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स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) | Apni Pathshala

SSLV

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संदर्भ:

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने हाल ही में स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) के उन्नत तीसरे चरण (Improved Third Stage) का सफलतापूर्वक ग्राउंड टेस्ट (static test) किया है। यह परीक्षण सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र (Satish Dhawan Space Centre – SDSC), श्रीहरिकोटा में सॉलिड मोटर स्टैटिक टेस्ट फैसिलिटी में किया गया।

स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV)  क्या हैं?

  • स्मॉल सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (SSLV) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) द्वारा विकसित एक लघु प्रक्षेपण यान है। इसे विशेष रूप से तेजी से बढ़ते वैश्विक लघु उपग्रह बाजार को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है। 
  • यह एक 3-चरणीय ठोस प्रणोदक वाला रॉकेट है, जिसके अंत में तरल ईंधन आधारित ‘वेलोसिटी ट्रिमिंग मॉड्यूल’ (VTM) लगा होता है। यह 500 किग्रा तक के उपग्रहों को 500 किमी की निचली पृथ्वी कक्षा (LEO) में स्थापित कर सकता है।
  • SSLV की सबसे बड़ी खूबी इसका न्यूनतम ‘टर्न-अराउंड समय’ है। इसे मात्र 72 घंटों में असेंबल किया जा सकता है, जबकि PSLV के लिए लगभग 60-70 दिनों की आवश्यकता होती है।
  • इसे असेंबल करने के लिए केवल 6 लोगों की एक छोटी टीम और न्यूनतम लॉन्च इंफ्रास्ट्रक्चर की आवश्यकता होती है। इसकी ऊंचाई लगभग 34 मीटर और व्यास 2 मीटर है। इसका लिफ्ट-ऑफ द्रव्यमान लगभग 120 टन है।

ISRO के उन्नत SSLV तीसरे चरण का ग्राउंड टेस्ट:

  • इसरो (ISRO) ने अपने नए लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (SSLV) के तीसरे चरण का परीक्षण 108 सेकंड तक चला, जिसके दौरान सभी प्रदर्शन पैरामीटर के करीब पाए गए। 
  • इसमें पुराने कॉन्फ़िगरेशन के स्थान पर उच्च-शक्ति वाले कार्बन-एपॉक्सी कम्पोजिट मोटर केस का उपयोग किया गया, जिससे SSLV की पेलोड क्षमता लगभग 90 किलोग्राम बढ़ गई है।
  • इग्निटर (igniter) और नोजल (nozzle) प्रणालियों के डिजाइन में भी सुधार किया गया है, जिससे यह प्रणाली अधिक कुशल और मजबूत बन गई है।
  • परीक्षण के दौरान, मोटर को लगभग 233 सेंसर के साथ मापा गया ताकि दबाव, थ्रस्ट, तापमान, कंपन और नियंत्रण इलेक्ट्रॉनिक्स के मापदंडों को कैप्चर किया जा सके। 

महत्व:

  • यह परीक्षण ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बढ़ावा देता है। स्वदेशी रूप से विकसित कम्पोजिट सामग्री और उत्पादन सुविधाओं का उपयोग भारत की अपनी अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में आत्मनिर्भरता को दर्शाता है। 
  • SSLV को विशेष रूप से छोटे उपग्रहों (10 से 500 किलोग्राम) के तेजी से बढ़ते वैश्विक बाजार के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्नत तीसरे चरण की अतिरिक्त पेलोड क्षमता इसे अंतरराष्ट्रीय ग्राहकों के लिए लागत प्रभावी बनाती है।
  • इसरो की वाणिज्यिक शाखा, न्यूस्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL), निजी भारतीय उद्योगों के माध्यम से SSLV के निर्माण की योजना बना रही है। यह परीक्षण निजी अंतरिक्ष स्टार्ट-अप द्वारा विकसित लॉन्च वाहनों के लिए भी मार्ग प्रशस्त करता है।

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