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देश का पहला हाइड्रोजन बस संचालित एयरपोर्ट बनने की राह पर कोचीन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (Cochin International Airport on its way to becoming the country first hydrogen-powered airport) | UPSC

Cochin International Airport on its way to becoming the country first hydrogen-powered airport

Cochin International Airport on its way to becoming the country first hydrogen-powered airport

संदर्भ:

हाल ही में कोचीन इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (CIAL) और केरल हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर (K-HVIC) फाउंडेशन के बीच समझौता ज्ञापन (MoA) का आदान-प्रदान किया गया। जिसमें यात्रियों के लिए हाइड्रोजन-संचालित बसें संचालित करने पर सहमति जताई गई है। 

MoA का हस्तांतरण:

  • 2 फरवरी 2026 को कोचीन हवाई अड्डे के ‘0484 एयरो लाउंज’ में एक महत्वपूर्ण समारोह में केरल हाइड्रोजन वैली इनोवेशन क्लस्टर (K-HVIC) फाउंडेशन और CIAL के बीच एक समझौता ज्ञापन (MoA) का आदान-प्रदान किया गया। 
  • इसका लक्ष्य हवाई अड्डे के भीतर यात्री परिवहन के लिए हाइड्रोजन ईंधन सेल (Fuel Cell) बसों का अधिग्रहण और संचालन करना है।
  • K-HVIC फाउंडेशन इस परियोजना के लिए वित्तीय सहायता प्रदान कर रहा है। प्रति बस की लागत ₹2.90 करोड़ तक है, जिसमें कुल परियोजना परिव्यय ₹8.7 करोड़ है।
  • इसमें शुरुआती चरण में 3 हाइड्रोजन ईंधन सेल इलेक्ट्रिक बसें तैनात की जाएंगी।

‘ग्रीन हाइड्रोजन’ की आपूर्ति श्रृंखला:

  • इस परियोजना की सफलता का मुख्य आधार स्वदेशी ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन है।
  • इसके लिए CIAL ने भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL) के साथ मिलकर हवाई अड्डा परिसर में ही दुनिया का पहला एयरपोर्ट-आधारित ग्रीन हाइड्रोजन प्लांट स्थापित किया है।
  • यह 1,000 किलोवाट (1 MW) का संयंत्र प्रतिदिन लगभग 200 किलोग्राम हाइड्रोजन उत्पादन करने में सक्षम है।
  • यहाँ हाइड्रोजन का उत्पादन ‘इलेक्ट्रोलिसिस’ के माध्यम से किया जाता है, जिसके लिए बिजली हवाई अड्डे के अपने सौर ऊर्जा संयंत्रों से प्राप्त होती है। 

राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन से जुड़ाव:

  • यह परियोजना केंद्र सरकार के नेशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (2023) का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य भारत को वैश्विक हाइड्रोजन हब बनाना है। 
  • केरल ने हाइड्रोजन के उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा देने के लिए विशिष्ट ‘हाइड्रोजन वैली’ क्लस्टर विकसित किए हैं। CIAL की यह पहल इसी रणनीतिक ब्लूप्रिंट का हिस्सा है।
  • प्रत्येक बस प्रति वर्ष लगभग 50 टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सहायक होगी, जो भारत के 2070 तक ‘नेट-जीरो’ लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। 

CIAL की विशिष्टता:

  • CIAL ने सतत ऊर्जा के क्षेत्र में कई बार “प्रथम” होने का गौरव प्राप्त किया है। 
  • 2015 में CIAL ने विश्व का पहला पूर्ण सौर ऊर्जा संचालित हवाई अड्डा होने का खिताब हासिल किया था।
  • वर्तमान में यहां की स्थापित क्षमता 50 मेगावाट से अधिक है, जो दैनिक 2 लाख यूनिट बिजली पैदा करती है।
  • CIAL को संयुक्त राष्ट्र के ‘चैंपियंस ऑफ द अर्थ’ पुरस्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।

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