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52वां G7 शिखर सम्मेलन 2026 (52nd G7 Summit 2026) | Apni Pathshala

52nd G7 Summit 2026

52nd G7 Summit 2026

संदर्भ:

हाल ही में भारत के विदेश मंत्री द्वारा आधिकारिक रूप से यह पुष्टि की गई है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, 15-17 जून 2026 को फ्रांस के एवियन-लेस-बैंस (Évian-les-Bains) में आयोजित होने वाले 52वें G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेने वाले हैं।  

G7 शिखर सम्मेलन 2026:

  • मेजबान देश और स्थान: फ्रांस, एवियन-लेस-बैंस।
  • तिथि: 15-17 जून 2026 (डोनाल्ड ट्रम्प के जन्मदिन के साथ टकराव से बचने के लिए इसे मूल तिथि से एक दिन आगे बढ़ाया गया है)।
  • भारत की स्थिति: भारत G7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन फ्रांस ने इसे एक ‘आउटरीच पार्टनर’ और ‘विशेष अतिथि’ के रूप में आमंत्रित किया है।
  • अन्य आमंत्रित देश: ब्राजील, दक्षिण कोरिया और केन्या। 

मुख्य एजेंडा और भारत की भूमिका:

  • वैश्विक आर्थिक स्थिरता: फ्रांसीसी अध्यक्षता का मुख्य फोकस वैश्विक आर्थिक असंतुलन को कम करना है। भारत अपनी ‘डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर’ (UPI आदि) और समावेशी विकास के मॉडल को वैश्विक समाधान के रूप में प्रस्तुत करेगा। 
  • पश्चिम एशिया (Middle East) संकट: इजराइल-ईरान तनाव के बीच हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) की सुरक्षा इस सम्मेलन का केंद्र बिंदु होगी। दुनिया के लगभग 20% तेल और एलएनजी की आपूर्ति इसी मार्ग से होती है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। 
    • ग्लोबल साउथ की आवाज़: भारत, जो वर्तमान में BRICS की अध्यक्षता भी कर रहा है, G7 मंच का उपयोग ‘ग्लोबल साउथ’ की चिंताओं (जैसे जलवायु वित्त, ऋण संकट और खाद्य सुरक्षा) को विकसित देशों के सामने रखने के लिए करेगा।
  • भारत-फ्रांस ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’: फरवरी 2026 में राष्ट्रपति मैक्रों की भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को इस नए स्तर पर उन्नत किया है। वर्ष 2026 को ‘भारत-फ्रांस नवाचार वर्ष’ के रूप में मनाया जा रहा है। शिखर सम्मेलन के दौरान निम्नलिखित बिंदुओं पर द्विपक्षीय चर्चा संभावित है: 
  • रक्षा: 26 राफेल-मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद और भारत में H125 हेलीकॉप्टरों की असेंबली लाइन।
  • नागरिक परमाणु ऊर्जा: जैतापुर परमाणु ऊर्जा संयंत्र परियोजना और ‘स्मॉल मॉड्यूलर रिएक्टर्स’ (SMRs) पर सहयोग।

G7 (Group of Seven) दुनिया की सात सबसे उन्नत अर्थव्यवस्थाओं का एक अनौपचारिक समूह है। इसका कोई स्थायी सचिवालय या कानूनी दर्जा नहीं है। 

    • सदस्य देश: अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और कनाडा।
    • यूरोपीय संघ (EU): 1977 से एक ‘गैर-संख्यांकित’ सदस्य के रूप में सभी चर्चाओं में भाग लेता है।
    • अध्यक्षता: हर साल सदस्यों के बीच रोटेशन के आधार पर बदलती है।  

ऐतिहासिक विकास:

  1. G6 (1975): तेल संकट के बाद फ्रांस की पहल पर 6 औद्योगिक देशों (अमेरिका, ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान) ने पहली बैठक की।
  2. G7 (1976): कनाडा के जुड़ने से यह G7 बना।
  3. G8 (1998-2014): रूस के शामिल होने से इसे G8 कहा गया, लेकिन 2014 में क्रीमिया विलय के कारण उसे निलंबित कर दिया गया।
  • आर्थिक प्रभाव: G7 देश वैश्विक जीडीपी का लगभग 44% और शुद्ध वैश्विक संपत्ति का 60% नियंत्रित करते हैं।

  • प्रमुख एजेंडा: यह मंच वैश्विक आर्थिक स्थिरता, जलवायु परिवर्तन, अंतर्राष्ट्रीय सुरक्षा, और हाल ही में ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ (AI) जैसे विषयों पर नीतिगत समन्वय करता है।
  • निर्णय: इसके निर्णय सदस्यों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं होते, लेकिन वे वैश्विक दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

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