनिर्भर शिल्प महोत्सव 2026 का शुभारंभ हरियाणा के फरीदाबाद में हो चुका है। जिसका आयोजन 31 जनवरी से 15 फरवरी, 2026 तक किया जाएगा।
39वां सूरजकुंड महोत्सव:
- उद्घाटन: भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन द्वारा 31 जनवरी, 2026 को किया गया।
- तिथि: 31 जनवरी से 15 फरवरी, 2026 तक।
- मुख्य विषय: “लोकल टू ग्लोबल – आत्मनिर्भर भारत”।
- थीम राज्य: इस वर्ष उत्तर प्रदेश और मेघालय को संयुक्त रूप से थीम राज्य बनाया गया है।
- भागीदार राष्ट्र: मिस्र (Egypt) चौथी बार इस मेले का भागीदार देश बना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि:
सूरजकुंड का शाब्दिक अर्थ है ‘सूर्य का कुंड’। यह 10वीं शताब्दी का एक प्राचीन जलाशय है, जिसे तोमर वंश के राजा सूरजपाल ने बनवाया था। शिल्प मेले की शुरुआत 1987 में पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प को बढ़ावा देने के लिए की गई थी, जिसे 2013 में अंतरराष्ट्रीय स्तर का दर्जा दिया गया।
उद्देश्य:
- वैश्विक मंच: स्थानीय शिल्पकारों (जैसे उत्तर प्रदेश की चिकनकारी या मेघालय के बांस शिल्प) को सीधे अंतरराष्ट्रीय खरीदारों से जोड़ना है।
- आत्मनिर्भरता: इसका उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को सशक्त बनाना है।
- सांस्कृतिक कूटनीति: मिस्र जैसे देशों की भागीदारी द्वारा सांस्कृतिक संबंधों को आधुनिक संदर्भ में पुनर्जीवित करना है।
थीम राज्यों का महत्व:
- उत्तर प्रदेश: राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प विरासत, जैसे वाराणसी का रेशम, कन्नौज का इत्र और मुरादाबाद का पीतल उद्योग, ‘एक जनपद एक उत्पाद’ (ODOP) मॉडल को प्रदर्शित करते हैं।
- मेघालय: उत्तर-पूर्वी भारत की ‘लुप्तप्राय’ कलाओं और टिकाऊ (Sustainable) जीवनशैली का प्रतिनिधित्व करता है।
सरकारी योजनाएं और तकनीकी नवाचार:
- पीएम विश्वकर्मा योजना: महोत्सव में इस योजना पर विशेष बल दिया गया है, जो पारंपरिक कारीगरों को वित्तीय सहायता और कौशल प्रशिक्षण प्रदान करती है।
- मेला साथी ऐप (Mela Sathi App): डिजिटल इंडिया के तहत इस ऐप को लॉन्च किया गया है ताकि आगंतुकों को स्टॉल लोकेटर, पार्किंग और टिकट जैसी सुविधाएं आसानी से मिल सकें।
आर्थिक और पर्यटन परिदृश्य:
- रोजगार सृजन: 1200 से अधिक स्टालों के माध्यम से हजारों शिल्पकारों को प्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
- MICE टूरिज्म: दिल्ली के निकट होने के कारण, हरियाणा इसे ‘मीटिंग्स, इंसेंटिव्स, कॉन्फ्रेंस और एग्जीबिशन’ (MICE) हब के रूप में विकसित कर रहा है।
